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शर्मनाक: संदिग्ध संक्रमित पति का शव लेने के लिए भटकती रही महिला, कभी पीपीई किट तो कभी मांगी गई पर्ची 

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Updated Fri, 07 May 2021 05:47 PM IST
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पति का शव लेने के लिए महिला तीन दिन भटकती रही। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

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कोरोना महामारी के वक्त जालंधर में सिविल अस्पताल प्रबंधन का क्रूर चेहरा सामने आया है। एक संदिग्ध कोरोना मरीज की पत्नी तीन दिन तक पति का शव लेने के लिए भटकती रही। कभी उसे मुर्दाघर की पर्ची लाने को कहा जाता तो कभी पीपीई किट। कभी एंबुलेंस के लिए एक कमरे से दूसरे कमरे में दौड़ाया जा रहा था। हारकर वह मुर्दाघर के बाहर बैठकर रोने लगी। उसे रोते देख कुछ मीडियाकर्मियों ने एंबुलेंस और पीपीई किट का बंदोबस्त किया। शव के अंतिम संस्कार के लिए पैसे का इंतजाम कर महिला को दिए गए। वहीं लापरवाही की पोल खुलने के बाद भी अफसर इस मामले को दबाते रहे। सिविल सर्जन ने तो यहां तक कह दिया कि यह काम सिविल अस्पताल का है, उसके प्रबंधकों से इसके बारे में बात की जाए।
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जालंधर सिविल अस्पताल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अड्डा होशियारपुर चौक की रहने वाली सुमन ने बताया कि उसके पति जतिंदर को हल्का बुखार हुआ था। इसके बाद उनकी शुगर बढ़ गई। घबराहट होने लगी। उन्होंने कहा कि एंबुलेंस बुलाकर मुझे अस्पताल ले जाओ। पांच मई को वह पति को अस्पताल ले आई। वहां डॉक्टरों ने उन्हें हाथ भी नहीं लगाया और कहा कि इनकी मौत हो चुकी है, घर ले जाओ। शव वहीं मुर्दाघर में रखवा दिया, उनका कोविड टेस्ट भी नहीं कराया हालांकि उनमें लक्षण कोरोना संक्रमण जैसे थे।
 

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महिला सुमन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके बाद से वह पति का शव लेने के लिए चक्कर काटती रही। उनकी बेटी भी साथ आई, जब बेटी ने स्टाफ से पूछना चाहा तो मदद के बजाय बेटी से दुर्व्यवहार किया गया। इसके बाद वह मुर्दाघर आते तो उन्हें पर्ची लाने को कहा जाता। जब पर्ची लेने जाते तो कहते कि इसकी जरूरत नहीं, सिर्फ पीपीई किट लेकर चले जाओ लेकिन मुर्दाघर से उन्हें बिना शव दिए बैरंग लौटा दिया गया। 
 
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जालंधर सिविल अस्पताल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुमन के पास न तो अंतिम संस्कार के लिए और न ही एंबुलेंस में शव ले जाने के पैसे थे। उन्होंने लोगों से मदद मांगनी चाही तो उनका दुख बांटना तो दूर, लोगों ने उन्हें देख अपने घर के दरवाजे भी बंद कर लिए। शुक्रवार को मीडिया एसोसिएशन के सचिव रमेश नैयर, पत्रकार किरती गिल और भावना किसी खबर के लिए अस्पताल गए तो महिला को रोते बिलखते देख उससे बात की। इसके बाद उन्होंने तत्काल एंबुलेंस का इंतजाम करवाया और एक संस्था की मदद से मृतक के अंतिम संस्कार से लेकर तमाम रीति रिवाज पूरे करवाए गए। इसके अलावा अस्पताल में तमाम दस्तावेज पूरे करवाए गए। 
 

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सिविल सर्जन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सिविल सर्जन डॉ. बलवंत सिंह का कहना है कि इस मामले में सीनियर मेडिकल अधिकारी से पूछा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिविल अस्पताल सिविल सर्जन कार्यालय से अलग है। हालांकि जालंधर का सिविल अस्पताल सिविल सर्जन कार्यालय के अधीन ही आता है और दोनों का एक ही कैंपस है। 

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