मणिपुर विधानसभा में पास हुए तीन विधेयकों के खिलाफ चुड़ाचंदपुर जिले में आदिवासी छात्र संगठनों की ओर से बुलाए गए 12 घंटे के बंद के बाद हालात बिगड़ गए।
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पुलिस को बेकाबू प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। इस तरह सोमवार से भड़की हिंसा में अब तक कम से कम आठ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 31 लोग घायल हुए हैं।
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हिंसा के बाद प्रशासन ने चुड़ाचंदपुर शहर में सोमवार शाम से ही अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया है। इसके बावजूद कई इलाकों में हिंसा की ताजा घटनाएं हुईं।
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पुलिस ने बताया कि भीड़ ने चुड़ाचंदपुर पुलिस थाने पर
हमला कर दिया था। इस कारण पुलिस को गोली चलानी पड़ी। पुलिस फायरिंग में
मरे दो लोगों की उम्र 30 साल के करीब है, जबकि एक 10 साल का बच्चा है।
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हिंसा पर उतारू अज्ञात लोगों ने सोमवार शाम को राज्य के एक मंत्री, एक सांसद और पांच विधायकों के घरों में आग लगा दी थी।
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चुड़ाचंदपुर शहर में गोलियों से छलनी तीन शव बरामद किए गए। एक जला हुआ शव जिले में एक विधायक मंगा वैफेल के आवास से बरामद किया गया, जबकि मंगलवार को दिन में एक शव मिला।
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विधानसभा में मणिपुर के मूल लोगों की रक्षा के लिए पारित तीन विधेयकों को पास किए जाने के बाद यह हिंसा भड़की थी।
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एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि कुटेर मणिपुर के सांसद थंगसो बैटे, राज्य के मंत्री मंत्री फुंग्जाफंग तोंसिम्ग और पांच विधायकों के घर जला दिए गए।
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पुलिस का दावा है कि अब स्थिति नियंत्रण में है। विधानसभा में तीन विधेयकों प्रोटेक्शन ऑफ मणिपुर पीपुल बिल 2015, मणिपुर लैंड रेवेन्यू एंड लैंड रिफॉर्म (सातवां संशोधन) बिल 2015 तथा मणिपुर शॉप्स एंड इस्टैब्लिशमेंट (दूसरा संशोधन) बिल 2015 पास हुआ है।
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इन विधेयकों के खिलाफ आदिवासी छात्रों के तीन संगठनों ने सोमवार को 12 घंटे का बंद का आह्वान किया था। संगठनों को डर है कि इन बिल के प्रावधानों से बाहरी लोगों को भी आदिवासियों की जमीन पर अधिकार की अनुमति मिल जाएगी।