शेखावत ने विजिटर्स बुक में यह लिखा।
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यह दीवारें, यह लोहे के भारी दरवाजे, यह यातनाओं के सारे प्रमाण स्वातंत्र्य वीरों की अद्भुत संकल्प शक्ति और अमित प्रेरणा की आज भी गवाही देते प्रतीत होते हैं। इन सभी हुतात्माओं जिन्होंने पाषाण-दृढ़ता के साथ उन अत्याचारों को झेला, अपनी जवानी और जीवन को समर्पित किया। उन्हें श्रद्धांजलि देने का एक ही मार्ग है, वह है श्रेष्ठ भारत, सशक्त भारत, समृद्ध भारत, आत्मनिर्भर भारत, विश्व गुरु भारत के निर्माण के लिए प्राण-प्रण और ऊर्जा का नियोजन।