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MP News: ठंड में खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर किसान, मंडी में धान की भारी आवक से बढ़ी परेशानी

Wed, 12 Nov 2025 04:15 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायसेन

सार

तापमान 10 डिग्री से भी कम और खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर किसान। मंडी में धान की उपज लेकर आए किसानों को मंडी समिति की अव्यवस्थाओं का खामियाजा ठंड में ठिठुरते हुए भुगतना पड़ा।
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खुले में रात बिताने को मजबूर 400 किसान - फोटो : अमर उजाला
जिले में बीते तीन दिनों से रात का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री तक पहुंच गया है, ऐसे में लगभग 400 किसान खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हो गए। दरअसल ये किसान अपनी धान की उपज लेकर रविवार दिन में ही मंडी पहुंच गए थे, लेकिन नीलामी के लिए उन्हें 25 से 30 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इसका मुख्य कारण मंडी में धान की अधिक आवक बताया जा रहा है। 
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धान की फसल बेचने मंडी पहुंचे किसान - फोटो : अमर उजाला
रायसेन में प्रतिदिन लगभग 25 से 30 हजार क्विंटल धान मंडी पहुंच रहा है, जिसके चलते करीब एक हजार ट्रॉलियां दशहरा मैदान में खड़ी हो जाती हैं। व्यापारियों द्वारा नीलामी सुबह 11 बजे से शुरू होती है, फिर दोपहर के भोजन के बाद ढाई से तीन बजे के बीच पुनः आरंभ होती है। अधिक आवक के कारण किसान अपनी ट्रॉलियां पहले से ही मैदान में खड़ी कर देते हैं।
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प्रतिदिन आ रही है 1000 हजार ट्रालियां - फोटो : अमर उजाला
बैरसिया तहसील के किसान महेश कुमार भार्गव ने बताया कि वे रविवार को ही अपनी धान की ट्रॉली लेकर दशहरा मैदान पहुंचे थे। ठंडी रात में उन्हें खुले आसमान के नीचे रहना पड़ा, क्योंकि मंडी समिति की ओर से अलाव की कोई व्यवस्था नहीं थी। ओस और सर्द हवाओं के बीच पूरी रात नींद नहीं आई। किसानों ने बताया कि अपनी सुविधा अनुसार ट्रॉलियां लगाने से कई बार जाम की स्थिति भी बन जाती है। हालांकि इस बार मंडी समिति ने नंबरयुक्त बोर्ड लगाकर व्यवस्था सुधारने की कोशिश की है, ताकि ट्रॉलियों को क्रमबद्ध तरीके से खड़ा किया जा सके।

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मंडी प्रशासन की अव्यवस्थाओं को भोगने के लिए मजबूर किसान - फोटो : अमर उजाला
जिले में इस बार करीब 3 लाख हैक्टेयर में धान की फसल की गई है। अधिक उत्पादन के कारण पिछले कुछ वर्षों से मंडी के पास स्थित दशहरा मैदान को अस्थायी धान नीलामी स्थल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। मंडी की क्षमता केवल 200 ट्रॉलियों की है, जबकि रोजाना 1000 से अधिक ट्रॉलियां यहां पहुंच रही हैं, जिससे अव्यवस्था और भी बढ़ रही है। किसान रातभर खुले आसमान के नीचे नीलामी का इंतजार करते हैं।
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नीलामी से एक दिन पहले पहुंचने पर ठंड में बितानी पड़ी रात - फोटो : अमर उजाला
बीदपुरा के किसान बलवंत जाट ने बताया कि किसानों को उनकी लागत के अनुरूप भाव नहीं मिल रहे हैं। रायसेन में मुख्यतः पूसा बासमती, मसूरी, और अन्य तीन-चार वैरायटी की धान की खेती होती है, जिसमें पूसा बासमती की मांग सबसे अधिक है। यह धान देश के कई राज्यों में सप्लाई की जाता है और रायसेन की शान माना जाता है।
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मंडी प्रशासन की अव्यवस्थाओं को भोगने के लिए मजबूर किसान - फोटो : अमर उजाला
फिलहाल किसानों को उनकी उपज के लिए न्यूनतम 1500 से अधिकतम 3100 प्रति क्विंटल तक के भाव मिल रहे हैं, जबकि किसानों का कहना है कि 4000 से 5000 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलना चाहिए ताकि वे अपनी लागत निकाल सकें। वर्तमान भावों से उन्हें न तो लाभ मिल पा रहा है, न ही खर्च की भरपाई हो रही है।

किसानों का कहना है कि प्रशासन को अस्थायी मंडी में अलाव, शौचालय और ट्रॉली खड़ी करने के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि फसल बेचने आए किसानों को कठिनाई का सामना न करना पड़े।
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