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MP News: सागर में लाल पीली गोभी से महक रहा पोषण वाटिका, रंग के साथ-साथ मिनरल्स से भी है भरपूर

Mon, 10 Feb 2025 04:29 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सागर

सार

मध्यप्रदेश के सागर जिले में पोषक तत्वों से भरपूर ग्रीन ब्रोकली की जगह जल्द ही ऑरेंज और बैगनी फूल गोभी ले लेगी। यह रंगीन गोभी दिखने में जितनी आकर्षक है, उससे कहीं ज्यादा पौष्टिक है।
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गोभी की खेती - फोटो : अमर उजाला
गोभी का फूल एक प्रचलित तथा लोकप्रिय सब्जियों में गिनी जाती है। भारतीय समाज की शायद ही ऐसी कोई रसोई हो, जहां इसका प्रयोग न होता हो। गोभी को सलाद के रूप में, सब्जी बनाकर, पराठे बनाकर और सूप निकालकर इसका स्वाद लिया जाता है। अभी तक आपने गोभी का कलर सफेद देखा होगा, गोभी की एक प्रजाति हरे रंग की भी होती है, जिसे ब्रोकली कहा जाता है। लेकिन अब आपको नारंगी तथा बैगनी रंग की गोभी भी देखने को मिलेगी।

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गोभी - फोटो : अमर उजाला
पोषक तत्वों से भरपूर ग्रीन ब्रोकली की जगह जल्द ही ऑरेंज और बैगनी फूल गोभी ले लेगी। यह रंगीन गोभी दिखने में जितनी आकर्षक है, उससे कहीं ज्यादा पौष्टिक है। सागर के कृषि विज्ञान केंद्र में फूलगोभी की इस नई किस्म को प्रायोगिक तौर पर लगाया गया है।
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गोभी - फोटो : अमर उजाला
कृषि विज्ञान केंद्र की पोषण वाटिका में नवंबर में लगाई इन गोभियों में अब फसल आ गई है। रंगीन सब्जी की होटल व रेस्टोरेंट में डिमांड भी है। सेहत के हिसाब से लोगों के साथ ही गोभी की यह नई किस्म किसानों के लिए भी फायदेमंद साबित होगी। जैविक विधि से तैयार होने वाली इस फसल का बाजार में आम गोभी की जगह चार गुना तक अधिक दाम मिलने की उम्मीदें लगाई जा रही हैं।

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खेती की एरिया - फोटो : अमर उजाला
कृषि विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. केएस यादव ने बताया कि सागर जिले में गोभी की अच्छी पैदावार होती है। लेकिन ज्यादा उत्पादन होने पर किसान को वाजिब दाम नहीं मिल पाता। गोभी की यह रंगीन किस्म लगाने से यह लोगों को आकर्षित करेगी तथा इसके पोषक तत्वों की उपस्थिति इसे अच्छे दाम भी दिलाएगी।
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गोभी की खेती - फोटो : अमर उजाला
गोभी की इन किस्मों कि यह फसल 80 दिनों में तैयार हो जाती है और इसमें तैयार एक गोभी 1-2 किलो तक होती है। इन रंगीन गोभियों में आम गोभी की तुलना में कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम और जिंक पाया जाता है। इसके प्रयोग से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। बुजुर्ग और गभर्वतियों के लिए सेवन बेहद फायदेमंद होता है। उन्होंने बताया कि केंद्र की इस फसल को टमाटर के साथ लगाने पर कीट-व्याधि के प्रकोप का खतरा कम हो जाता है तथा श्रम और उर्वरक की भी बचत होगी। 
सागर से कृष्णकांत नगाइच की रिपोर्ट
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