साम्भर झील का नासा के वर्ल्डविंड द्वारा वर्ष 2010 में ली गई तस्वीर।
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सांभर झील समुद्र तल से 1200 फीट ऊंचाई पर स्थित है। जब यह पूरी तरह भरी होती है तब इसका इसका क्षेत्रफल 90 वर्ग मील होता है। इस झील में रूपनगढ, मेंथा, खारी और खंड़ेला नामक चार नदियां आकर गिरती हैं। विशेषज्ञों के अुनसार अरावली के शिष्ट और नाइस के गर्तों में भरा हुआ गाद ही नमक का स्रोत है। इस गाद में घुलने वाला सोडियम बारिश के पानी में मिलकर नदियों के रास्ते झील में पहुंचाता है, और फिर नमक के रूप में बदल जाता है।
नमक बनाने वाले मजदूरों का दर्द
जिस नमक को हम स्वाद के लिए खाते हैं उसे बनाने वाले मजदूरों का सच हैरान करने वाला है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जो मजदूर नमक बनाने का काम करते हैं। उनकी मौत के बाद उनका अंतिम संस्कार करना बहुत मुश्किल होता है। कई सालों तक नमक में काम करने के कारण उनके शरीर कुछ हिस्से जलते तक नहीं हैं। अंतिम संस्कार के समय उनके हाथ और पैर का जलना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसे में उन्हें नमक डालकर दफन कर दिया जाता है।
सांभर झील तीन जिलों में बंटी है
सांभर झील प्रदेश के तीन जिलों में फैली हुई है। यह जयपुर, अजमेर और नागौर जिले में पड़ती है। सांभर झील नमक उत्पादन के अलावा पर्यटन और फिल्म शूटिंग के लिए एक पसंदीदा जगह बन गई है।