मेले में मौजूद लोगों की भीड़
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इस चमत्कारी झांकी के दर्शन के लिए अजमेर सहित जयपुर, टोंक, भीलवाड़ा, बूंदी, कोटा और कई जिलों के हजारों श्रद्धालु उमड़े। दोपहर को भगवान के बेवाण को कीर्ति स्तंभ पर लाया गया, जहां ठीकरे को लेकर गायों के बीच में पूजा अर्चना की गई और उसे गंगाजल छिड़क कर गायों के बीच घुमाया गया। शाम को करीब पौने पांच बजे ठीकरे के माध्यम से एक लाल रंग की गाय भीड़ में से होती हुई बेवाण के पास पहुंची और नीचे से निकल गई। इस दौरान पूरा वातावरण द्वारकाधीश के जयकारों से गूंज उठा। बेवाण के नीचे से निकली गाय को भगवान की परिक्रमा लगवाकर लड्डू खिलाया गया। भजन गायक रतन लाल पीपलवा व हरिराम चौधरी आदि ने भजनों की प्रस्तुति दी।
सांपला का गाय मेला एक अनोखा अनुष्ठान है, जिसमें जिस रंग की गाय ठीकरे के माध्यम से बेवाण के नीचे से होकर निकलती है, उसी से आसपास के क्षेत्र में भविष्य के बारे में अनुमान लगाया जाता है। इस बार लाल गाय निकलने को अच्छे जमाने के संकेत माना जा रहा है। किसान लोग भी अब इसके आधार पर ही खेतों में फसल की बुवाई करेंगे।