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MP News: उज्जैन के त्योहारों पर पीएचडी, सहायक पुलिस महानिरीक्षक ने ड्यूटी से समय निकालकर पूरी की जिद

Mon, 24 Apr 2023 11:03 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

इंदौर उज्जैन जोन में सहायक पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदस्थ नितेश भार्गव ने त्योहारों पर कानून व्यवस्था का प्रबंधन और पुलिस की चुनौतियां विषय पर पीएचडी की। गुड़ी पड़वा पर दीक्षांत समारोह के दौरान उपाधि भी प्रदान कर दी गई है।
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दीक्षांत समारोह के दौरान उपाधि लेते नितेश भार्गव । - फोटो : सोशल मीडिया
मध्यप्रदेश के उज्जैन को उत्सव की नगरी कहा जाता है। त्योहारों को लेकर इंदौर उज्जैन जोन में सहायक पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदस्थ नितेश भार्गव ने पीएचडी की है। उन्हें इस वर्ष गुड़ी पड़वा पर दीक्षांत समारोह के दौरान उपाधि भी प्रदान कर दी गई है। अपने कर्तव्य का निर्वहन करने की जिम्मेदारी और दूसरी ओर पीएचडी करने का जुनून के साथ भार्गव ने यह पीएचडी पूर्ण की है। 


 
इंदौर उज्जैन जोन में सहायक पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदस्थ नितेश भार्गव द्वारा विक्रम विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन अध्ययनशाला की आचार्य और अध्यक्ष डॉ. दीपिका गुप्ता के निर्देशन और व्यावहारिक मार्गदर्शन में त्योहारों पर कानून व्यवस्था का प्रबंधन और पुलिस की चुनौतियां विषय पर पीएचडी की गई। भार्गव बताते हैं कि धार्मिक नगरी उज्जैन में त्योहारों और व्यवहारों का जो बाहुल्य है वह भारत मे कहीं नहीं है। किस नगरी में एक ओर श्री महाकालेश्वर का ज्योतिर्लिंग है तो वहीं मां हरसिद्धि  का शक्तिपीठ भी है। यहां 84 महादेव के साथ ही साक्षात कालभैरव विराजमान हैं, जो कि प्रतिदिन मदिरा का पान करते हैं। इस नगरी में बड़े-बड़े आयोजन भी होते हैं जिसमें 12 माह में एक बार होने वाला सिंहस्थ महापर्व हो या फिर पंचक्रोशी और अन्य त्योहार उज्जैन में प्रतिदिन कोई ना कोई उत्सव जरूर मनाया जाता है इसीलिए उज्जैन को लघु भारत कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगा। 
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13 सालों के करियर में कई जगह पदस्थ रहे भार्गव उज्जैन के त्योहार परंपरा से प्रभावित हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
भार्गव ने 13 वर्षों में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, उमरिया, बालाघाट, मंडला, टीकमगढ़ जैसे विविध और भिन्न लोक व्यवहार के जिलों में रहते हुए त्योहारों के विविध रूप और प्रारूप देखे। लेकिन इन सभी जिलों में भी त्योहारों के जो वैविध्य और प्रारूप उज्जैन में देखने में आए वे काफी दुर्लभ हैं। इसलिए उन्होंने पीएचडी के लिए ये विषय चुना था। 
 
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