रामनगरी अयोध्या में श्रीराम लला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर देशभर में उल्लास है। देश के कोने-कोने से साधु संत इस अवसर का साक्षी बनने के लिए अयोध्या धाम पहुंच रहे हैं। इस मौके पर अयोध्या नगरी में साधु संतों सहित वैरागियों के विभिन्न रंग देखने को मिल रहे हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने भ्रमण किया तो भक्तों के अनेक रूप देखने को मिले।
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भजन गायन करते संत एवं रामभक्त
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लता चौक पर भजन घायन करते साधु संत एवं रामभक्त
- फोटो : अमर उजाला
यह दृध्य रामनगरी के लता चौक के हैं। यहां पर साधु संत एकत्र होकर अपने आराध्य के भजनों में खोये रहे। इस दौरान कुछ मीडियाकर्मी उनसे बात करने के लिए आए तो वह उनके माइक पर ही भजन गायन करने लगे।
कुछ आगे बढ़ने पर एक युवती दिखाई दी। उनके सिर पर कान्हा विराजमान थे। उनसे बात करने पर पता चला कि वह भगवान की अनन्य भक्त हैं। श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा से काफी खुश हैं। वह झारखंड से अयोध्या धाम तक 600 किमी पैदल चलकर आई हैं।
भजन गायन करती सिख मंडली
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भजन गायन करती सिख मंडली
- फोटो : अमर उजाला
वहीं लता चौक पर महिला व पुरुष सिखों का समुदाय दिखाई दिया। यह लोग मंडली में रहकर भजन गायन कर रहे थे। साथ ही हाथ में कुछ तस्वीरें लिए थे, जिनका आमजन में वितरण कर रहे थे। यह मंडली भजन गायन करते हुए आगे बढ़ रही थी।
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बाइक पर रामनगरी पहुंचे बाबा
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बाइक पर पहुंचे बाबा
- फोटो : अमर उजाला
लता चौक पर ही कुछ और आगे चलने पर एक संत बाइक पर नजर आए। उनकी यह बाइक स्पोर्ट बाइक की तरह थी। इस पर वह भ्रमण करने के लिए निकले तो लोगों के बीच दर्शनीय बन गए। लोग उनसे बात करके उनके बारे में जानने के लिए उत्साहित दिखे।
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चप्पे चप्पे पर सुरक्षाकर्मी तैनात
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लता चौक पर तैनात सुरक्षाकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
वहीं लता चौक पर सुरक्षा व्यवस्था भी चाक चौबंद रही। चप्पे चप्पे पर सुरक्षाकर्मियों की नजर रही। भीषण ठंड के बावजूद वह बिल्कुल तटस्थ एवं मुस्तैद दिखे। हर थोड़ी दूर में सुरक्षाबन के जवान खड़े दिखाई दिए।
लता चौक पर संतो के विभिन्न रूप दिखाई दिए। यहीं पर दो संत ऐसे दिखाई दिए जो शांत चित्त खड़े थे। उनसे बात करने पर पता चला कि वह अघोरी संत हैं। वह हिमाचल से पैदल चलकर अपने आराध्य के आगमन के साक्षी बनने पहुंचे हैं। वह इस भीषण ठंड में कई दिनों से पैदल चल रहे हैं। आश्चर्य की बात यह रही कि इस भीषण ठंड में भी वह सिर्फ मृगछाला पहने रहे। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि शायद उन्हें ठंड का आभास भी नहीं है।