गिरी मूर्तियों को क्रेन की सहायता से एक जगह रखा गया।
- फोटो : सोशल मीडिया
शुरू से ही विवादों में रहा प्रोजेक्ट
यह प्रोजेक्ट बनने के बाद से ही विवादों में रहा है। उज्जैन के कांग्रेस विधायक ने तो लोकायुक्त में शिकायत भी की थी। केस भी दर्ज हुआ है। तत्कालीन उज्जैन कलेक्टर को नोटिस भी जारी हुआ थआ। कुछ अन्य अधिकारियों को भी नोटिस दिया था। इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब सप्तऋषि की मूर्तियां टूट गई तो प्रशासन ने कहा कि गुजरात की कंपनी ने यह मूर्तियां बनाई थी। पांच साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी उनकी ही है। तीन दिन में नई मूर्तियां लगा दी जाएंगी। महाकाल लोक में मूर्तियां गिरने की जानकारी लगते ही शहर कांग्रेस अध्यक्ष रवि भदौरिया और अन्य पदाधिकारी तुरंत महाकाल लोक पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मूर्तियों के निर्माण में करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है। घटना के बाद आम श्रद्धालुओं का प्रवेश रोक दिया गया था, हालांकि तीन घंटे बाद ही इसे दोबारा खोल दिया गया।
दिग्विजय ने ट्वीट कर घेरा
दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया कि कांग्रेस विधायक महेश परमार का लोकायुक्त में जांच के लिए अनुरोध सही निकला। भगवान शिवजी की मूर्ति तेज हवा में खंडित हो गई। निर्माण किसने किया था? गुजरात की कंपनी ने। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा कि यह आपके लिए शुभ संदेश नहीं है। अब इससे बड़ा प्रमाण क्या हो सकता है? क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से स्पष्टीकरण लेंगे? मध्य प्रदेश में कोई भी योजना नहीं है, जिसमें भ्रष्टाचार न हुआ हो। अब महाकाल के नाम पर भी भाजपा पैसे खा गई।
कमलनाथ, अरुण यादव ने भी घेरा
महाकाल महालोक के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने सरकार को घेरा है। कमलनाथ ने कहा कि मध्य प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जब उज्जैन में महाकाल मंदिर परिसर का भव्य निर्माण करने का संकल्प लिया था, तब इस बात की कल्पना नहीं की थी कि बाद की सरकार महाकाल लोक के निर्माण में भी गंभीर अनियमितता करेगी। जिस तरह से महाकाल लोक परिसर में आंधी चलने से देव प्रतिमाएं जमीन पर गिर गईं, वह दृश्य किसी भी धार्मिक व्यक्ति के लिए अत्यंत करुण दृश्य है। मैं मुख्यमंत्री से मांग करता हूं कि महाकाल लोक में जो प्रतिमाएं गिरी हैं, वहां नई प्रतिमाएं तुरंत स्थापित की जाएं और घटिया निर्माण करने वालों को जांच कर दंडित किया जाए। वहीं, यादव ने आरोप लगाया कि उज्जैन महाकुंभ में करोड़ों रुपये का घोटाला करने वाली भाजपा सरकार ने 50 फीसदी कमीशन के चक्कर में महाकाल कॉरिडोर के निर्माण में करोड़ों रुपये की मूर्तियां मानसून से पहले हुईं आंधी-बारिश में ही धराशायी हो गईं एवं महाकाल लोक की आधी से ज्यादा कुर्सियां टूट गई हैं और कबाड़ में पड़ी हैं।
प्रभारी मंत्री ने कांग्रेस को दिया जवाब
उज्जैन में प्रभारी मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा- आंधी-तूफान का असर छह मूर्तियों पर हुआ है। तकनीकी कमी रही होगी। इसे हम दिखवा रहे हैं। नुकसान वाली बात नहीं है। जिस कंपनी के पास काम था, वह हफ्ते-दो हफ्ते में यह काम करेगी। सारी मूर्तियों को हम चेक करवा रहे हैं। भविष्य में ऐसी दिक्कत न हो, यह देख रहे हैं। भ्रष्टाचार वाली बात नहीं है। 50-50 साल पुराने पेड़ हिल गए। तकनीकी दिक्कत आई होगी तो उसे ठीक करेंगे। सारे ठेकेदारों को बुलवाया है। उनके साथ बैठकर बात करेंगे। कांग्रेस खुद अखंड भ्रष्टाचार में डूबी हुई है। वह अपने गिरेबां में झांककर देखें। फिर कोई बात करें। इतना बड़ा परिसर। इतना बड़ा काम हुआ है। प्राकृतिक आपदा पर कोई राजनीति कर रहे हैं तो इससे घटिया विचार नहीं हो सकता।