फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ujjain News: हे महाकाल! ये कैसी तैयारी, प्री-मानसून में ये हाल तो बारिश में क्या होगा, क्यों नहीं किए निकासी के इंतजाम

Mon, 13 Jun 2022 05:33 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

रविवार रात को हुई प्री मानसून बारिश ने प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी। उज्जैन में महाकाल मंदिर के गर्भगृह के सामने नंदी हॉल तक पानी पहुंच गया, इसके बाद सवाल उठे कि जब पहले से सब पता था तो तैयारियां क्यों नहीं की गई। 
विज्ञापन
1 of 3
महाकाल मंदिर के नंदी हॉल तक पहुंच गया बारिश का पानी - फोटो : सोशल मीडिया
मानसून अभी आया भी नहीं है और प्रशासनिक तैयारियों की पोल खुलने लगी है। व्यवस्थाओं के दावे करने वाले प्रशासन की तैयारियां कितनी पूरी है वह रविवार रात को हुई प्री-मानसून बारिश में नजर आ गई। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर के आंगन में पानी भर गया और बहता हुआ नंदी हॉल तक पहुंच गया, जिसके बाद महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे।
विज्ञापन

2 of 3
इस तरह फव्वारे की तरह नीचे गिरता रहा पानी - फोटो : सोशल मीडिया

दरअसल, रविवार रात को उज्जैन में प्री मानसून के तहत जोरदार बारिश हुई। बारिश ऐसी हुई कि शहर की सड़कें तालाब बन गई। लोगों को यह देखकर खुशी तो हुई मगर हैरानी तब हुई जब बारिश का पानी महाकाल मंदिर परिसर से होता हुआ नंदी हॉल तक पहुंच गया। इसके बाद से सवाल उठे कि आखिर ऐसी लापरवाही क्यों हुई क्योंकि गर्भगृह के सामने नंदी हॉल तक इतना पानी भर गया कि तालाब जैसी स्थिति बन गई। कर्मचारी पानी उलीचते रहे और व्यवस्थाओं पर सवाल उठते रहे। मंदिर समिति की ओर से यह तर्क दिया गया कि औंकारेश्वर मंदिर परिसर के पास जहां से पानी की निकासी होती है वहां कुछ कचरा फंस गया था, जिस कारण पानी रिसता हुआ नीचे पहुंच गया। कचरा हटाने के बाद निकासी शुरू हो गई थी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

3 of 3
पानी भरने के बाद इस तरह वायपर से निकाला गया - फोटो : सोशल मीडिया

दरअसल यह बात इसलिए उठ रही है क्योंकि मौसम विभाग के अलर्ट के बाद भी सतर्कता नहीं बरती गई। ऐसा भी नहीं कि बारिश में पहली बार ऐसा हुआ हो, हर बार यह स्थिति बनती है मगर मंदिर समिति ने कोई ध्यान नहीं दिया। इस बात की परवाह नहीं की कि बारिश में क्या हो  सकता है। अगर कचरा भी फंसा था तो उसे हटाने के इंतजाम क्यों नहीं किए गए। बारिश का पानी रात में घर में घुसा मगर दिन में यह होता और किसी तरह का हादसा होता तो जिम्मेदार कौन होता क्योंकि हजारों लोग महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में ग्रेनाइट मार्बल के पत्थर लगे हैं जिस कारण फिसलन का भय बना रहता है। बड़ा सवाल यह भी है कि हजारों करोड़ रुपये महाकाल कॉरिडोर के नाम पर खर्च किए जा रहे हैं मगर व्यवस्थाएं सुधर नहीं रही। प्री मानसून में कुछ देर की बारिश में जब यह हाल हुए तो जब आने वाले दिनों में लगातार बारिश होगी तो क्या होगा। मंदिर समिति के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है क्योंकि बातें तो उज्जैन को स्मार्ट सिटी बनाने की हो रही है, सर्वसुविधायुक्त बनाने की बात होती है लेकिन रविवार रात को हुई बारिश ने जो नजारा दिखाया उसने अफसरों की दूरदर्शिता पर सवालिया निशान लगाए। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें