राजस्थान के सिरोही और माउंटआबू क्षेत्र में स्थित कई प्राचीन शिव मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनमें पांडवों द्वारा स्थापित गुफा शिवलिंग, सातवीं सदी का कुसुमा शिव मंदिर, अचलेश्वर महादेव में शिव के अंगूठे की पूजा, खुदाई में निकला अमरनाथ महादेव मंदिर और सारणेश्वर महादेव मंदिर शामिल हैं।
माउंटआबू के देलवाड़ा में पांडव गुफा स्थित है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने माता कुंती के साथ यहां पूजा अर्चना की थी। गुफा में पांडवों द्वारा पांच शिवलिंग स्थापित किए गए थे।
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कुशमा शिव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
सात सदी का है कुसमा गांव का शिव मंदिर
सिरोही के रेवदर तहसील के मालीपुरा कुसुमा गांव स्थित प्राचीन रामचंद्र मंदिर का इतिहास 7वीं सदी का है। यहां बने संग्रहालय में कई प्राचीन मूर्तियां आज भी सुरक्षित रखी हुई हैं। 7वीं सदी में इस स्थान पर शिव मंदिर हुआ करता था। संतों के सानिध्य में 1981-82 में यह मंदिर पूजा योग्य बनाया गया था। संग्रहालय में आज भी प्राचीन मूर्तियां संरक्षित हैं।
अचलेश्वर महादेव मंदिर, माउंटआबू।
- फोटो : अमर उजाला
यहां होती है भगवान शिव के अंगूठे की पूजा
माउंटआबू के अचलगढ़ क्षेत्र में भगवान अचलेश्वर महादेव विराजमान है। इस मंदिर में शिवलिंग की नहीं भगवान शिव के अंगूठे की पूजा की जाती है। वैसे तो यहां सालभर श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है लेकिन, श्रावण मास के दौरान मेले सा माहौल बना रहता है।
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अमरनाथ महादेव मंदिर, भैंससिंह, आबूरोड।
- फोटो : अमर उजाला
पांच दशक पहले खुदाई में निकला था अमरनाथ महादेव मंदिर
सिरोही जिले के भैंस सिंह गांव में एक ऐतिहासिक मंदिर स्थित है, जिसे अमरनाथ महादेव के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर 11वीं और 12वीं शताब्दी का माना जाता है। लगभग 50 साल पहले खुदाई के दौरान खोजा गया था।
सारणेश्वर महादेव मंदिर, सिरोही।
- फोटो : अमर उजाला
सारणेश्वर महादेव मंदिर
राजस्थान के सिरोही में स्थित सारणेश्वर महादेव मंदिर को लेकर भी कई मान्यताएं हैं। मंदिर को लेकर कई तरह की लोक और पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। जिनसे भगवान शंकर की महिमा को समझा जा सकता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के पावन मौके पर भगवान महादेव का रुद्राभिषेक करने के लिए स्वयं मां प्रकट होती हैं। उनके जल से ही वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। शिवरात्रि के मौके पर हजारों की तादाद में श्रद्धालु मंदिर पहुंच कर भगवान त्रिपुरारी का पूजन करते हैं।