नाग पंचमी और सावन माह का तीसरा सोमवार एक साथ आने के कारण सोमवार को तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में धार्मिक आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। हालांकि नाग पंचमी और सोमवार एक साथ होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की सवारी में शामिल हुए दिनभर तीर्थनगरी हर-हर महादेव, बोल बम और नर्मदे हर के जयकारों से गूंजती रही।
सावन माह के तीसरे सोमवार को भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के पंचमुखी मुखोटे की भव्य सवारी मंदिर से दोपहर करीब 2 बजे पूजा-अर्चना और आरती के बाद निकली। सवारी नर्मदा नदी के कोटितीर्थ घाट पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का 251 लीटर दूध, दही, शहद, मिश्री, भांग, भस्म तथा सुगंधित गुलाब के फूलों से महाभिषेक किया गया। पंडित वेदाचार्य राजराजेश्वर दीक्षित के आचार्यत्व में सैकड़ों पंडित-पुजारियों ने विधि-विधान से महाभिषेक संपन्न कराया। महाभिषेक के दौरान घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। पूरा वातावरण भगवान शिव की आराधना और वैदिक मंत्रोच्चार से भक्तिमय हो गया।
ममलेश्वर भगवान पहुंचे बड़े भ्राता ओंकारेश्वर से मिलने
इसी दौरान भगवान ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की सवारी भी दोपहर 2 बजे मंदिर से निकली। महानिर्वाणी अखाड़े के घाट पर भगवान की प्रतिमा का नर्मदा नदी के पवित्र जल से स्नान कराया गया। इसके बाद विधि-विधान से अभिषेक एवं पूजा-अर्चना की गई। भगवान ममलेश्वर की सवारी अनेक नौकाओं में विराजमान होकर नर्मदा नदी पार करते हुए ओंकार पर्वत के ओंकारमठ और शिवपुरी क्षेत्र में पहुंची। यहां से सवारी पुराने झूला पुल से होते हुए मुख्य बाजार में पहुंची और भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के सामने से होकर आदि गुरु शंकराचार्य जी की गुफा के समीप पहुंची। मान्यता के अनुसार भगवान ममलेश्वर अपने बड़े भ्राता भगवान ओंकारेश्वर से मिलने ओंकार पर्वत पर पहुंचते हैं। दोनों ज्योतिर्लिंगों की सवारियों का यह मिलन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र रहा।
ये भी पढ़ें-
महाकाल परिसर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगदड़ से छह घायल, हरसिद्धि मंदिर में भी 13 की तबीयत बिगड़ी