फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लोकसभा चुनाव 2019: उत्तराखंड की राजनीति के 5 चेहरे जिनके इर्द-गिर्द घूम रही है सियासत

Tue, 19 Mar 2019 02:35 PM IST
shubham चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
उत्तराखंड में लोकसभा की 5 सीटें हैं। इनमें से तीन सीटें गढ़वाल मंडल और दो सीटें कुमाऊं मंडल में हैं।
उत्तराखंड में लोकसभा की 5 सीटें हैं। इनमें से तीन सीटें गढ़वाल मंडल और दो सीटें कुमाऊं मंडल में हैं। सूबे में अल्मोड़ा, टिहरी गढ़वाल, गढ़वाल, नैनीताल-उधमसिंह नगर और हरिद्वार लोकसभा सीटें हैं। कुल मतदाताओं की संख्या 76.28 लाख के करीब है। इस वक्त प्रदेश की पांचों लोकसभा सीटों पर भाजपा काबिज है। 11 अप्रैल को सूबे में 17वीं लोकसभा के लिए वोटिंग होनी है और 23 मई को चुनाव के नतीजे आएंगे। अभी तक कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में से किसी ने भी लोकसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। इस वक्त उत्तराखंड की चुनावी राजनीति पांच चेहरों के आस-पास घूम रही है। आइए जानते हैं कौन-से हैं ये चेहरे।
विज्ञापन

2 of 6
मनीष खंडूड़ी - फोटो : अमर उजाला
मनीष खंडूड़ी- मनीष खंडूड़ी उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पौड़ी से सासंद भुवन चंद्र खंडूड़ी के बेटे हैं। उन्होंने राहुल गांधी की देहरादून रैली में कांग्रेस का दामन थामा। राहुल गांधी ने खुद मंच से पार्टी में मनीष खंडूड़ी का स्वागत किया। हालांकि, अभी कांग्रेस की तरफ से उनके उम्मीदवारी की घोषणा नहीं की गई है लेकिन पौड़ी लोकसभा सीट से उन्हें ही कांग्रेस का प्रत्याशी माना जा रहा है। इस सीट से अभी भुवन चंद्र खंडूड़ी भाजपा सासंद हैं। उत्तराखंड की राजनीति पर करीब से नजर रखने वाले अरविंद मालगुड़ी का कहना है कि मनीष खंडूड़ी प्रतिभाशाली और पढ़ा लिखा चेहरा हैं। युवा होने के नाते भारतीय राजनीति में आने का उनका पूरा अधिकार है। कोई पार्टी युवाओं को मौका दे रही है तो यह अच्छी बात है। मनीष के पिता और भाजपा सांसद भुवन चंद्र खंडूड़ी पहले ही कह चुके हैं कि मेरी खानदानी कुर्सी तो है नहीं जो बेटे को ट्रांसफर करूं। बेटे का स्वतंत्र अधिकार है जहां से लड़े। वहीं, बेटा भी कह रहा है-पिता का आर्शीवाद है। ऐसे में अगर मनीष कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ते हैं तो उन्हें पिता की ईमानदार छवि का फायदा जरूर होगा।
विज्ञापन

3 of 6
फाइल फोटो
शौर्य डोभाल: इस वक्त उत्तराखंड की चुनावी राजनीति जिन चेहरों के आस-पास घूम रही है उसमें शौर्य डोभाल भी शामिल हैं। वह पहले ही चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं। शौर्य डोभाल कह चुके हैं कि अगर भाजपा टिकट देती है तो वह जरूर चुनाव लड़ेंगे। अगर भारतीय जनता पार्टी शौर्य डोभाल को अपना प्रत्याशी बनाती है तो पौड़ी लोकसभा सीट से चुनावी मुकाबला घमासान हो सकता है। अरविंद मालगुड़ी कहते हैं- शौर्य डोभाल को भी अपने पिता अजित डोभाल के कद और छवि का फायदा जरूर मिलेगा। ऐसे में यह मुकाबला खंडूड़ी की छवि और डोभाल की छवि के बीच होगा। दोनों की ही छवि ईमानदार है।

4 of 6
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत
हरीश रावत- हरीश रावत उत्तराखंड के कद्दावर नेता हैं। वह सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। कांग्रेस में उनका कद बड़ा है। वह कह चुके हैं कि मुझे अब चुनाव लड़ने में रुचि नहीं है। उनका यह बयान कांग्रेस को असहजता में डाल सकता है क्योंकि हरिद्वार सीट से कांग्रेस के पास उनके जैसा कद्दावर चेहरा शायद ही कोई है। हालांकि, हरीश रावत ने यह भी कहा है कि वह पार्टी के आदेश के अनुरूप आगे चलेंगे। कद और राजनीतिक अनुभव दोनों में ही हरीश रावत अव्वल हैं। वह 1980 में केंद्र की राजनीति में शामिल हुए थे। वह 1990 में संचार मंत्री बने और 2001 में उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। 2014 से लेकर 2017 तक सूबे के मुख्यमंत्री रहे। 
 
विज्ञापन

5 of 6
रमेश पोखरियाल निशंक और हरीश रावत
डॉ रमेश पोखरियाल निशंक- रमेश पोखरियाल निशंक साल 2009 से लेकर 2011 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे हैं। भाजपा के वरिष्ठ कद्दावर नेता हैं। इस वक्त हरिद्वार सीट से सासंद हैं। 2014 में हरीश रावत को हराकर हरिद्वार सीट से जीत दर्ज की थी। वह 1991 में पहली बार कर्णप्रयाग सीट से यूपी विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। अगर भाजपा 17वीं लोकसभा के लिए इस सीट से उन्हें फिर से अपना प्रत्याशी घोषित करती है तो हरीश रावत और उनके बीच मुकाबला घमासान होगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
बीसी खंडूड़ी - फोटो : AmarUjala
भुवन चंद्र खंडूड़ी: भुवन चंद्र खंडूड़ी भाजपा के कद्दावर नेता हैं और इस वक्त पार्टी में उपेक्षा के शिकार हैं। हालांकि वह खुद को सच्चा भाजपाई बता चुके हैं। खंडूड़ी उत्तराखंड के चौथे मुख्यमंत्री रहे हैं। उन्होंने साल 2007 से लेकर 2009 तक सूबे की कमान संभाली है। इस वक्त  पौड़ी से सासंद हैं। 2004 में भी इस सीट से चुनाव जीता था। 2009 में सतपाल महाराज ने उन्हें पौड़ी सीट से हराया था। उत्तराखंड की राजनीति में उनका कद बड़ा है। छवि ईमानदार नेता की है। इस वक्त वह भी चुनावी राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें