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Omkareshwar News: नागपंचमी और सावन सोमवार का अद्भुत संगम, धूमधाम से निकली भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर की सवारी

Mon, 17 Aug 2026 06:07 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर

सार

नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के संयोग पर ओंकारेश्वर में भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर की भव्य सवारी निकली। दोनों ज्योतिर्लिंगों का नर्मदा में नौका विहार और मिलन आकर्षण का केंद्र रहा। ओंकारेश्वर के पंचमुखी मुखौटे का 251 लीटर दूध सहित पूजन सामग्री से महाभिषेक हुआ। श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा और यातायात के व्यापक इंतजाम रहे।
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ओंकारेश्वर में निकली सवारी - फोटो : अमर उजाला
नाग पंचमी और सावन माह का तीसरा सोमवार एक साथ आने के कारण सोमवार को तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में धार्मिक आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। हालांकि नाग पंचमी और सोमवार एक साथ होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की सवारी में शामिल हुए  दिनभर तीर्थनगरी हर-हर महादेव, बोल बम और नर्मदे हर के जयकारों से गूंजती रही।

सावन माह के तीसरे सोमवार को भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के पंचमुखी मुखोटे की भव्य सवारी मंदिर से दोपहर करीब 2 बजे पूजा-अर्चना और आरती के बाद निकली। सवारी नर्मदा नदी के कोटितीर्थ घाट पहुंची, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का 251 लीटर दूध, दही, शहद, मिश्री, भांग, भस्म तथा सुगंधित गुलाब के फूलों से महाभिषेक किया गया। पंडित वेदाचार्य राजराजेश्वर दीक्षित के आचार्यत्व में सैकड़ों पंडित-पुजारियों ने विधि-विधान से महाभिषेक संपन्न कराया। महाभिषेक के दौरान घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। पूरा वातावरण भगवान शिव की आराधना और वैदिक मंत्रोच्चार से भक्तिमय हो गया।

ममलेश्वर भगवान पहुंचे बड़े भ्राता ओंकारेश्वर से मिलने
इसी दौरान भगवान ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की सवारी भी दोपहर 2 बजे मंदिर से निकली। महानिर्वाणी अखाड़े के घाट पर भगवान की प्रतिमा का नर्मदा नदी के पवित्र जल से स्नान कराया गया। इसके बाद विधि-विधान से अभिषेक एवं पूजा-अर्चना की गई। भगवान ममलेश्वर की सवारी अनेक नौकाओं में विराजमान होकर नर्मदा नदी पार करते हुए ओंकार पर्वत के ओंकारमठ और शिवपुरी क्षेत्र में पहुंची। यहां से सवारी पुराने झूला पुल से होते हुए मुख्य बाजार में पहुंची और भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के सामने से होकर आदि गुरु शंकराचार्य जी की गुफा के समीप पहुंची। मान्यता के अनुसार भगवान ममलेश्वर अपने बड़े भ्राता भगवान ओंकारेश्वर से मिलने ओंकार पर्वत पर पहुंचते हैं। दोनों ज्योतिर्लिंगों की सवारियों का यह मिलन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र रहा।

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ओंकारेश्वर में निकली सवारी - फोटो : अमर उजाला
नौका विहार के दौरान पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत
भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर की सवारियों ने नर्मदा नदी में नौका विहार किया। गोमुख घाट पहुंचने पर बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने दोनों भगवानों का जोरदार स्वागत किया। श्रद्धालुओं और नगरवासियों द्वारा गुलाब एवं गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा कर भगवान का अभिनंदन किया गया। इसके बाद दोनों सवारियां बालवाड़ी क्षेत्र की ओर रवाना हुईं। पुराने बस स्टैंड से होते हुए सवारियां  निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ीं। विष्णु मंदिर के सामने से होते हुए जेपी चौक पहुंचने पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए और पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।

लगभग आठ घंटे तक भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर की सवारियां नगर में भ्रमण करती रहीं। इस दौरान पूरा नगर शिवमय नजर आया। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने भगवान का पूजन किया और प्रसाद वितरित किया। तीर्थनगरी में दिनभर बोल बम", "हर-हर महादेव", "जय-जय शिव शंकर" और नर्मदे हर के जयकारे गूंजते रहे। सावन के तीसरे सोमवार को ओंकारेश्वर में अनेकों कावड़ यात्राएं भी पहुंचीं। उज्जैन से ओंकारेश्वर और अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष कावड़ यात्री भगवान ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग को जल अर्पित करने पहुंचे। कावड़ यात्रियों ने नर्मदा नदी में स्नान कर भगवान ममलेश्वर का जलाभिषेक किया और पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। सावन माह में कावड़ यात्रियों की बढ़ती संख्या के कारण प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे।

 
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ओंकारेश्वर की सवारी के दौरान भगवान को नौका विहार भी कराया गया। - फोटो : अमर उजाला
श्रद्धालुओं को सुगमता से कराए दर्शन
ओंकारेश्वर मंदिर की प्रभारी डिप्टी कलेक्टर मुकेश काशिव ने बताया कि सावन माह के तीसरे सोमवार को मंदिर में श्रद्धालुओं को सुगमता और सुरक्षित तरीके से भगवान के दर्शन करवाए गए। मंदिर कर्मचारियों द्वारा श्रद्धालुओं को व्यवस्थित कतार में लगाकर दर्शन कराए गए। उन्होंने बताया कि दोपहर 12 बजे भोग के समय मंदिर के पट बंद किए गए। मध्यकालीन पूजा-पाठ और आरती के बाद दोपहर करीब 1:20 बजे मंदिर के पट पुनः खोल दिए गए। इस दौरान सामान्य दर्शन द्वार पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी, जिन्हें कतारबद्ध कर व्यवस्थित तरीके से दर्शन करवाए गए। कुछ समय के लिए 4 बजे मंदिर के पट साफ-सफाई के लिए बंद किए गए। करीब 4:15 बजे मंदिर के पट पुनः खोल दिए गए और श्रद्धालुओं को दर्शन की सुविधा दी गई।

251 लीटर दूध से हुआ महाभिषेक
सवारियों के प्रभारी आशीष दीक्षित ने बताया कि सावन माह के तीसरे सोमवार को भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के पंचमुखी मुखोटे का 251 लीटर दूध सहित विभिन्न पूजन सामग्री से महाभिषेक किया गया। काशिव ने बताया कि भगवान ओंकारेश्वर की सवारी दोपहर 2 बजे मंदिर से पूजा-पाठ और आरती के बाद निकली और कोटितीर्थ घाट पहुंची। करीब 2:30 बजे से पंडित-पुजारियों द्वारा भगवान का महाभिषेक शुरू किया गया। इसमें दूध, दही, शहद, मिश्री, भांग, भस्म तथा गुलाब के फूलों का उपयोग किया गया। दोनों ही भगवानों की सवारी में नर्मदा नदी में नौका विहार किया

पुलिस-प्रशासन ने संभाली व्यवस्था
ओंकारेश्वर थाना प्रभारी अनूप सिंधिया ने बताया कि खंडवा जिले के अलावा अन्य जिलों से भी कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और जवानों को तीन दिन पहले से ही ओंकारेश्वर में ड्यूटी पर तैनात किया गया था। सोमवार को ओंकारेश्वर मंदिर सहित नर्मदा नदी के विभिन्न घाटों पर गोताखोरों की तैनाती की गई।
भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर की सवारियों के नगर भ्रमण को देखते हुए यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया गया। आदि गुरु शंकराचार्य तिराहे से नगर की ओर जाने वाले वाहनों को रोक दिया गया और वाहनों को कुबेर भंडारी मंदिर की ओर डायवर्ट किया गया, जिससे सवारी के मार्ग में यातायात बाधित न हो।
 
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