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Ujjain: रामायण के अनछुए पहलुओं की याद दिला गए 'हमारे राम', रावण बने आशुतोष राणा ने गाया शिव तांडव स्तोत्र

Fri, 05 Apr 2024 09:54 AM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, उज्जैन

सार

विक्रमोत्सव के अंतर्गत वैसे तो अब तक कई प्रस्तुतियां हो चुकी हैं, लेकिन गुरुवार रात्रि को प्रसिद्ध अभिनेता आशुतोष राणा द्वारा हमारे राम की जो प्रस्तुति दी गई वह शहरवासियों के दिल को छू गई।
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अभिनेता आशुतोष राणा द्वारा हमारे राम की जो प्रस्तुति दी गई वह शहरवासियों के दिल को छू गई। - फोटो : सोशल मीडिया
विक्रमोत्सव के अंतर्गत वैसे तो अब तक कई प्रस्तुतियां हो चुकी हैं, लेकिन गुरुवार रात्रि को प्रसिद्ध अभिनेता आशुतोष राणा द्वारा हमारे राम की जो प्रस्तुति दी गई वह शहरवासियों के दिल को छू गई।
इस नाटक में हमारे राम एक बड़े पैमाने पर थिएट्रिकल अनुभव रहा, जो असाधारण प्रदर्शन, बातचीत, प्रकाश, संगीत, अविनाशी कॉस्ट्यूम, विशेष प्रभाव और बड़े दृश्य के साथ भरा रहा। पहली बार, हमारे राम उन कई सीनों को लाता है जो महाकाव्य रामायण में कभी स्टेज पर नहीं दिखाए गए हैं। 

नाटक लव और कुश के दृष्टिकोण से शुरू होता है जब उनकी मां सीता भूमि की गोद में अंतिम शरण लेती हैं। राम से उनकी मां सीता के बारे में कुछ सवाल पूछते हैं। सूर्य भगवान के दृष्टिकोण से, नाटक हमारे राम परिचितों को लेकर जाता है जो राम, सीता और उनके अनंत प्रेम, परीक्षण और विजय की एक यात्रा पर है। नाटक में कुछ अज्ञात सीन्स हैं जो वाल्मीकि रामायण में लिखे गए हैं, लेकिन उन्हें अभी तक स्पष्ट किया नहीं गया है। 

 
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इस नाटक में हमारे राम एक बड़े पैमाने पर थिएट्रिकल अनुभव रहा। - फोटो : सोशल मीडिया
नाटक में राम की भूमिका राहुल आर भूचर, लक्ष्मण की भानु प्रताप, सीता की हरलीन रेखी, हनुमान की दानिश अख्तर और रावण की भूमिका आशुतोष राणा ने निभाई। इसके पहले विक्रम नाट्य समारोह के चौथे दिन गौरव भारद्वाज निर्देशित प्रस्तुति हमारे राम का मंचन हुआ। इस नाट्य प्रस्तुति में बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता अशुतोष राणा रावण के रूप में दिखाई दिए। इसके पहले महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने सभी कलाकारों का पुष्पगुच्छ व विक्रम पंचांग भेंट कर स्वागत किया।

 
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अभिनेता अशुतोष राणा रावण के रूप में दिखाई दिए। - फोटो : सोशल मीडिया
श्री राम के आचरणों को भी अपने अंदर धारण करें
अभिनेता आशुतोष राणा ने अमर उजाला को बताया कि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि वर्तमान समय में हम सभी बहुत ज्यादा सोशल हो चुके हैं और हमारे पर ऐसे-ऐसे प्लेटफॉर्म हैं, जहां हमें दूसरे की जिंदगियों में झांकने का भरपूर मौका मिलेगा। मगर हम इतना सोशल हो चुके हैं कि हमें दूसरों के बारे में खुद से ज्यादा ही पता रहता है। हम दूसरों से तो जुड़ चुके हैं, मगर स्वयं से जुड़ना अभी बाकी है। जिस दिन हम खुद से जुड़ जाएंगे और खुद को जानने लग जाएंगे, तब हम अपने लिए क्या सही है और क्या गलत यह जान जाएंगे। 

आशुतोष संतों की एक कहावत भी सुनाते हैं , "अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष यह चार चीजें पुरुषार्थ चतुष्टय में आती हैं। हमारा जीवन भी या तो कर्म प्रधान है या फिर प्रारब्ध प्रधान है। इसमें अर्थ और काम में प्रारब्ध की प्रमुखता होती है और धर्म एवं मोक्ष में कर्म की प्रमुखता होती है। तो जिन गुणों की बात हम कर रहे हैं, वे धर्म और मोक्ष के अंदर आती हैं और इसके लिए हमें पुरुषार्थ ही करना होगा।"आशुतोष कहते हैं, " हम सभी श्री राम के गुण गा रहे हैं, मगर हम केवल उनके चरणों तक ही सीमित रह जाते हैं और उनके आचरणों को धारण नहीं करते हैं। जिस दिन हम श्री राम के आचरणों को भी अपने अंदर धारण कर लेंगे उस दिन हमारे अंदर का रावण मर जाएगा।" 
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