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India Pakistan 1965 War: भारत-पाक सरहद पर एक मात्र शहीद मेला, जहां 17 रेलकर्मियों ने दी शहादत, देखें तस्वीरें

Fri, 09 Sep 2022 01:13 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर

सार

पाकिस्तान को करारी शिकस्त देने वाला साल 1965 का ऐतिहासिक युद्ध तो आपको याद ही होगा। राजस्थान से सटी सीमा पर स्थित बाड़मेर जिले में सितंबर के महीने में 22 दिन तक चले इस युद्ध में भारतीय सेना के तीन हजार जवान शहीद हुए थे। 
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बाड़मेर में शहीद मेला - फोटो : Social Media
भारत-पाक युद्ध में सबसे ज्यादा चर्चा हुई भारतीय रेलवे के 17 कर्मचारियों के शहादत की। यह पहला मौका था, जब भारतीय रेलवे ने भी एक मिशन को अंजाम दिया था। आज ही के दिन 9 सितंबर को पाकिस्तानी एयरफोर्स के बम धमाकों को नाकाम करते हुए रेलवे ने सेना तक बारूद और राशन पहुंचाए थे।
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बाड़मेर में शहीद स्मारक - फोटो : Social Media
भारत-पाक युद्ध साल 1965 में रेलवे के 17 कर्मचारियों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए देश के रक्षार्थ प्राण न्यौछावर कर दिए थे। इन शहीदों की याद में हर साल की तरह इस बार भी 9 सितंबर को शहीद स्मारक गडरारोड में शहीद मेला आयोजित हुआ।
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शहीद मेले में मौजूद लोग - फोटो : Social Media
मेले को खास बनाने के लिए नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे एम्प्लॉइज यूनियन के पदाधिकारी सहित कई नेता भी शरीक हुए। गडरारोड से पहले शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।

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शहीदों के परिजन - फोटो : Social Media
साल 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान रेलवे लाइन को दुरुस्त कर रहे रेल कर्मियों पर पाक सैनिकों ने हमला बोल दिया था। उसमें रेलवे के 17 जवान शहीद हो गए थे। ये जवान रेल से शस्त्र और खाद्य सामग्री को बोर्ड पर पहुंचा रहे थे। आर्मी के टैंकों की आवाज, लड़ाकू विमानों की ओर से की जा रही बमबारी, चारों ओर गोलियों की बौछार और सैनिकों की रेलमपेल का दृश्य रोंगटे खड़े करने वाला था।
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शहीदों के बारे में बताते हुए लोग - फोटो : Social Media
भारत से घबराए पाक ने युद्ध की सामग्री व खाद्य सामग्री पहुंचाने में मदद कर रही रेलवे लाइन को गडरारोड के पास क्षतिग्रस्त कर दिया। चिंता थी कि अब गोला, बारूद, हथियार सहित अन्य सामग्री को जवानों तक कैसे पहुंचाया जाए।
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भारत-पाक सरहद पर एक मात्र शहीद मेला - फोटो : Social Media
भारत के वीर जवानों (रेल कर्मी) ने क्षतिग्रस्त लाइन को दुरुस्त करने की मन में ठानी और निकल गए अपने मिशन पर। यह कर्मचारी रेलवे लाइन को दुरुस्त कर अपने मिशन की कामयाबी के गीत गा ही रहे थे कि इस दरम्यान पाक विमानों ने इन पर बमबारी शुरू कर दी। इसमें 17 रेल कर्मी शहीद हो गए, लेकिन वे अपना काम कर गए।
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शहीदों पर माल्यार्पण करते हुए - फोटो : Social Media
भारत-पाक युद्ध 1965 में रेलवे के 17 कर्मचारियों ने देश की रक्षार्थ प्राण न्यौछावर कर दिए। इस दौरान नंदराम गेगमेंट, भंवरिया कांटेवाला, माला गैंगमैन, मधा, हुकमाराम, चिमाराम, रावताराम, लालाराम, खीमराज, जेहाराम, देवी सिंह खलासी, चुन्नीलाल ड्राइवर, माधो सिंह फायरमैन, मुल्तानाराम पेंटर, करनाराम ट्रॉलीमैन, हेमाराम खलासी और चिमन सिंह फायरमैन शहीद हो गए थे।
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स्मारक पर मौजूद शहीदों के परिजन - फोटो : Social Media
देश में यह पहला शहीद स्मारक है, जहां भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए रेलवे के 17 जवानों की याद में मेला लगता है। इसे लेकर रेलवे ने भी स्मारक की खूबसूरती और अन्य सुविधाओं को मुहैया करवाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। देश में रेलवे के शहीद जवानों की याद में और कहीं मेला नहीं लगता है।
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