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Cheetah Project: कूनो के प्रभास-पावक को मिला नया ठिकाना, CM यादव ने अभ्यारण्य में छोड़ा; ऐसा देश में पहली बार

Sun, 20 Apr 2025 08:46 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंदसौर

सार

प्रभास और पावक को खुले बाड़े में छोड़ने के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्योपुर के कूनो के बाद अब मालवा की भूमि पर चीतों का स्वागत किया जा रहा है। इससे पर्यटन की नई संभावनाओं को पंख लगेंगे।
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गांधी सागर अभ्यारण्य के खुले बाड़े में छोड़े गए दो चीते। - फोटो : अमर उजाला
मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मालवा क्षेत्र के मंदसौर स्थित गांधी सागर अभ्यारण्य में दो नर चीतों प्रभास और पावक को खुले बाड़े में छोड़ा। पिंजरे से निकलते ही चीतों ने खुले बाड़े में दौड़ लगा दी। अंतरराज्यीय स्तर पर चीतों के पुनर्वास के लिए देश में पहली बार ऐसा किया गया है। मालवा की भूमि पर चीतों की वापसी के लिए इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।  


दरअसल, रविवार को दोनों चीतों प्रभास और पावक को श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क से मंदसौर के गांधी सागर अभ्यारण्य लाया गया था। जहां, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें गांधी सागर अभ्यारण्य के खुले बाड़े में छोड़ा है। इस बाड़े में पर्याप्त संख्या में चीतल, चिंकारा और अन्य जानवर हैं। छह साल के दोनों चीते कुनो में खुले में ही घूमते थे और शिकार करते थे, इसी कारण इन्हें सीधे खुले बाड़े में छोड़ा गया है। यहां भी वे खुद शिकार करेंगे। चीतों की सुरक्षा के लिए यहां सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं।
 

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सीएम यादव ने चीतों को पिंजरे से किया आजाद। - फोटो : अमर उजाला
सीएम बोले- मालवा की भूमि पर चीतों का स्वागत  
प्रभास और पावक को खुले बाड़े में छोड़ने के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह दुनिया का एकमात्र ऐसा चीता प्रोजेक्ट है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सफलतापूर्वक चल रहा है। श्योपुर के कूनो के बाद अब मालवा की इस भूमि पर चीतों का स्वागत किया जा रहा है। चीतों के आगमन के साथ ही मंदसौर और नीमच जिलों में पर्यटन की नई संभावनाओं को पंख लगेंगे। सीएम यादव ने कहा कि राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमावर्ती स्थिति के कारण दोनों प्रदेशों में चीतों की उपस्थिति से आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा, पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। वन और पर्यावरण की दृष्टि से मध्य प्रदेश की धरती पर चीतों का सफलतापूर्वक पुनर्वास किया गया है। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक अनिरुद्ध मारू, हरदीप सिंह डंग, पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया, स्थानीय जनप्रतिनिधि, अपर मुख्य सचिव (वन) अशोक वर्नवाल, संभाग आयुक्त संजय गुप्ता और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी असीम श्रीवास्तव उपस्थित रहे।

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खुले बाड़े में चहल कदमी करते चीते। - फोटो : अमर उजाला
आठ घंटे का सफर तय कर प्रभास और पावक पहुंचे अभ्यारण्य  
इससे पहले श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क से गांधी सागर अभ्यारण्य के लिए दो नर चीते, प्रभास और पावक को रविवार सुबह अलग-अलग वाहनों से रवाना किया गया था। इससे पहले सुबह वाहनों और पिंजरों को सैनिटाइज किया गया, जिसके बाद चीतों को पिंजरों में बंद किया गया। यही वे पिंजरे हैं, जिनमें चीतों को दक्षिण अफ्रीका से भारत लाया गया था। श्योपुर, बारा, कोटा और झालावाड़ से होते हुए आठ घंटे में दोनों चीते गांधी सागर अभ्यारण्य पहुंचे। इस दौरान सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा और डॉ. ओंकार अचल समेत 20 लोगों की टीम चीतों के साथ गांधी सागर अभ्यारण्य पहुंची। यह टीम करीब 7 दिन अभ्यारण में रुकेगी और स्थानीय स्टाफ को चीतों की देखरेख के तरीके सिखाएगी।

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गांधी सागर अभ्यारण्य में छोड़े गए प्रभास और पावक। - फोटो : अमर उजाला
चीतों के लिए पर्याप्त इंतजाम
गांधी सागर अभ्यारण्य के खुले बाड़े में छोड़े गए चीतों प्रभास और पावक के लिए भोजन, पानी और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। अभ्यारण्य में 37 किमी क्षेत्र में एक और बाड़ा भी बनाया गया है। ये दोनों चीते 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से भारत लाए गए थे।

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