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इंसानियत शर्मसार: बेटी के शव को किसी ने हाथ नहीं लगाया, बेबस पिता कंधे पर लादकर ले गया, वीडियो वायरल 

Sat, 15 May 2021 05:58 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
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बेटी के शव को कंधे पर लादकर ले जाता पिता। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पंजाब के जालंधर में इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक बड़ी घटना सामने आई है, जिसने प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। जिले के एक गरीब मजदूर की 11 साल की बेटी की मौत हो गई। बच्ची में कोरोना जैसे लक्षण थे इसलिए इलाके के लोगों ने उसकी अर्थी को कंधा तक देने से इनकार कर दिया। मजबूर पिता बेटी की लाश को कंधे पर रखकर श्मशान घाट ले गया जहां उसका अंतिम संस्कार किया गया। हालांकि घटना 10 मई की है लेकिन बेटी को कंधे पर लेकर जाते पिता का वीडियो शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।

वीडियो में जालंधर के रामनगर में लाचार व्यक्ति अपने कंधों पर एक शव लेकर जाता दिख रहा है। बुजुर्ग के साथ एक बच्चा भी था जो बार-बार नीचे गिर रहे लाश के ऊपर रखे कपड़े को उठा रहा था। 34 सेकेंड की इस दर्दनाक वीडियो ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोल दी और लोगों को झकझोर कर रख दिया। दिलीप के मुताबिक, अमृतसर के गुरु नानक मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने उसकी बेटी के कोरोना संक्रमित होने की बात कही लेकिन कोई रिपोर्ट उन्हें नहीं सौंपी। दिलीप को इस बात का भी मलाल है कि किसी ने उसकी बेटी के शव को कंधा नहीं दिया बल्कि रास्ते में लोगों ने उसकी वीडियो जरूर बनाते रहे।  
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बच्ची की मौत। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
11 साल की बेटी की लाश कंधे पर लादकर ले जाने वाला शख्स दिलीप है, जो मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला है। रामनगर में रहने वाले दिलीप ने बताया कि उनके 3 बच्चे हैं। बेटी सोनू 11 साल की थी, जिसे पिछले दो महीने से बुखार आ रहा था। 
 
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बेटी के शव को लेकर जाता पिता। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जालंधर के सरकारी अस्पताल में इलाज करवाया तो डॉक्टर ने बेटी की हालत गंभीर बताकर उसे अमृतसर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। अमृतसर पहुंचने पर 9 मई को बेटी की मौत हो गई। बेटी का शव लेकर जालंधर आ गए। अंतिम संस्कार के लिए लोगों से बात की तो सबने कहा कि हो सकता है कि बेटी की कोरोना से मौत हुई हो। वह अर्थी को कंधा नहीं देंगे। उसकी बेटी है तो वही ले जाए। इसके बाद दिलीप बेटी की लाश खुद कंधे पर उठाकर श्मशान घाट तक ले गया।
 

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जालंधर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दिलीप 2001 में बेहतर भविष्य की तलाश में जालंधर आया था। रामनगर इलाके में रहते हुए शादी के बाद उसके तीन बच्चे (दो लड़कियां व एक लड़का) हुए। 11 साल की बेटी सोनू रामनगर के प्राइमरी स्कूल में 5वीं कक्षा पास कर चुकी थी। 
 
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सोनू के परिजन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रोते हुए दिलीप ने बताया कि गुरु नानक मेडिकल कॉलेज में उसकी बेटी की मौत के बाद अस्पताल ने एंबुलेंस देने से मना कर दिया था। मजबूरन उसे निजी एंबुलेंस से संपर्क करना पड़ा। उन्होंने 5000 रुपये किराया मांगा। इतने पैसे उनके पास नहीं थे। कई बार मिन्नतें करने पर एंबुलेंस वाला 2500 रुपये में शव को जालंधर पहुंचाने के लिए राजी हो गया। किसी तरह जुगाड़ कर बेटी का शव जालंधर ले आया तो पैसा नहीं बचा कि वह एंबुलेंस में बेटी का शव शमशान घाट तक ले जाता। 


 
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