पानी बाबा मांगीलाल गुर्जर
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सेन समाज के कार्यक्रमों में विशेष उपस्थिति
हालांकि मांगीलाल सभी समाजों के कार्यक्रमों में भाग लेते हैं और सेवा करते हैं। लेकिन सेन समाज के आयोजनों में उनकी विशेष उपस्थिति देखी जाती है। सेन समाज के लोग उन्हें विशेष आमंत्रण भेजते हैं और कार्यक्रमों में पानी पिलाने की सेवा उनके जिम्मे छोड़ देते हैं। मांगीलाल गुर्जर का जीवन अत्यंत सादा है। वे अविवाहित हैं और उन्होंने अपने जीवन के अधिकांश वर्ष लोगों की सेवा में ही बिता दिए। उनका कहना है कि मेरे पास पुश्तैनी जमीन है, लेकिन उसकी मुझे कभी जरूरत नहीं पड़ी। उसकी उपज मेरे चाचा के बेटे लेते हैं। मुझे केवल सेवा से सुख मिलता है। उनकी सेवा भावना को देखकर लोगों में उनके प्रति आदर और श्रद्धा का भाव है। कई जगहों पर उन्हें विशेष अतिथि के रूप में भी बुलाया जाता है। हालांकि उन्होंने कभी इस सेवा को दिखावे या प्रचार का माध्यम नहीं बनाया।
विश्व जल दिवस पर बने प्रेरणा के स्रोत
हर साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। इस दिन जल संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा और जल की महत्ता पर चर्चा होती है। लेकिन मांगीलाल गुर्जर जैसे ‘पानी बाबा’ इन सब बातों से कहीं आगे हैं। उन्होंने व्यवस्था नहीं देखी, संसाधन नहीं मांगे, बल्कि जहां जरूरत दिखी, वहां खुद समाधान बन गए। आज जब पानी के लिए लोग सरकार से उम्मीद करते हैं, योजनाओं पर निर्भर होते हैं, उस समय एक अकेला बुजुर्ग बिना किसी सुविधा के लोगों की प्यास बुझा रहा है। यही कारण है कि पानी बाबा की कहानी हर वर्ष जल दिवस पर चर्चा का विषय बन जाती है।