राजस्थान
- फोटो : अमर उजाला
ड्रिल के दौरान 1971 भारत-पाक युद्ध के समय उपयोग में ली गई हाथ से चलने वाली सायरन मशीनों को फिर से परीक्षण के लिए बाहर निकाला गया है। यह ऐतिहासिक अनुभव केवल तकनीकी अभ्यास नहीं, बल्कि अतीत से सबक लेने और भविष्य के लिए तैयार रहने का प्रतीक भी है।
इस अभ्यास में सिविल डिफेंस, पुलिस, फायर ब्रिगेड, सेना, चिकित्सा विभाग, नगर परिषद, रेलवे और जिला प्रशासन की टीमें सक्रिय रूप से भाग लेंगी। सभी एजेंसियों को आपसी तालमेल के साथ कार्य करना होगा। आम नागरिकों से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस दौरान सामान्य गतिविधियों को कुछ समय के लिए रोककर मॉक ड्रिल में सहयोग करें।
ये भी पढ़ें: Alwar News: डिवाइडर से टकराकर पलटी कार, तीन बच्चों समेत छह घायल, एक बच्ची को जयपुर रैफर किया
यह मॉक ड्रिल केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक आवश्यक प्रशिक्षण है जो देश की सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा। सीमावर्ती जिले जैसलमेर जैसे क्षेत्रों में इस तरह की तैयारियां सामरिक दृष्टि से अत्यंत आवश्यक हैं और यह नागरिकों को भी देश की सुरक्षा प्रक्रिया से जोड़ती हैं।
प्रशासन ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस मॉक ड्रिल को गंभीरता से लें, प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और सुरक्षा एजेंसियों को पूरा सहयोग प्रदान करें। एक सुरक्षित और मजबूत भारत के निर्माण में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है।