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Rajasthan Exclusive: BJP प्रदेश अध्यक्ष बोले- कस्वां ने मां की पीठ में छूरा घोंपा, भाई-भाई को बांट रहे हैं रोत

सार

भाजपा की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष मदन राठौड़ ने राहुल कस्वां पर जमकर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कस्वां ने पार्टी की पीठ में छूरा घोंपा है, जिसे वह अपनी मां मानते थे। दुश्मन से हाथ मिलाकर गाली दे रहे हैं। 
 
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भाजपा की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष मदन राठौड़ का इंटरव्यू। - फोटो : अमर उजाला
राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष मदन राठौड़ का गुस्सा चुरू सांसद राहुल कस्वां पर फूटा है। उन्होंने कहा कि राहुल ने पार्टी की पीठ में छूरा घोंपा है। वह पार्टी को मां मानते थे और मां की पीठ में ही छूरा घोंप दिया। टिकट मिले तो पार्टी मां और टिकट न मिले तो पार्टी मां नहीं। यह कैसी राजनीति है। अब दुश्मनों से हाथ मिलाकर गालियां दे रहे हैं। वहीं, राठौड़ ने भारत आदिवासी पार्टी (बाप) सांसद राजकुमार रोत के भाजपा में आने की अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा कि यदि वह शुद्ध मन से आते हैं तो मिस कॉल करें और भाजपा में आ जाएं। उनका स्वागत है। 



मदन राठौड़ ने अमर उजाला को दिए विशेष साक्षात्कार में राहुल कस्वां, राजेंद्र राठौड़, राजकुमार रोत से लेकर छह विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों पर खुलकर बात की। उन्होंने दावा किया कि सभी छह सीटों पर भाजपा की जीत होगी। यह भी बोल गए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नजदीक होने के भुलावे में कोई न रहें। कोई उनके नजदीक नहीं है और कोई उनसे दूर नहीं है। 

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से सीधी बातचीत के संपादित अंशः

आप प्रधानमंत्री के नजदीकी माने जाते हैं। आपके लिए प्रधानमंत्री का क्या मंत्र है?
राठौड़ः कार्यकर्ताओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की बड़ी स्पष्ट सोच है। कार्यकर्ता का सम्मान होना चाहिए। कार्यकर्ता को काम देना होगा। उसे ताकत देना होगी। उनके साथ मिलकर चर्चा कर सामूहिक निर्णय लेना, केंद्र की योजनाओं का लाभ नागरिकों को मिल रहा है या नहीं, यह दायित्व कार्यकर्ताओं को देना है। उन्हें हमेशा आगे रखना ही पार्टी का प्राथमिक दायित्व है। 

कार्यकर्ताओं का सम्मान एक बड़ी चुनौती है, इसे आप कैसे देखते हैं? 
राठौड़: सवाल बहुत ज्यादा है लेकिन मैं हर एक जवाब देने की कोशिश करता हूं। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी बहुत ही सहज और सरल हैं। उन्होंने व्यवस्था बनाई है कि जब वे जयपुर मे रहेंगे, तब उनके निवास पर आमजन और कार्यकर्ताओं को सुनने के लिए उपलब्ध रहते हैं। सभी के काम हो, यह सुनिश्चित करते हैं। मिलनसारिता उनके स्वभाव में है।

हमारे कार्यकर्ता मुझसे जो उम्मीद रखते हैं, उसके लिए मैं खुद कार्यकर्ताओं से मिलकर उनकी समस्याओं को सुनता हूं। सरकार को पत्र लिखकर तय समयसीमा में उसका निराकरण सुनिश्चित करता हूं। हर काम हो जाए, यह संभव नहीं है। हम कार्यकर्ताओं को जो काम नहीं हो पाएंगे, उनकी भी सूचना देते हैं। कारण भी बताते हैं कि क्यों यह काम नहीं हो सकता। हमारा कार्यकर्ता जानता है कि कोई भी काम नियमों के तहत ही होगा। कोई गलत काम करवाना चाहे, तो वह संभव नहीं है। कार्यकर्ता को पता है कि काम होंगे और हो भी रहे हैं। 

अभी मैं नया हूं। संपर्क चल रहा है। मैं खुद प्रदेश में हर जगह जाकर कार्यकर्ताओं से मिल रहा हूं। कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं को पूरा करना मेरी जिम्मेदारी है। मैं उसे पूरा करूंगा।  

 
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भाजपा की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष मदन राठौड़ का इंटरव्यू। - फोटो : अमर उजाला
आप नए हैं तो छह सीटों पर होने वाले उपचुनावों में जवाबदेही किसकी होगी? 
राठौड़:
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष (सीपी जोशी) काफी मेहनती और सरल स्वभाव के हैं। वह खुद भी लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे। जो निर्णय होता है, वह सामूहिक होता है। ऐसा नहीं है कि अध्यक्ष ने फैसला कर लिया और उसे लागू कर दिया। अध्यक्ष सिर्फ इसकी घोषणा करता है। अध्यक्ष अकेला कुछ नहीं कर सकता। अध्यक्ष कोई सुप्रीम नहीं है। जवाबदेही की बात है तो वह सिर्फ अध्यक्ष की नहीं, पूरी पार्टी की बनती है। कोई कमी होगी तो मदन राठौड़ की होगी। अच्छा होगा तो पूरी पार्टी का होगा।

दौसा में किरोड़ीलाल मीणा नाराज नजर आ रहे हैं। उपचुनाव में इसका नुकसान हो सकता है।  
राठौड़:
डॉक्टर किरोड़ीलाल मीणा ने खुलकर कहा है कि मैं मेरी पार्टी से नाराज नहीं हूं। किसी से नाराज हूं तो वह खुद से नाराज हूं। मैं कहता हूं कि वह खुद से भी नाराज हैं तो गलत नाराज है। वह एक भावुक व्यक्ति हैं। उन्होंने भावुकता में कहा कि अगर सीट नहीं आती है तो मैं इस्तीफा दूंगा। यह उनकी भावुकता है। सत्य यह है कि किरोड़ीलाल जी आज भी काम कर रहे हैं। आगे भी काम करते रहेंगे। मीणा भाजपा की पूंजी है। जब-जब पार्टी को आवश्यकता पड़ेगी, हम उनका इस्तेमाल करेंगे।  

चौरासी की सीट पर चुनौती कैसी होगी? आपके प्रदेश प्रभारी ने तो राजकुमार रोत को भाजपा में आने का ऑफर दे दिया है। 
राठौड़:
हमारे प्रदेश प्रभारी ने कभी यह नहीं कहा कि राजकुमार रोत को भाजपा में आ जाना चाहिए। उन्होंने यह कहा है कि महत्वाकांक्षा के चलते राजकुमार जी चुनाव जीत गए। वह अब जनता की सेवा करें। कांग्रेस उन्हें क्या दे सकती है? हमारी सरकार है। राजकुमार रोत हमारी सरकार के साथ स्नेह रखें। विकास के कामों में हमारी सरकार से मदद लेनी चाहिए। यह भी प्रदेश प्रभारी के निजी विचार हैं। वरिष्ठ होने के नाते हमारे प्रदेश प्रभारी ने युवा राजकुमार को सलाह दी है। राजकुमार स्वतंत्र है। अपना भला-बुरा जानते हैं।  

पार्टी की राय यह है कि राजकुमार राजनीति करें, यह उनका अधिकार है। समाज को तोड़ने का काम न करें। राजनीति में भाइयों के बीच खाई पैदा करना उचित नहीं है। यह स्वीकार नहीं है। एक बार तो इस तरीके से क्षणिक लाभ मिल सकता है। इसके दूरगामी परिणामों से नुकसान देश को होगा। उन्हें भी इसका बड़ा नुकसान होगा। उन्हें आपस में लड़ाने की नीति नहीं अपनानी चाहिए। यह तो अंग्रेजों की नीति थी। मेरी निजी सलाह है कि आप पनपो, आगे बढ़ो लेकिन समाज को मत तोड़ो। 

 
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भाजपा की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष मदन राठौड़ का इंटरव्यू। - फोटो : अमर उजाला
अगर राजकुमार रोत की तरफ से हाथ बढ़ाया जाता है तो क्या भाजपा स्वीकार करेगी? 
राठौड़:
हमारे यहां तो सदस्यता अभियान के तहत मिस कॉल कर सदस्य बन सकते हैं। वे भी शुद्ध मन से आएंगे और हमारी पांच नीतियों का सम्मान करते हुए आ सकते हैं। उनका भाजपा में स्वागत है।  

झुंझुनूं सीट पर राहुल कस्वां ने आपको बहुत नुकसान पहुंचाया। 
राठौड़:
राहुल जी और हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं। राहुल जी के पिता राम सिंह जी का हम बहुत सम्मान करते हैं। राहुल जी मेरे अच्छे मित्र थे। वे एक समझदार नेता थे। क्षणिक आवेश में आकर उन्होंने पार्टी छोड़ दी। पार्टी की पीठ में छूरा घोंप दिया। हम उनसे यह अपेक्षा नहीं करते थे। टिकट कटता है। मेरा भी दो बार कटा है। मैं पार्टी में काम कर रहा हूं। राहुल जी को भी थोड़ा बर्दाश्त करना चाहिए था। आवेश में आकर विरोधियों से नहीं मिल जाना चाहिए था।

थोड़ा धैर्य तो रखते। उन्होंने तो तुरंत ही छलांग लगा दी। चुनाव जीतना इतना जरूरी था क्या? चुनाव जीतकर कौन-सा गढ जीत लिया? ऐसा कर पार्टी की पीठ में छूरा घोंप दिया है। जिस पार्टी को आपने अपनी मां कहा, उस मां के साथ क्या किया?  टिकट मिला तो पार्टी आपकी मां थी। टिकट नहीं मिला तो पार्टी मां नहीं। और मां को मार दिया। चले गए दुश्मन के पास, जो हमारी मां को गाली देता है। जो हिंदुओ के साथ हिंसा की बात करता है, उसके साथ चले गए। 

राहुल जी को थोड़े दिन में वापस आना होगा। वह वापस आएंगे। राहुल कस्वां ने हमेशा ऐसी बातें कही हैं कि वे वहां रह ही नहीं सकते। जब उनके नेता ने हिंदू और हिंसा की बात कही थी तो राहुल कस्वां का मन रोया होगा। मैं किनके साथ आ गया, कहां आ गया? जहां वह गए हैं, जब उसका नेता सदन में हिंदू हिंदू हिंसा हिंसा चिल्लाया होगा तो राहुल कस्वां की अंतरात्मा रोई होगी। वह एक भावुक व्यक्ति हैं। भला आदमी जब गलत हाथों में फंस गया तो दुखी तो हुआ ही होगा।


चूरू से सीकर तक राजेंद्र राठौड़ के समर्थक भी आपके खिलाफ नजर आ रहे हैं। 
राठौड़ः
जो राजेंद्र राठौड़ जैसे नेता के लिए इस तरीके की बयानबाजी सोशल मीडिया पर कर रहे हैं, वह उनके समर्थन हो ही नहीं सकते। राठौड़ साहब बहुत ही सुलझे हुए सहज स्वभाव वाले व्यक्ति हैं। वह पार्टी के लिए एक पूंजी है। समर्थकों को अपने नेता के लिए मांग रखने का अधिकार है। थोड़ा धैर्य भी रखना चाहिए। समय पर भी कुछ छोड़ना चाहिए। जिसको सम्मान मिलना है, वह उसे मिलेगा।  

 
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