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Politics: राजस्थान में जासूसी विपक्ष की 'प्रेमिका', सत्ता मिलते ही सब भूले, कब किस पर लगे आरोप? नया विवाद क्या

सार

Rajasthan Politics: राजस्थान विधानसभा में दो नए कैमरे लगे और जासूसी का 'जिन्न' फिर बाहर आ गया। प्रदेश में जासूसी का इतिहास पुराना है। सत्ता किसी की भी हो, यहां जासूसी का शोर जरूर गूंजता है। इस बार कांग्रेस ने सरकार पर विधायकों की जासूसी कराने का आरोप लगाया है। आइए, जानते हैं नया विवाद क्या है?
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राजस्थान विधानसभा में ना पक्ष की लॉबी में विधायकों से चर्चा करते पूर्व सीएम अशोक गहलोत। - फोटो : अमर उजाला
जासूसी, जासूसी और जासूसी... राजस्थान के सियासी गलियारों में इस शब्द की गूंज एक बार फिर सुनाई दे रही है। बस इस बार तस्वीर कुछ अलग है, क्योंकि जासूसी का आरोप विपक्ष में बैठी कांग्रेस द्वारा भाजपा सरकार पर लगाया जा रहा है। लेकिन, जब भाजपा सत्ता में थी तो यही आरोप कांग्रेस पर लगता था। जासूसी के आरोप में इस बार एक बड़ा अंतर यह भी है कि पिछली सरकार में फोन टैपिंग के आरोप लगे थे, लेकिन इस बार ऑडियो के साथ वीडियो जासूसी यानी कैमरा टैपिंग के आरोप भी लगे हैं। यह विवाद सदन में लगे दो नए कैमरों को लेकर है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने विधायकों की जासूसी कराने के लिए कैमरे लगाए हैं। इसे लेकर कांग्रेस ने लगातार दो दिन विधानसभा में जमकर हंगामा किया। वहीं, आज गुरुवार को कांग्रेस विधायकों ने इस मुद्दे को लेकर प्रदेश के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े को ज्ञापन दिया। 

राजस्थान में सरकारें बदलीं, चेहरे बदले, लेकिन जासूसी के आरोपों की गूंज नहीं थमी। जो दल सत्ता में होता है वह इसे सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता का हिस्सा बताता है और जो विपक्ष में होता उसके लिए यह 'जासूसी' हो जाती है। आज की इस बड़ी खबर में हम राजस्थान की सियासत में चल रहे ताजा जासूसी विवाद, नेताओं के एक-दूसरे पर आरोप, जासूसी से जुड़े पूराने घटनाक्रम और इस पर राजनीतिक विश्लेषकों की राय के साथ पूरे मामले को जानेंगे। पढ़िए, सिलसिलेवार सियासी घटनाक्रम..। 
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राजस्थान विधानसभा में ना पक्ष की लॉबी में विधायकों से चर्चा करते पूर्व सीएम अशोक गहलोत। - फोटो : अमर उजाला
सबसे पहले जानिए क्या है ताजा जासूसी विवाद?
इस विवाद की शुरूआत मंगलवार को हुई। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा में आरोप लगाया कि सदन में दो नए कैमरे लगाए गए हैं, जो विधायकों की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर रहे हैं। जब सदन स्थगित रहता है, तब भी यह सब हो रहा है। इसके अगले दिन  बुधवार को कांग्रेस विधायकों ने 'जग्गा जासूस चोर है' लिखी टोपी पहनकर सदन में प्रदर्शन किया। विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से मांग की कि वह स्पष्ट करें कि इन कैमरों का एक्सेस किसके पास है, क्या इसके लिए इंटेलिजेंस की अनुमति ली गई थी, इनसे की गई रिकॉर्डिंग कहां प्रसारित हो रही है?
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राजस्थान विधानसभा में हां पक्ष की लॉबी में विधायकों से चर्चा करते पूर्व सीएम वसुंधरा राजे। - फोटो : अमर उजाला
जूली बोले- कांग्रेस के साथ वसुंधरा भी निशाने पर
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सिर्फ सरकार पर आरोप लगाकर नहीं रुके। उन्होंने यह तक कह दिया कि सीएम भजनलाल शर्मा भाजपा विधायक दल की बैठक में कह कर गए हैं कि मुझे पता है, कौन-कौन विधायक क्या-क्या कर रहा है। उन्होंने मंत्रियों को भी हिदायत दी कि उनके ड्राइवर उनकी जासूसी कर रहे हैं। ये ड्राइवरों के फोन भी टेप करवा रहे हैं। उन्होंने कहा- सरकार न सिर्फ कांग्रेस विधायकों बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की भी जासूसी करवा रही है। जूली ने दावा किया कि दो दिन पहले जब वसुंधरा राजे सदन में आई थीं तो यह तक देखा गया कि कौन-कौन विधायक उनसे मिलने गया। उन्होंने कहा कि विधानसभा में लगाए गए CCTV कैमरों के पीछे असली वजह वसुंधरा राजे गुट पर निगरानी रखना है।

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विधानसभा अध्यक्ष देवनानी और मुख्यमंत्री शर्मा। - फोटो : अमर उजाला
विधानसभा अध्यक्ष और सीएम शर्मा का जवाब
विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने कहा कि कैमरे सुरक्षा कारणों से लगाए गए हैं। सदन की कार्यवाही का यूट्यूब पर प्रसारण पहले से होता रहा है। उन्होंने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि विपक्ष केवल कार्यवाही बाधित करने की कोशिश कर रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि 'यह सस्ती लोकप्रियता पाने का हथकंडा है। इन्हें धर्मांतरण विधेयक का दर्द है, इसलिए हर मुद्दे को राजनीति से जोड़ते हैं।'
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सचिन पायलट और अशोक गहलोत - फोटो : अमर उजाला
हर सरकार पर लगे जासूसी के आरोप

साल 2020: गहलोत-पायलट विवाद
तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच गुटबाजी के दौरान ऑडियो टेप लीक हुए थे। जिनमें कांग्रेस विधायकों और केंद्रीय नेताओं के बीच कथित खरीद-फरोख्त की बातचीत सामने आई थी। गहलोत गुट ने पायलट खेमे पर भाजपा से मिलकर सरकार गिराने की साजिश का आरोप लगाया। इस दौरान एसओजी और एसीबी की जांच से लेकर फोन टैपिंग और निजी जासूसों की चर्चा तक हुई थी। यहां तक की गहलोत के तत्कालीन ओएसडी रहे लोकेश शर्मा ने खुद भी अपनी ही सरकार पर फोन टैपिंग करवाने के आरोप लगाए थे।

साल 2013-18: भाजपा की सरकार में उछला मुद्दा
कांग्रेस विपक्ष में थी। पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया था कि सरकार विधायकों और पत्रकारों की फोन टैपिंग करवा रही है। आरोप लगाया गया कि सरकार राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए गुप्त निगरानी करा रही है।

साल 2008-13:  सत्ता में कांग्रेस, सीएम थे गहलोत
इस दौर में विपक्ष में बैठी भाजपा ने तत्कालीन गहलोत सरकार पर जासूसी के आरोप लगाए थे। कहा था कि सरकार आईबी और पुलिस के जरिए विरोधियों की निगरानी करवा रही है। खासतौर पर सरकार पर पार्टी से नाराज नेताओं की गतिविधियों पर नजर रखने के आरोप लगे थे।

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विश्वेंद्र सिंह, किरोड़ी लाल और हनुमान बेनीवाल। - फोटो : अमर उजाला
साल 2014: सत्ता भाजपा की, वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री




कांग्रेस विधायक विश्वेंद्र सिंह, हनुमान बेनीवाल और किरोड़ी लाल मीणा ने वसुंधरा सरकार पर फोन टैपिंग के आरोप लगाए। विश्वेंद्र सिंह ने स्पीकर कैलाश मेघवाल से कहा कि विधायकों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। हम आपको भीष्म पितामह मानते हैं, कौरव रूपी सरकार से हम पांडवों का बचाओ। तब विश्वेंद्र सिंह ने कहा था कि इन गंभीर आरोपों के लिए मैं नोटिस दे रहा हूं। यह छोटे-मोटे आरोप नहीं है। किरोड़ी लाल मीणा ने स्पीकर से कहा था कि आपको भीष्म पितामह कहा है, आप धृतराष्ट्र मत बनो। हनुमान बेनीवाल भी कहते हैं कि इनसे हमारी रक्षा कीजिए।
साल 2010: कांग्रेस ने सरकार बनाई, गहलोत सीएम
भाजपा विधायक राजेंद्र राठौड़ ने विधानसभा में शून्यकाल के दौरान कहा कि 22 फरवरी को सत्तारूढ दल की विधायक दल की बैठक में कुछ विधायकों ने अपने मन की बात कही, जिसके बाद सत्ता और विपक्ष के विधायकों के फोन टैप होने लग गए हैं। राठौड़ ने कहा कि राजनीतिक शुचिता का बखान करने वाली इस सरकार ने पिछली सरकार में फोन टैपिंग के कई आरोप लगाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि एसओजी के इशारे पर सभी के फोन टैप किए जा रहे हैं। इन आरोपों पर सीएपीएम विधायक अमराराम ने सभापति से कहा कि वे इस मामले में विधानसभा सदस्यों की एक जांच कमेटी बनाने की व्यवस्था दें। 

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वसुंधरा राजे सिंधिया - फोटो : अमर उजाला
साल 2004: सत्ता में भाजपा, वसुंधरा सीएम
नेता प्रतिपक्ष बीड़ी कल्ला ने शून्यकाल में आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार में जितने भी मंत्री हैं उनकी जासूसी की गई है। आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ। यह जासूसी किसके आदेश पर हुई इसकी रिपोर्ट सदन की मेज पर रखिए। मैं मुख्यमंत्री से पूछना चाहता हूं कि क्या यह आपकी जानकारी में हुआ है। अगर, नहीं तो अधिकारियों की इतनी हिम्मत कैसे हो गई कि वे जन प्रतिनिधियों की जासूसी करवाएं।

अध्यक्ष ने खारिज किया प्रस्ताव
तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रा सिंह ने जवाब में कहा कि आपके इस प्रस्ताव को अस्वीकर कर दिया गया है। आपके पास कोई अन्य उपाय हैं। इसलिए अब इस पर चर्चा नहीं हो सकती।



 

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पूर्व कैबिनेट मंत्री बीडी कल्ला - फोटो : अमर उजाला
जासूसी के आरोप लगाने वाले नेताओं ने क्या कहा? 

'मुझे याद नहीं कि कुछ हुआ था'
कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बीडी कल्ला ने कहा कि मैंने 2004 में विधानसभा में फोन टैपिंग का मुद्दा उठाया था। इसमें मैंने बतौर नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से सरकार से सदन में रिपोर्ट पेश करने की मांग की थी। लेकिन, मुझे याद नहीं कि इस मामले में कुछ हुआ था।

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सांसद हनुमान बेनीवाल। - फोटो : अमर उजाला
गहलोत और वसुंधरा सरकार में हुई फोन टैपिंग 
आरएलपी अध्यक्ष और सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि फोन टैपिंग गहलोत और वसुंधरा सरकार के कार्यकाल में भी हुई थी। गहलोत सरकार जब गिर रही थी तो हमारे फोन टैप करवाए गए थे। वसुंधरा राजे की सरकार में मैंने, विश्वेंद्र सिंह जी और किरोड़ी लाल जी ने फोन टैपिंग के आरोप लगाए थे। वसुंधरा सरकार में तो मेरा पास्पोर्ट तक जब्त किया गया था।

कुछ नहीं बोले पूर्व कैबिनेट मंत्री सिंह
अमर उजाला ने इस मामले में पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह से भी संपर्क किया। लेकिन, बातचीत के दौरान उन्होंने इस संबंध में कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। 



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राजनीतिक विश्लेषक त्रिभुवन। - फोटो : अमर उजाला
जासूसी पर क्या बोले राजनीतिक विश्लेषक त्रिभुवन?
राजस्थान में भाजपा सत्ता में होती है तो कांग्रेस आरोप लगाती है और कांग्रेस सत्ता में होती है तो भाजपा आरोप लगाती है। लेकिन, दोनों ही पार्टियां आरोपों की जांच नहीं करवाती। फोन टैपिंग एक सच्चाई है, जो सरकार सत्ता में होती है वह यह करवाती है। पिछली सरकार में तो इसके साक्ष भी सामने आ चुके हैं। सचिन पायलट की बगावत के समय फोन टैपिंग करवाई गई और इसके ऑडियो भी वायरल हो गए थे। 

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टेलीकॉम एक्सपर्ट से जानें टैपिंग का प्रोटोकॉल क्या? 
टेलीकॉम कमिशन के पूर्व टेक्नोलॉजी एडवाइजर अशोक भंडारी बताते हैं कि जो भी प्रोटोकॉल है उसी के तहत फोन टैप होते हैं। जब तक डीजी लिखित में आदेश नहीं देते फोन टैपिंग संभव नहीं है। मैंने 35 साल नौकरी की है, इस दौरान अलग-अलग राज्यों की सरकारें देखी हैं। मैं कह सकता हूं कि एक भी ऐसा मामला मेरे पास नहीं आया। हां, प्राइवेट एजेंसी के जरिए फोन टैपिंग करवाई जा सकती है।

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