नागपंचमी के अवसर पर नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खोल दिए गए हैं।
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रात 11 बजे से ही कतार में खड़े थे भक्त
भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए रविवार रात 11 बजे से ही सैकड़ों भक्त कतार में खड़े हो गए थे। प्रारंभिक पूजा-अर्चना के बाद जैसे ही दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ भक्त नागचंद्रेश्वर के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ने लगे।
11वीं सदी की दुर्लभ प्रतिमा, सात फनों के नीचे विराजमान शिव-पार्वती
महाकाल मंदिर के शिखर के तीसरे खंड में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व यह प्रतिमा बेहद खास है। यहां विराजित प्रतिमा को करीब 11वीं शताब्दी यानी 1050 ईस्वी का माना जाता है। प्रतिमा में भगवान शिव और माता पार्वती सात फनों वाले नाग के छत्र के नीचे विराजमान हैं। भगवान शिव के गले और भुजाओं में नाग लिपटे हुए हैं। प्रतिमा में भगवान गणेश, नंदी और सिंह की आकृतियां भी उकेरी गई हैं। मान्यता है कि यह दुर्लभ प्रतिमा नेपाल से लाई गई थी।
एक ही दिन नागचंद्रेश्वर दर्शन और बाबा महाकाल की सवारी
17 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार होने के कारण भगवान महाकाल की पारंपरिक सवारी भी नगर भ्रमण पर निकलेगी। ऐसे में श्रद्धालुओं को एक ही दिन भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन और बाबा महाकाल की सवारी का पुण्य अवसर मिलेगा। इस दुर्लभ धार्मिक संयोग को देखते हुए उज्जैन में भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ नियंत्रण के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकासी मार्ग निर्धारित किए हैं।
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