सप्तऋषि की मूर्ती सिर से खंडित हुई है।
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विधायक की शिकायत पर लोकायुक्त की जांच
कांग्रेस विधायक महेश परमार ने लोकायुक्त उज्जैन को शिकायत कर कहा था किठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए स्मार्ट सिटी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अंशुल गुप्ता ने टेंडर में न्यूनतम निविदाकार होने के बाद भी एमपी बावरिया को काम दिया। टेंडर में जीआई शीट लगानी थी, जिस पर 22 लाख रुपये का खर्च होना था। ठेकेदार ने इसकी जगह पोली-काबोर्नेट शीट लगाई। यह अतिरिक्त आइटम जोड़ा गया। इससे ठेकेदार को एक करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ पहुंचाया है। लोकायुक्त ने कांग्रेस विधायक महेश परमार की शिकायत पर तीन आईएएस अफसरों (तत्कालीन उज्जैन कलेक्टर आशीष सिंह, उज्जैन स्मार्ट सिटी के तत्कालीन कार्यपालक निदेशक क्षितिज सिंघल और तत्कालीन नगर निगम आयुक्त अंशुल गुप्ता) को नोटिस भेजे थे। इनके अलावा उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड के मनोनीत निदेशक सोजन सिंह रावत और दीपक रत्नावत, स्वतंत्र निदेशक श्रीनिवास नरसिंह राव पांडुरंगी, स्मार्ट सिटी उज्जैन के सीईओ आशीष पाठक, तत्कालीन सीईओ जितेंद्र सिंह चौहान, मुख्य वित्तीय अधिकारी जुवान सिंह तोमर, तत्कालीन अधीक्षण यंत्री धर्मेंद्र वर्मा, तत्कालीन कार्यपालन यंत्री फरीदुद्दीन कुरैशी, सहायक यंत्री कमल सक्सेना, उपयंत्री आकाश सिंह, पीडीएमसी उज्जैन स्मार्ट सिटी के टीम लीडर संजय शाक्या और जूनियर इंजीनियर तरुण सोनी को भी नोटिस भेजा था। इसके बाद कोई कार्यवाही नहीं हुई है।