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Ujjain News: कांग्रेस ने बनाई थी हरसिद्धि मंदिर के कायाकल्प की योजना, भाजपा ने प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाला

Tue, 13 Jun 2023 02:53 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

उज्जैन के प्रसिद्ध हरसिद्धि मंदिर का कायाकल्प होना था। कांग्रेस की सरकार ने 2019 में इसके लिए सात करोड़ रुपये की योजना बनाई थी। फिर कांग्रेस की सरकार चली गई और यह योजना भी उसके बाद से ठंडे बस्ते में ही पड़ी रही। 
 
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हरसिद्धि माता मंदिर - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस की 15 महीने की सरकार में उज्जैन महाकाल मंदिर विस्तारीकरण योजना यानी महाकाल महालोक के लिए 300 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। साथ ही शक्तिपीठ मां हरसिद्धि का दरबार भी भव्य एवं दिव्य बनाया जाना था। इसके लिए सात करोड़ रुपये की एक योजना भी तैयार हुई थी। श्रद्धालुओं को माता के दर्शन के दौरान बारिश और धूप से बचाने के साथ ही वेटिंग हॉल भी बनना था। योजना का ड्राइंग और डिजाइन भी तैयार हो गया था। हालांकि, 2020 में जब कांग्रेस की सरकार गई तो भाजपा ने इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
  
राजा विक्रमादित्य की आराध्य देवी और देश के 52 शक्तिपीठों में से एक मां हरसिद्धि के दरबार में तेज धूप और बारिश से श्रद्धालुओं को बचाने की कोई व्यवस्था नहीं है। 2019 में कमलनाथ सरकार ने सात करोड़ रुपये की योजना बनाई थी। डिजाइन और ड्राइंग भी मंजूर हो गए थे। लेकिन कमलनाथ सरकार के जाने के बाद यह प्रोजेक्ट भी ठंडे बस्ते में चला गया। यदि यह योजना साकार होती तो श्रद्धालुओं को बारिश और धूप में परेशानियों का सामना न करना पड़ता। 
 
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हरसिद्धि मंदिर में इस तरह कनात लगाकर की जाती है व्यवस्थाएं - फोटो : अमर उजाला
यह थी योजना
मंदिर परिसर में ही बेसमेंट की तरह खुदाई होनी थी। ऊपर सीमेंट की छत और पंखे लगाकर श्रद्धालुओं को मां हरसिद्धि के दर्शन कराने की योजना थी। सुंदर वेटिंग हॉल बनना था। मंदिर का बाहरी रूप और अंदर से मंदिर को सुंदर किया जाना था। कांग्रेस की 15 महीने की सरकार जाने के बाद जब शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने तो योजना कागजों में दफन हो गई। इस समय तेज धूप से श्रद्धालुओं को बचाने के लिए मंदिर समिति ने कनात लगाकर व्यवस्था की है। तेज आंधी और बारिश से यह व्यवस्था भी ध्वस्त हो जाती है। 
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हरसिद्धि मंदिर के नीचे इस तरह बेसमेंट बनना था। - फोटो : अमर उजाला
प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं माता के दर्शन के लिए
मंदिर में रोज कई हजार श्रद्धालु माता के दर्शन करते हैं। बारिश और धूप से श्रद्धालुओं को बचाने की कोई स्थाई व्यवस्था नहीं है। इस कारण श्रद्धालुओं को दर्शन करने के दौरान कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह मंदिर भी सरकार के अधीन है। प्रशासक मंदिर के सभी कार्यों को संचालित करवाते हैं। उन्हें श्रद्धालुओं को हो रही यह समस्या नजर नहीं आती है।
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