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PICS: ये हैं वो सात चेहरे जिन्होंने दी बिहार को पहचान

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बिहार के पहले मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी कृष्णा सिंह आजादी के बाद बिहार के पहले मुख्यमंत्री रहे। हालांकि कृष्णा सिंह आजादी से पहले भी बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके थे। लेकिन स्वतंत्रता के बाद उनके कुशल नेतृत्व में ही बिहार खुद के पैरों पर खड़ा हुआ। वह 17 साल से ज्यादा समय तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे।
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PICS: ये हैं वो सात चेहरे जिन्होंने दी बिहार को पहचान

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केबी सहाय उर्फ कृष्‍ण बल्लभ सहाय बिहार के चौथे मुख्यमंत्री हुए। पूर्व सीएम कृष्‍णा सिंह की तरह स्वतंत्रता सेनानी रहे केबी सहाय ने आर्थिक रूप से पिछड़ते बिहार को एक अलग पहचान दी। जमींदारी प्रथा खत्म करने के लिए लाया गया उनके कानून को उस समय काफी प्रसिद्िध मिली थी।
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भोला पासवान शास्‍त्री बिहार के आठवें मुख्यमंत्री हुए। कुल जमा तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे शास्‍त्री को कांग्रेस का दिग्गज नेता माना जाता है। उन्होंने कृषि प्रधान राज्य बिहार में कृषि की दशा सुधारने में काफी उल्लेखनीय काम किया।

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बिहार की राजनीति में आज भी अगर सबसे बड़ा नाम माना जाता है तो वो है कर्पूरी ठाकुर का। बिहार के 11वे मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को सामाजिक समरसता का मसीहा कहा जाता है। प्राइमरी स्कूल में शिक्षक के रूप में अपनी शुरूआत करने वाले कर्पूरी ठाकुर को गरीब और पिछडों की आवाज उठाने के कारण बिहार में जननायक की उपाधि दी गई। दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे कर्पूरी ठाकुर बिहार में गैर कांग्रेसी सरकार के दूसरे मुख्यमंत्री थे।
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मुख्यमंत्री के रूप में कांग्रेस नेता जगन्नाथ मिश्रा ने भी बिहार में लंबा समय बिताया। एक कालेज में लेक्चरर के तौर पर अपने कॅरियर की शुरूआत करने वाले मिश्रा तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में काफी काम किया। हालांकि लालू यादव के साथ चारा घोटाले में नाम आने के बाद उनका राजनीतिक कॅरियर लगभग समाप्त हो गया। साल 2013 में लालू के साथ सीबीआई कोर्ट ने उन्हें भी जेल की सजा सुनाई।
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बिहार की राजनीति में अगर सबसे ज्यादा जाना पहचाना नाम कोई है तो वो है लालू यादव का। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे लालू यादव ने जेपी आंदोलन से राजनीति की शुरूआत की और बहुत जल्द अपना मुकाम बनाया। लालू का नाम बेशक आज चारा घोटाले का पर्याय बन गया है लेकिन इस बात से भी कोई इंकार नहीं कर सकता कि लालू के उदय ने ही बिहार में पिछडों और दलितों को एक मुकम्मल पहचान दी। पिछडों के मसीहा के तौर पर जाने गए लालू यादव की राजनीतिक काबिलियत ने उन्हें केन्द्र में भी किंग मेकर के तौर पर स्‍थापित किया।
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दशकों से‌ पिछड़ेपन का दंश झेल रहे बिहार को अगर कोई नेता विकास की राह पर लाया तो वो नीतीश कुमार ही थे। चार बार बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके नीतीश कुमार ने राजनीतिक पक्षपात से ऊपर उठकर बिहार में विकास की बयार बहा दी। उनके दूसरे कार्यकाल में किए गए शानदार कार्यों के कारण ही बिहार की जनता ने उन्हें अगले चुनावों में प्रचंड बहुमत से सत्ता वापस दी। नीतीश ने न सिर्फ कुख्यात हो चुकी बिहार की कानून व्यवस्‍था में क्रांतिकारी सुधार किया बल्कि शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में भी जबरदस्त विकास कराया। अपने इन्हीं कार्यों के बल पर नीतीश एक बार फिर जनता के सामने चुनावी मैदान में हैं।
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