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फिर बार-बार झूठ बोलकर कार्यकाल बढ़ाया
मामला इतने पर शांत नहीं हुआ। आरसी शर्मा ने फिर इसी नोटशीट के पैरा 370/n पर सलाहकारों का कार्यकाल मार्च-2021 तक बढ़ाने की अनुशंसा कर पत्रावली सीएमडी आरआईएसएल को भेजी। इस पर सहमति आ गई थी। यह निर्देश भी दिए कि आवश्यक संसाधनों के लिए जैम पोर्टल से नियोजन की कार्यवाही तुरंत शुरू की जाए। इसके बाद आरसी शर्मा ने फिर से सीएमडी को एक नोटशीट भेजकर लवदीप शर्मा सहित 5 लोगों की मांग की। इस बार पत्रावली वित्त विभाग तक गई। इस फाइल पर निदेशक वित्त ने लिखा कि ई-पीडीएस परियोजना में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग से 30 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त होनी है। कोई नया व्यय तभी किया जाए तब विभाग से यह राशि प्राप्त हो जाए। इसके बाद भी आरसी शर्मा ने तकनीकी सलाहकारों का कार्यकाल 31.03.2022 तक बढ़ाने की फाइल चला दी। तब तक खाद्य एवं नागरिक आपूत्ति विभाग से बकाया राशि के संबंध में कोई सहमति प्राप्त नहीं हुई थी।
सीएमडी ने दिया नोटिस
तत्कालीन सीएमडी आईएएस वीरेंद्र सिंह ने आरसी शर्मा को अभिलेखों में कांट-छांट और हेराफेरी कर अनियमितता बरतने के लिए सेवा नियम 1958 के नियम 16 के तहत नोटिस देकर कार्मिक विभाग को कार्यवाही के लिए भेजा। आरसी शर्मा बिना किसी कार्यवाही रिटायर भी हो गए और अब उसी कंपनी में बतौर सलाहकार सेवाएं दे रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि जब सीएमडी ने शर्मा को फर्जीवाड़े का दोषी मानकर नोटिस दिया तो उन पर कार्यवाही किसके प्रभाव में नहीं होने दी गई।
आरटीआई में जानकारी मांगी तो फाइल हुई गुम
उक्त फाइल की कॉपी जब आरटीआई में मांगी गई तो विभाग से जवाब मिला कि आरआईएसएल के ई-पीडीएस प्रोजेक्ट की फाइल कुछ दिनों से मिल नहीं रही है। साल बीत गया लेकिन फाइल की तलाश अब भी जारी है। मामले को लेकर पब्लिक अगेंस्ट करेप्शन के आजीवन सदस्य डॉ. टीएन शर्मा ने बताया कि आरसी शर्मा ने डीओआईटी में रहते हुए कई गड़बड़ियां की थी। फर्मों को अनुचित लाभ दिलावाया था। इनमें लिंक वेल, एनॉलॉजी, प्रिसाइज रोबोटिक्स फर्म प्रमुखता से है। हमने इन मामलों में साक्षों सहित एसीबी को भी पत्र लिखे लेकिन रसूखों के चलते इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।