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Jalore: हॉकी में लगातार आठवीं बार बेटियों ने जीता खिताब, बोलीं- 12वीं तक स्कूल करवा दो 12 बार जीतेंगे खिताब

Wed, 27 Sep 2023 07:25 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालोर

सार

Jalore News Daughters won the title for the eighth consecutive time in hockey
Jalore: हॉकी में लगातार आठवीं बार बेटियों ने जीता खिताब, बोलीं- 12वीं तक स्कूल करवा दो 12 बार जीतेंगे खिताब
 
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बेटियों ने जीता खिताब - फोटो : अमर उजाला
जालोर जिले में रामसीन क्षेत्र के झाक गांव का राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय जिला स्तरीय हॉकी खेलकूद प्रतियोगिता के बाद फिर से चर्चा में है। कारण हॉकी में इस विद्यालय ने छात्र वर्ग में छठी बार जिला स्तरीय हॉकी का खिताब जीता है। इससे भी बड़ी बात यह है कि छात्रा वर्ग में लगातार आठवीं बार खिताब अपने नाम किया है।
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झाक गांव की बेटियां - फोटो : अमर उजाला
पिछले आठ साल से जालोर की कोई अन्य टीम इन्हें हरा नहीं पाई है। इसके साथ ही प्रत्येक वर्ष राज्य स्तरीय टीम के लिए आधे से अधिक इस विद्यालय के छात्र और छात्राएं चयनित हो रही हैं। आज इस गांव में 100 से अधिक छात्र-छात्रा राज्य स्तर पर खेल चुके हैं। इस गांव में एक समय यह भी था, जब यहां की छात्राएं हॉकी स्टिक पकड़ने से भी डरती थीं। लेकिन साल 2012 से इस विद्यालय में बदलाव आया और गांव की लड़कियों ने हॉकी स्टिक भी पकड़ी और लगातार राज्य स्तर के लिए चयनित भी हुईं। 
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हॉकी खिलाड़ी और लोग - फोटो : अमर उजाला
यहां 2012 में लगे शिक्षक राजेंद्र सिंह मांडोली जो विद्यालय में सामाजिक विषय पढ़ाते हैं, लेकिन उनका हॉकी के प्रति लगाव और जुनून ऐसा था कि उन्होंने झाक के स्कूल में हॉकी के खिलाड़ियों को स्टेट लेवल तक पहुंचा दिया। शिक्षक स्वयं हॉकी में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में खेल चुके हैं, लेकिन उनका ये जज्बा अब स्कूल की छात्र-छात्राओं में दिखने लगा है। इस बार भी राज्य स्तर के लिए झाक विद्यालय से छात्र वर्ग में छह लड़कों और छात्रा वर्ग में सात लड़कियों का चयन हुआ है।

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हॉकी छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
झाक गांव में साल 2008 के बाद से हॉकी खेलना बंद हो चुका था। 2012 में शिक्षक राजेंद्र सिंह मांडोली की नियुक्ति गांव के राउप्रावि में हुई। शिक्षक ने एक साल के भीतर स्कूल में हॉकी खेलना दोबारा शुरू करवाया। लड़के तो खेलने के लिए तैयार हो गए, लेकिन बालिकाएं तैयार नहीं हुईं। बालिकाओं के परिजनों से बात की तो उन्होंने भी इसे खतरनाक खेल बताकर मना कर दिया। ऐसे में शिक्षक ने अभिभावकों से समझाइश कर इसे दोबारा शुरू करवाया। शुरुआत में लड़कियां हॉकी स्टिक पकडऩे से भी कतराती थीं। फिर शिक्षक के प्रयास रंग लाए और धीरे-धीरे टीम बनी और खेलने की शुरुआत हुई।
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झाव गांव के स्कूल की छात्र-छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
सत्र शुरू होने के बाद खेल मैदान में प्रतिदिन दो घंटे तक खेल का अभ्यास करवाया जाता है। साथ ही बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए स्कूल समय बाद शाम को बच्चों को अभ्यास करवाया जाता है। प्रतियोगिता से दो महीने पहले तैयारी शुरू करवा दी जाती है। खिलाड़ियों के आवश्यक संसाधनों के लिए शिक्षक ने गांव के युवाओं की समिति माताजी युवा मंडल से सहायता ली। यह समिति बच्चों को आवश्यक संसाधन निशुल्क उपलब्ध करवाता है। इन संसाधनों से यहां के खिलाड़ी तैयार होते हैं। इस बार भी राज्य स्तरीय हॉकी प्रतियोगिता के लिए छात्र वर्ग में करण सिंह, विष्णु कुमार, चंदन सिंह, कुंदन कुमार, भरत सिंह व महेंद्र सिंह का चयन हुआ है। वहीं, छात्रा वर्ग में मफरी कुमारी, नीतू कुमारी, भानुमति कंवर, पूजा कंवर, ललिता कुमारी, कविता कंवर और सुहाना बानू चयनित हुईं।
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शिक्षक के संग छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
गांव की बेटियों ने खेल क्षेत्र में गांव का नाम रोशन किया है। परंतु उनकी प्रतिभा आगे जाकर कोई काम नहीं आती है। क्योंकि गांव में 8वीं तक ही विद्यालय होने के कारण खेल में होनहार ये राज्य स्तरीय खिलाड़ी आगे पढ़ नहीं पाती हैं और विद्यालय छोड़ देती हैं। अन्य उच्च माध्यमिक विद्यालय की दूरी व गांव की भौगोलिक स्थिति के कारण यहां आवागमन के साधनों का अभाव हैं। अतः अभिभावक अपनी बच्चियों को आगे पढ़ा नहीं पाते हैं।

गांव में उच्च माध्यमिक विद्यालय नहीं होने के कारण खेल क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाली बेटियां आगे पढ़ नहीं पाती हैं। अपनी बेटियों को पढ़ाने के लिये ग्रामीण कई साल से धरना प्रदर्शन कर विद्यालय क्रमोन्नत करवाने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों को ज्ञापन तक भेज चुके हैं, परंतु उनको निराशा ही हाथ लगी है और विद्यालय अभी तक क्रमोन्नत नहीं हो पाया है, जिससे खेल व शिक्षा के क्षेत्र में होनहार बेटिया आगे पढ़ नहीं पाती हैं।

ग्रामीण पूनमाराम चौधरी ने बताया, हमारी बेटियां खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं, परंतु विद्यालय 8वीं तक ही होने के कारण हमारी बेटियां न तो उच्च शिक्षा ग्रहण कर पाती हैं और न ही वे खेल क्षेत्र में आगे बढ़ पाती हैं। उनकी प्रतिभा को प्रदर्शन का मौका नहीं मिल पाता है। मेरी दोनों बेटिया राज्य स्तर पर खेल चुकी हैं, परंतु गांव में 8वीं तक ही विद्यालय होने के कारण में उनको आगे पढ़ा नहीं पाया हूं।

प्रेम सिंह ने बताया, झाक विद्यालय उच्च माध्यमिक विद्यालय में क्रमोन्नत होने के सारे मापदंड पूरा करता है। परंतु उच्च अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों की कमजोर पैरवी के कारण अभी तक इस विद्यालय को क्रमोन्नति का इंतज़ार है। इस विद्यालय के पांच किलोमीटर दायरे में कोई उच्च माध्यमिक विद्यालय नहीं हैं। विद्यालय का नामांकन 250 से अधिक हैं, कक्षा आठ का नामांकन 42 है और गांव भौगोलिक रूप से टापूनुमा गांव है। अतः राज्य सरकार से मांग करते हैं कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए झाक विद्यालय को उच्च माध्यमिक विद्यालय में जल्द से जल्द क्रमोन्नत किया जाए।

जेठाराम मेघवाल ने बताया, गांव में 70 से अधिक बालिकाएं राज्य स्तर पर खेल चुकी हैं। परंतु वर्तमान में इन बालिकाओ में अधिकतर 8वीं कक्षा उत्तीर्ण कर घर बैठी हैं। अगर गांव के विद्यालय को क्रमोन्नत किया जाए तो गांव की बेटियां न केवल बालिका शिक्षा में बल्कि खेल क्षेत्र में भी गांव नाम रोशन करेगी।
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