ओंकारेश्वर–कोठी–भोगांवा–सनावद मार्ग के किनारे स्थित सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई, जिससे सोयाबीन, मक्का और कपास की फसलें बर्बाद हो गईं। किसानों का आरोप है कि एक निजी कॉलोनी विकसित करते समय प्राकृतिक जल निकासी मार्ग को बंद कर दिया गया। लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की। जब खेत पूरी तरह पानी में डूब गए और किसानों ने सड़क पर चक्काजाम किया, तब प्रशासन हरकत में आया और जेसीबी से रास्ता खोलकर पानी निकाला गया। लेकिन तब तक किसानों की फसलें पूरी तरह चौपट हो चुकी थीं।
आक्रोशित किसानों ने कहा कि उन्होंने कई बार खंडवा कलेक्टर सहित संबंधित अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायतें दी थीं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि प्राकृतिक जल निकासी का मार्ग बंद किया गया तो बरसात में भारी नुकसान होगा। इसके बावजूद न तो निर्माण कार्य रोका गया और न ही जल निकासी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। शुक्रवार को भारी बारिश के बाद मोरगंगा नदी का बैक वाटर खेतों में भर गया। देखते ही देखते सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूब गई। खेत तालाब में बदल गए और किसानों के सामने अपनी मेहनत डूबती देखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
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