बिहार के चुनावों में बाहुबलियों का हमेशा से दबदबा रहा है। चाहे वो विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा चुनाव। ऐसे में इन्हें टिकट
देने में राजनीतिक दल भी पीछे नहीं रहते हैं। इस बार के विधानसभा चुनावों में भी
कई बाहुबली मैदान में हैं। डालते हैं उन पर एक नजर।
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इन बाहुबलियों के सामने हर 'सरकार' नतमस्तक, तस्वीरें
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अनंत सिंह साल 2005 में पहली बार चुनाव जीतने वाले मोकामा के इस ‘डॉन’ की सरकार अलग ही चलती है। अनंत सिंह अपने भाई की हत्या के बाद चुनावी रण में उतरे, उससे पहले वो अपने भाई का चुनाव प्रबंधन देखते थे। पिछली दो बार से वो लगातार जेडीयू के टिकट पर विधायक हैं। हाल फिलहाल अपहरण के एक मामले में जेल की हवा खा रहे हैं।
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मुन्ना शुक्ला मुन्ना शुक्ला के पिता रामदास शुक्ला मुजफ्फरपुर के वकील थे। चार भाइयों में तीसरे नंबर पर हैं मुन्ना शुक्ला। सबसे बड़े भाई कौशलेंद्र उर्फ छोटन शुक्ला थे। उनसे छोटे अवधेश उर्फ भुटकुन शुक्ला और तीसरे नंबर पर मुन्ना शुक्ला हैं। उनसे छोटे भाई का नाम ललन शुक्ला उर्फ मारू मर्दन शुक्ला हैं। साल 2000 में मुन्ना शुक्ला जेल से ही निर्दलीय चुनाव लड़े और 53 हजार वोटों से विजयी रहे। लालगंज से जदयू ने एक बार फिर इन्हें ही उम्मीदवार बनाया है। इनके खिलाफ लोजपा ने राज कुमार शाह को अपना उम्मीदवार बनाया है।
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नीरज कुमार बबलू नीरज कुमार बबलू जदयू के टिकट पर तीन बार विधायक बन चुके हैं। कुछ दिन पहले नीतीश ने विधानसभा से उनकी सदस्यता समाप्त करवा दी थी लेकिन कोर्ट ने इस आदेश को निरस्त कर दिया। जिसके बाद उन्होंने नीतीश से बगावत कर भाजपा का दामन थाम लिया। अब वो भाजपा के टिकट पर छातापुर से उम्मीदवार हैं। राजद ने छातापुर विधानसभा क्षेत्र से उनके सामने मो. जफूर आलम को पार्टी का उम्मीदवार बनाया है।
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ददन पहलवान पूर्व मंत्री ददन पहलवान उर्फ ददन सिंह यादव कई राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्दलीय विधायक भी रह चुके हैं। ददन पहलवान ने राजद छोड़कर कुछ दिन पहले ही जेडीयू का दामन थामा था। इससे पूर्व वह बसपा में भी प्रदेश प्रभारी रह चुके हैं। पार्टी ने उन्हें अपने सीटिंग एमएलए दाउद अली का टिकट काटकर उन्हें प्रत्याशी बनाया है। ददन पहलवान की गिनती भी क्षेत्र के बड़े बाहुबलियों में होती है। वहीं दाउद अली ने टिकट कटने के बाद पप्पू यादव की जनअधिकार पार्टी का दामन थाम लिया। जिसके बाद जन अधिकार पार्टी ने उन्हें यहां से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया।
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ललन सिंह जेडीयू के बाहुबली अनंत सिंह के सामने ताल ठोकने वाले हैं ललन सिंह। इनकी गिनती भी बाहुबली के तौर पर ही होती है। ये मोकामा से छोटे सरकार अनंत सिंह के सामने पप्पू यादव की जन अधिकारी पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। इससे पहले यह राम विलास पासवान की लोक जन शक्ति पार्टी में थे।
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सुरेन्द्र यादव बेलागंज विधानसभा क्षेत्र पर मगध में राजद के स्ट्रांग मैन सुरेंद्र प्रसाद यादव का लंबे समय से कब्जा रहा है। वह यहां से 1990 से लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। जब भी बेलागंज के मैदान में गये, मतदाताओं ने उन्हें निराश नहीं किया है। अपने दबंग स्वभाव के चलते उनके खिलाफ भी कई मुकदमें रहे हैं।
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कन्हैया सिंह लोजपा के पूर्व सांसद सांसद सूरजभान सिंह के छोटे भाई कन्हैया सिंह खुद भी एक बड़े बाहुबली के रूप में जाने जाते हैं। इस बार कन्हैया सिंह भी भाजपा के टिकट पर मोकामा से चुनावी रण में हैं। जदयू ने यहां से अपने विधान पार्षद व प्रवक्ता नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया है जो मतदाताओं से बाहुबलियों के खिलाफ वोट मांग रहे हैं।