उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में वर्ष 2009 की 35000 कांस्टेबलों की भर्ती में शामिल 854 महिला कांस्टेबलों की नियुक्ति में पेच फंस गया है। (रिपोर्ट: अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद)
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यूपी पुलिस की एक और भर्ती फंसी, पढ़िए पूरा मामला
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हाईकोर्ट में इन नियुक्तियों को अवैध बताते हुए रद्द करने की मांग संबंधी याचिका दाखिल की गई है। याचिका पर कोर्ट ने सरकार से तीन सप्ताह में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बी अमित स्थालेकर कर रहे हैं।
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याची अतुल कुमार के वकील सीमांत सिंह के मुताबिक 2009 में 35000 कांस्टेबलों का पद का विज्ञापन निकाला गया था। इसमें सामान्य के 17500 पद और ओबीसी के 9450 पद थे।
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भर्ती प्रक्रिया का परिणाम जारी होने पर पता चला कि 854 पदों पर महिलाओें को गलत तरीके से क्षैतिज आरक्षण का लाभ दिया गया है। इसे लेकर हाईकोर्ट में राजीव कुमार और अन्य ने याचिका दाखिल की थी।
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कोर्ट ने आदेश दिया कि गलत तरीके से भर्ती 854 महिला आरक्षियों की जगह पुरुष आरक्षियों की भर्ती की जाए। कोर्ट के आदेश पर सरकार ने इन पदों पर पुरुष आरक्षियों की भर्ती कर ली, मगर 854 महिला आरक्षियों को निकाला नहीं गया। बाद में उनको बिना कोई पद विज्ञापित किए समायोजित कर लिया गया।
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याचिका में कहा गया है कि 854 अतिरिक्त आरक्षियों को नियुक्ति देने से ओबीसी का आरक्षण कोटा 27 प्रतिशत से बढ़कर 29 प्रतिशत हो गया और सामान्य वर्ग की सीटों को दो प्रतिशत का नुकसान हुआ है।
मांग की गई है कि या तो महिला आरक्षियों को निकाल कर उन पर सामान्य वर्ग को रखा जाए या फिर सामान्य कोटे के लिए दो प्रतिशत सीटें बढ़ाई जाएं। याचिका पर तीन सप्ताह के बाद सुनवाई होगी।