देश का इकलौता ज्योतिर्लिंग जहां भगवान शिव की भस्म आरती होती है
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इन राजाओं ने कराया मंदिर का पुनर्निर्माण
महाकवि कालिदास के ग्रंथ मेघदूत में महाकाल मंदिर की संध्या आरती का जिक्र मिलता है। साथ ही इस ग्रंथ में महाकाल वन की कल्पना भी की गई है। कहा जाता है कि उज्जैन के तत्कालीन राजा विक्रमादित्य ने महाकाल मंदिर का विस्तार कराया था। उन्होंने मंदिर परिसर में धर्म सभा बनवाई, जहां से वह न्याय किया करते थे। राजा विक्रमादित्य ने कई प्रकार की प्रतिमाओं का निर्माण भी करवाया था। वहीं, 7वीं शताब्दी के बाण भट्ट के कादंबिनी में महाकाल मंदिर का विस्तार से वर्णन किया गया है। 11वीं शताब्दी में राजा भोज ने देश के कई मंदिरों का निर्माण करवाया था, जिनमें महाकाल मंदिर भी शामिल रहा। उन्होंने महाकाल मंदिर के शिखर को पहले से ऊंचा करवाया था।
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राजस्थान के राजाओं का भी रहा योगदान
राजस्थान के राजा जयसिंह द्वितीय ने 1280 में महाकाल के शिखर पर शिलालेख में सोने परत चढ़वाई थी। साथ ही उन्होंने कोटि तीर्थ का निर्माण भी कराया था। वहीं, 1300 ईस्वी में रणथम्भौर के राजा हमीर शिप्रा नदी में स्नान के बाद बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे थे। उन्होंने महाकाल मंदिर की जीर्ण शीर्ण अवस्था देखकर इसका विस्तार कराया। 1700 वीं शताब्दी में मेवाड़ के राजा जगत सिंह ने उज्जैन की तीर्थ यात्रा की और यहां कई निर्माण कार्य करवाए।