बारहवीं के परिणाम आ गए हैं, इसके साथ ही इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थान अपने-अपने तरीके से स्टूडेंट्स को आकर्षित करने में लग गए हैं।
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'हिम्मत है तो मेरी एक क्लास छोड़कर तो दिखा'
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बड़े संस्थान जहां स्थानीय अखबारों में पूरे-पूरे पन्ने का विज्ञापन दे रहे हैं तो छोटे संस्थान बैनर, बोर्ड्स, पर्चे, पोस्टर जैसे प्रचार साम्रगी का सहारा लेते हैं। इनमें से कई बहुत ही रोचक दावों और नारे के सहारे अपना प्रचार करते हैं। बिहार की राजधानी पटना में तैयारी करने के लिए राज्य के लगभग सभी हिस्सों से छात्र आते हैं।
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विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थान बड़ी संख्या में पटना में हैं। यहां तक कि दसवीं और बारहवीं की परीक्षा की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थान भी बड़ी संख्या में खुल गए हैं।
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इनकी संख्या कुछ हज़ार बताई जाती है। कुछ संस्थान तो अब कॉर्पोरेट ढांचे में संचालित हो रहे हैं, लेकिन ज़्यादातर संस्थान अब भी पारंपरिक तरीक़े से ही चल रहे हैं। पटना के अशोक राजपथ, नया टोला, मुसल्लहपुर, भिखना पहाड़ी, बाजार समिति, राजेंद्र नगर और बोरिंग रोड इलाके में ऐसे छोटे-बड़े संस्थान अधिक हैं।
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इनमें से बोरिंग रोड इलाके को छोड़ बाकी इलाक़े एक-दूसरे से सटे हुए हैं। ज़्यादातर कोचिंग संस्थानों से छात्रों को शिकायतें रहती हैं। मसलन, एक ही बैच में छात्रों को भेड़-बकरियों की तरह ठूंस दिया जाना, समय पर कोर्स पूरा नहीं कराना, पूरी फ़ीस एडवांस में लेना, कोर्स के बीच में कोचिंग छोड़ने पर फ़ीस वापस नहीं करना, संस्थानों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव, शिक्षकों की योग्यता और कोचिंग की सफलता के ग़लत दावे।
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कोर्स पूरा नहीं कराने के सवाल पर साल 2010 के फ़रवरी महीने में नया टोला के एक कोचिंग संस्था में छात्रों और कोचिंग संचालकों के बीच विवाद हुआ था। इसमें संस्थान के निजी सुरक्षा गार्ड की गोली से एक छात्र की मौत हो गई थी। इसके बाद छात्रों ने पूरे इलाके में हिंसक प्रदर्शन किया था।
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इस घटना के बाद राज्य सरकार ने कोचिंग संस्थानों को ज़िम्मेदार बनाने और उन पर नियंत्रण रखने के लिए अप्रैल, 2010 में बिहार कोचिंग संस्थान नियमावली लागू की। इसके अनुसार, सभी तरह के कोचिंग संस्थानों को रजिस्ट्रेशन कराना ज़रूरी है।
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इसमें कोचिंग संस्थान के लिए मुख्यरूप से आधारभूत संरचना, शिक्षकों की योग्यता, पाठ्यक्रम, फ़ीस विवरण और लेने की प्रक्रिया, कोर्स पूरा कने की समय सीमा के संबंध में मानक तय किए गए हैं। लेकिन पांच साल से ज़्यादा वक़्त गुजरने के बावजूद अभी तक पटना में 250 से भी कम संस्थानों ने पंजीकरण कराया है।