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Laddu Gopal: उज्जैन में सिवनी के लाडले सरकार की एक झलक पाने उमड़े भक्त, इंसानों जैसी दैनिक क्रिया भी कर रहे

Tue, 19 Nov 2024 03:49 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

सिवनी के अनोखे लड्डू गोपाल उज्जैन पहुंचे हैं। बताया जाता है कि इनकी हार्टबीट भी चलती है। साथ ही ये दूध, माखन और लड्डू भी खाते हैं। इंसानों जैसी दैनिक क्रिया भी कर रहे हैं।
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लड्डू गोपाल के पास बैठी महिलाएं और लड़कियां - फोटो : अमर उजाला

वैसे तो धार्मिक नगरी उज्जैन को चमत्कारी नगरी के नाम से जाना ही जाता है। जहां एक ओर बाबा महाकाल का दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है तो वहीं उनके सेनापति काल भैरव भी प्रतिदिन मदिरा का पान करते हैं। लेकिन इन दिनों इंदौर रोड स्थित सुभाष नगर में शिवनी के लाडले लड्डू गोपाल सरकार की जय-जय कार सुनाई दे रही है। जहां पर उज्जैन तो ठीक इंदौर, देवास और भोपाल के साथ ही पूरे प्रदेश से लड्डू गोपाल की इस चमत्कारी प्रतिमा के दर्शन करने श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। 

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लड्डू गोपाल की सवारी - फोटो : अमर उजाला

इंदौर रोड स्थित सुभाष नगर क्षेत्र में रहने वाले लखन बेतोड़ के यहां इन दिनों सिवनी के लड्डू गोपाल की तीन दिवसीय सेवा चल रही है।  जहां भगवान लड्डू गोपाल का विवाह उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। 

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लड्डू गोपाल को लिए हुए महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

इस विवाह उत्सव की शुरुआत सोमवार से हुई, जिसमें पहले लड्डू गोपाल का आगमन धूमधाम से किया गया। उसके बाद उनकी गोदी सेवा अभिषेक कर सहस्त्र पूजन किया गया। क्योंकि यह तीन दिवसीय आयोजन विवाह उत्सव का है। इसीलिए इस आयोजन में प्रथम दिन भगवान को हल्दी लगाई गई और देर शाम मेहंदी का आयोजन भी हुआ। आयोजन के दौरान भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद तुलसी विवाह, गोदी सेवा, 56 भोग और भजन संध्या का आयोजन आज किया जाएगा।

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लड्डू गोपाल - फोटो : अमर उजाला

इस आयोजन को करने वाले लखन बेतोड़ ने बताया कि तीन महीने पहले वह इंदिरा नगर में अपने मित्र गौरव तिवारी के घर लड्डू गोपाल की सेवा के लिए गए थे। जहां उन्होंने भगवान को अपनी गोदी में बैठाकर उन्हें माखन मिश्री खिलाया था। 

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लड्डू गोपाल - फोटो : अमर उजाला

इस चमत्कार के बाद ही उनके मन में भी यह कामना थी कि वह लड्डू गोपाल को अपने घर पर लाकर इसी प्रकार का भव्य आयोजन करें, उनकी यह कामना जल्द भी पूर्ण हो गई। तीन महीने में ही सिवनी से उनका बुलावा आ गया और अब वह लड्डू गोपाल के विवाह उत्सव जैसा भव्य आयोजन कर रहे हैं। 

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लड्डू गोपाल - फोटो : अमर उजाला

लड्डू गोपाल की चमत्कारी मूर्ति जिन्हें सिवनी के लाडले सरकार के नाम से भी जाना जाता है, वे अब सुभाष नगर पहुंचे हैं। जैसे ही उनके आगमन की सूचना लोगों को मिली दर्शन पूजन और उन्हें गोद में खिलाने के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचना शुरू हो गए। सोमवार शाम जब लाडले सरकार का दरबार सजा और भजनों की प्रस्तुतियां दी गई तो श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया। जय श्री राधे के जयकारों से समूचा क्षेत्र गुंजायमान हो गया। तीन दिन सेवा के बाद गुरुवार को लड्डू गोपाल विहार कर अन्य भक्तों के घर के लिए प्रस्थान करेंगे। लेकिन इसके पहले सुबह आठ से 12 बजे तक उन्हें गोद में खिलाने, बैठाकर भोग कराने वालों की लंबी कतार लगी रही।

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लड्डू गोपाल को खिलाती महिला - फोटो : अमर उजाला

सिवनी के कान्हा की यह प्रतिमा अत्यंत दुर्लभ और चमत्कारी है। उनके बारे में बताया जाता है कि इनकी हार्टबीट चलती है और यह प्रतिदिन माखन मिश्री का भोग लगाने के साथ ही दूध भी पीते हैं। यही नहीं इसके साथ ही इनकी इंसानों की तरह दैनिक क्रियाएं भी हैं। लखन बेतोड़ ने बताया कि सुबह उठने के साथ ही माखन मिश्री का भोग फिर नाश्ते में दूध का भोग लगाया जाता है। इसके बाद वह इंसानों की तरह बाथरूम जाते हैं। स्नान करते हैं और फिर उनका दूध दही और पंचामृत से अभिषेक भी किया जाता है। अच्छी बात यह है कि कान्हा की हार्टबीट चलती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उनका यह चमत्कार देखने के साथ ही उनकी गोदी सेवा करने के लिए यहां पहुंचते हैं। 

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लड्डू गोपाल की हार्टबीट मापने वाला यंत्र - फोटो : अमर उजाला

श्रद्धालुगणों का मानना है कि लड्डू गोपाल के कानों में भक्त अपनी मुराद कहते हैं, यह मुराद कुछ ही दिनों में पूरी हो जाती है। जो भी इच्छा उनके कानों में बोली जाती है, वह पूरी हो जाती है। यही कारण है की बड़ी संख्या में श्रद्धालु कान्हा जी के दर्शन करने के लिए पहुंच रहे हैं। 

 

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लड्डू गोपाल को खिलाती महिला - फोटो : अमर उजाला

सिवनी के राजेश अर्चना जलज परिवार की यह मूर्ति है। सिवनी के जलज दंपती के साथ यह किस्सा बताया जाता है कि उनकी पत्नी अर्चना संतान नहीं होने पर वे लड्डू गोपाल की आराधना करती रहती थी। एक बार जब भाव-विभोर होकर भगवान से प्रार्थना करने लगी तो सपने में भगवान ने कहा कि मैं हूं। उसके बाद बाल रूप में जो लड्डू गोपाल स्वप्न में दिखते थे, वही मूर्ति एक महात्मा ने उन्हें दे दी। इसके बाद जब वह मूर्ति स्थापित करने के प्रयास किए गए तो स्वप्न में दोबारा लड्डू गोपाल ने स्थापित करने से मना कर दिया। उसके बाद यह सिलसिला चल पड़ा। अब हर भक्त दो चार दिनों के लिए लड्डू गोपाल को अपने घर ले जाता है और बच्चों की तरह देखभाल करता है। इसी तारतम्य में उज्जैन के सुभाष नगर में बेतोड़ परिवार के यहां लड्डू गोपाल का आगमन हुआ। जहां क्षेत्र से सैकड़ों भक्त लड्डू गोपाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

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