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जब 4 हजार मछलियों को खाने वाले मगरमच्छ से भिड़े गांव वाले

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'पानी में रहकर मगर से बैर...?’ यह कहावत तो आपने सुनी होगी। लेकिन तहसील क्षेत्र के गांव रायपुर-मुजफ्ता के लोगों ने पानी में ही मगरमच्छ से मुकाबला कर उसे धर दबोचा। गांव निवासी रौदास और जगदीश सिंह ने कुछ माह पहले काली नदी के पास मछली पालन के लिए तालाब खोदा था। इसमें 7 हजार मछलियां डालीं थीं, पर उनकी संख्या निरंतर घट रही थी। इसकी पड़ताल की तो सारा माजरा सामने आ गया।
भूपेंद्र चौधरी/अमर उजाला,अतरौली (अलीगढ़)।
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जब 4 हजार मछलियों को खाने वाले मगरमच्छ से भिड़े गांव वाले

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सोमवार की सुबह करीब छह बजे एक मगरमच्छ काली नदी से तालाब में घुसा और मच्छलियों पर मुंह मारने लगा। यह नजारा देख जगदीश ने तत्काल गांव वालों को फोन कर वहां बुला लिया। इसके बाद छह घंटे तक जो हुआ वह आपके सामने है। वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी बिना जाल के ही मौके पर पहुंच गए। इस पर ग्रामीण खुद ही मगरमच्छ को पकड़ने में जुट गए। उन्होंने चारों ओर से मगरमच्छ को घेरा और लोहे का पतला जाल मगरमच्छ पर डाल दिया। इसके बाद लाठियों से प्रहार किए।
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इंजन के जरिए तालाब का पानी निकाला गया और मौका पाकर ग्रामीणों ने मगरमच्छ के गले में तार से फंदा डाल दिया। ग्रामीणों ने पैर रखकर बमुश्किल मगरमच्छ को अपने काबू में किया। अंत में गांव वालों ने अंगोछे से मगरमच्छ का मुंह बांध दिया और उसे वन विभाग के अधिकारियों के हवाले कर दिया। वन विभाग के डिप्टी रेंजर राहुल चौधरी ने बताया कि गांव बढ़ारी की तरफ आबादी से दूर मगरमच्छ को काली नदी में छोड़ दिया गया है।
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जगदीश ने बताया कि एक माह पहले उसकी 13 वर्षीय बेटी सीमा तालाब के किनारे बैठी थी। इसी दौरान वह तालाब में गिर गई। बेटी का आज तक कोई पता नहीं चल सका। आशंका है कि मगरमच्छ ने उसे निगल लिया होगा।
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