यूक्रेन के बिगड़ते हालात के बीच भारतीय छात्रों की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। जो जहां है, वो वहीं फंसा हुआ है। ग्वालियर के छात्रों ने जो वीडियो भेजा है, वो और भी डराने वाला है। वीडियो यूक्रेन-रोमानिया बॉर्डर का है। इसमें दिख रहा है कि रोमानिया की फौजी छात्रों से अभद्रता कर रहे हैं। वहीं पीछे गोलियां चल रही हैं।
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यूक्रेन-रोमानिया बॉर्डर पर रोमानिया की फौजी छात्रों से अभद्रता कर रहे हैं।
- फोटो : सोशल मीडिया
यूक्रेन के बिगड़ते हालात के बीच भारतीय छात्रों की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। जो जहां है, वो वहीं फंसा हुआ है। ग्वालियर के छात्रों ने जो वीडियो भेजा है, वो और भी डराने वाला है। वीडियो यूक्रेन-रोमानिया बॉर्डर का है। इसमें दिख रहा है कि रोमानिया की फौजी छात्रों से अभद्रता कर रहे हैं। वहीं पीछे गोलियां चल रही हैं।
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सैनिक कुछ छात्रों को कहीं शिफ्ट करते दिख रहे हैं।
- फोटो : सोशल मीडिया
ग्वालियर के बिरला नगर के रहने वाले प्रतीक सोलंकी ने वीडियो भेजा है। उन्होंने बताया कि पिछले 13 घंटों से वे और उनके साथी रोमानिया बॉर्डर पर फंसे हुए हैं। यहा का तापमान माइनस तीन डिग्री है। वहीं रोमानिया के फौजी छात्र-छात्राओं से मारपीट कर रहे हैं। इसका उन्होंने एक वीडियो भी बनाकर भेजा है। जिसमें वे एक जाली के पीछे खड़े हैं और उस पार सैनिक कुछ छात्रों को कहीं शिफ्ट करते दिख रहे हैं। इस दौरान कुछ सैनिक छात्रों को मारते भी दिखे। वहीं जहां सैनिक हैं, उसके थोड़ा आगे गोलियां चलती दिख रहीं है, गोलीबारी की आवाज आ रही है। भारतीय छात्रों ने जल्द से जल्द यहां से निकालने की अपील भी की है।
100 से ज्यादा भारतीय विद्यार्थी चार दिन से बेसमेंट में रह रहे हैं
- फोटो : सोशल मीडिया
शाजापुर की छात्रा बीते चार दिन से बेसमेंट में फंसी
यूक्रेन में भारतीय छात्रों की मुसीबत का एक और वीडियो भेजा गया है। यूक्रेन के कीव में फंसी शाजापुर की खुशी दुबे ने बेसमेंट का वीडियो बनाकर भेजा है। उनकी वहां से निकलने की उम्मीद अटक गई है। इंडियन एंबेसी की ओर से कहा गया है कि सभी विद्यार्थी जहां पर हैं वहीं पर रहें।
शाजापुर के नई सड़क पर रहने वाले शेरू दुबे की बेटी खुशी दुबे यूक्रेन के कीव शहर में एक बेसमेंट में शरण लिए हुए है। सोमवार को खुशी ने अपने परिजनों को व्हाट्सएप कॉल करते हुए बताया कि उन्हें इंडियन एंबेसी की ओर से तैयार रहने के लिए निर्देश दिए गए थे। साथ ही कहा गया था कि यहां पर फंसे सभी विद्यार्थियों को ट्रेन की मदद से ले जाया जाएगा। फिर समीपस्थ देशों की बॉर्डर से पार करवा कर उन्हें एरोप्लेन की मदद से भारत लाया जाएगा। ऐसे में यहां पर मौजूद करीब 100 से ज्यादा भारतीय विद्यार्थियों ने अपनी तैयारी कर ली और अगले निर्देशों के लिए इंतजार करने लगे। चार दिन से बेसमेंट में रह रहे हैं विद्यार्थियों को स्वदेश लौटने की उम्मीद जाग चुकी थी, लेकिन सभी विद्यार्थियों की तैयारियां उसी समय धरी रह गई जबकि इंडियन एंबेसी की ओर से उन्हें सूचना दी गई कि अभी किसी भी विद्यार्थी को नहीं निकाला जा सकता है, क्योंकि ट्रेन चालू नहीं हुई है। ऐसे में सभी विद्यार्थी जहां पर हैं वहीं पर रहें।
खुशी दुबे ने बेसमेंट में फंसे सभी विद्यार्थियों का एक वीडियो भी बनाकर परिजनों को व्हाट्सएप किया है। खुशी के पिता शेरू दुबे ने कहा कि जब यह सूचना दी गई कि सभी विद्यार्थियों को ट्रेन से ले जाया जाएगा तो फिर इसे कैंसिल क्यों किया गया। उन्होंने इंडियन एंबेसी के दोहरे रवैए पर सवाल खड़े करते हुए अपनी बेटी सहित सभी विद्यार्थियों को जल्द से जल्द युद्ध के हालातों से बाहर निकालकर स्वेदश लाने की मांग की है।