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Foundation Day: ग्रीन एनर्जी का पावर हाउस बनता विंध्य, दिल्ली मेट्रो के बाद इंदौर-भोपाल को भी देगा सौर ऊर्जा

Sat, 01 Nov 2025 04:26 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा

सार

रीवा में उगी सूरज की किरणें अब इंदौर और भोपाल की मेट्रो को रफ्तार देने जा रही हैं। एशिया के सबसे बड़े रीवा सोलर पार्क से मिलने वाली हरित ऊर्जा से प्रदेश के दो बड़े शहर जल्द ग्रीन मेट्रो का दर्जा पाएंगे।
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रीवा की सौर ऊर्जा दे रही दिल्ली मेट्रो को रफ्तार - फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश की धरती पर अब सूरज की किरणें सिर्फ खेतों को नहीं, बल्कि मेट्रो के पहियों को भी रफ्तार देने जा रही हैं। एशिया के सबसे बड़े सौर ऊर्जा केंद्र रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क से अब इंदौर और भोपाल मेट्रो को बिजली आपूर्ति की तैयारी शुरू हो चुकी है। सरकार ने इस योजना को अमल में लाने का निर्णय लिया है और विभागों के बीच तकनीकी समन्वय की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। यह पहल न केवल हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देगी, बल्कि राज्य की मेट्रो परियोजनाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।
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रीवा सोलर पार्क से मिल रही हरित ऊर्जा - फोटो : अमर उजाला
रीवा जिले की गुढ़ तहसील में स्थापित 750 मेगावाट क्षमता वाला यह सोलर पार्क पहले ही दिल्ली मेट्रो को दिन के समय बिजली सप्लाई कर रहा है। दिल्ली मेट्रो की लगभग 60 से 90 प्रतिशत बिजली जरूरत रीवा की हरित ऊर्जा से पूरी होती है। अब यही सफल मॉडल इंदौर और भोपाल मेट्रो में लागू किया जाएगा, जिससे दोनों शहर देश के पहले ग्रीन मेट्रो शहरों में शुमार होंगे। सरकार ने वर्ष 2026 तक मेट्रो को रीवा सोलर ग्रिड से जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। इससे न केवल पर्यावरण को लाभ मिलेगा बल्कि राज्य को करोड़ों रुपये की बचत भी होगी, क्योंकि सौर ऊर्जा की दर पारंपरिक बिजली से करीब 30 से 40 प्रतिशत कम है।
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गुढ़ तहसील में स्थापित है यह सोलर पार्क - फोटो : अमर उजाला
रीवा सोलर पार्क का यह मॉडल अब मुनाफे और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुका है। लगभग 2800 करोड़ रुपये के निवेश से तैयार हुए इस प्रोजेक्ट ने शुरुआती वर्षों में ही सरकार को अपेक्षा से अधिक राजस्व दिया। राज्य को इससे न सिर्फ पंजीकरण शुल्क के रूप में करोड़ों रुपये मिले, बल्कि हर साल लगातार बढ़ता मुनाफा भी मिल रहा है। यही कारण है कि अब सरकार इस परियोजना के विस्तार की दिशा में तेजी से काम कर रही है। अधिकारियों के अनुसार रीवा सोलर पार्क की क्षमता 750 मेगावाट से बढ़ाकर 1200 मेगावाट तक की जाएगी, जिसके लिए करीब 800 एकड़ अतिरिक्त भूमि पहले ही चिन्हित की जा चुकी है।

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एशिया का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा केंद्र - फोटो : अमर उजाला
रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड, जो मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम और सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का संयुक्त उपक्रम है, इस विस्तार परियोजना की रूपरेखा पर तेजी से काम कर रहा है। यह विस्तार न केवल मेट्रो परियोजनाओं को हरित ऊर्जा उपलब्ध कराएगा बल्कि राज्य की समग्र ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।
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मेट्रो परियोजनाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम - फोटो : अमर उजाला
रीवा सोलर पार्क का असर स्थानीय स्तर पर भी दिख रहा है। रीवा के बडवार, बरसैता देश, इटार पहाड़ और रामनगर जैसे गांवों में इस परियोजना ने विकास की नई कहानी लिख दी है। पहले जहां यह इलाका रोजगार के लिए पिछड़ा माना जाता था, वहीं अब यहां के युवाओं को तकनीकी नौकरियां मिल रही हैं। इंजीनियर मनीष सिंह बताते हैं कि रीवा के युवाओं को अब नौकरी के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता, सोलर टेक्नोलॉजी और पावर ट्रांसमिशन में सैकड़ों रोजगार यहीं पैदा हुए हैं। वहीं इंजीनियर नेहा पटेल कहती हैं कि रीवा सोलर पार्क ने इस क्षेत्र को सिर्फ ऊर्जा नहीं, आत्मनिर्भरता दी है, इसका विस्तार पूरे राज्य के लिए लाभकारी साबित होगा।
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रीवा सोलर पार्क - फोटो : अमर उजाला
रीवा सोलर पार्क को देश में हरित क्रांति का आधार माना जा रहा है। यह भारत का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसने ग्रिड पैरिटी तोड़ी, यानी अब सौर ऊर्जा पारंपरिक बिजली से सस्ती है। जब यह शुरू हुआ था, तब प्रति यूनिट दर 2.97 तय की गई थी, जो पहले की 4.50 की दर से काफी कम थी। हर साल यह पार्क लगभग 1,120 गीगावाट प्रतिघंटे बिजली उत्पादन करता है और करीब 15 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाता है, जो 2.6 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।
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हरित क्रांति का आधार बना सोलर पार्क - फोटो : अमर उजाला
रीवा सोलर पार्क के जरिए पैदा हुई यह स्वच्छ ऊर्जा अब प्रदेश के शहरों को नई रफ्तार देने जा रही है। भोपाल और इंदौर मेट्रो की पटरियों पर जब गाड़ियां दौड़ेंगी, तो उनमें बहती ऊर्जा रीवा की धरती से आई होगी। वो ऊर्जा जो सिर्फ बिजली नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की हरित प्रगति का प्रतीक बनेगी।

रीवा की यह कहानी बताती है कि जब इच्छाशक्ति, तकनीक और दूरदृष्टि एक साथ चलें तो एक साधारण सी किरण भी पूरे राज्य को रोशन कर सकती है। आज रीवा सिर्फ सौर ऊर्जा का केंद्र नहीं रहा, यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ता हुआ कदम बन गया है। एक ऐसा कदम जो आने वाले कल की पीढ़ियों को स्वच्छ और उज्ज्वल भविष्य देगा।
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