दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया
- फोटो : अमर उजाला
सियासी अटकलें तेज
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में इस समय सिंधिया के लिए माहौल पूरी तरह सहज नहीं है। हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी बिना नाम लिए उन पर टिप्पणी की थी। ऐसे में अटकलें है कि ग्वालियर-चंबल में भाजपा के दोनों दिग्गज नेताओं के बीच गुटबाजी बहुत तेज चल रही है। वहीं, अब इस मुलाकात को लेकर चर्चा है कि क्या यह किसी नई सियासी बिसात की शुरुआत है या सिर्फ एक औपचारिक सौजन्य। दिलचस्प बात यह है कि इतिहास में राघौगढ़, जो दिग्विजय सिंह का गढ़ है, कभी ग्वालियर राजघराने के अधीन था। दिग्विजय ‘राजा साहब’ कहलाते हैं, जबकि सिंधिया को ‘महाराज’ कहा जाता है। दोनों घरानों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पुरानी है, लेकिन यह पल उस अदावत से अलग एक नई तस्वीर पेश करता है।
आस्तीन के सांपों से सचेत रहें...
दोनों नेता एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर चुके है। पिछले साल ग्वालियर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में दिग्विजय सिंह ने बिना किसी का नाम लिए कहा था कि आस्तीन के सांपों से सचेत रहें। इसके अलग-अलग मायने निकाले गए थे। राजनीतिक जानकारों ने बयान के मायने निकाले थे कि यह शायद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर निशाना साधा गया। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी दिग्विजय सिंह पर कहा था कि पहले वे मेरे पिता पर निशाना साधते थे और अब मुझे पर निशाना साध रहे हैं। तब दिग्विजय सिंह ने कहा था कि वे अभी बच्चे हैं।
दिग्विजिय सिंह की कसम टूटी
दरअसल, करीब तीन माह पहले ग्वालियर में हुई संविधान बचाओ रैली में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एलान किया था कि वे अब कभी मंच पर नहीं बैठेंगे। उनका कहना था कि मंच की राजनीति खत्म होनी चाहिए और वे केवल अपनी बारी आने पर ही मंच पर जाएंगे, अन्यथा आमजनों के बीच बैठेंगे।
लेकिन शुक्रवार को एक निजी कार्यक्रम में दिग्विजय सिंह मंच पर बैठे नजर आए। इसके बाद चर्चा शुरू हो गई कि क्या उनकी यह “कसम” टूट गई? हालांकि दिग्विजय सिंह का कहना है कि मंच पर न बैठने की बात उन्होंने कांग्रेस पार्टी के कार्यक्रमों के संदर्भ में कही थी, जबकि यह कार्यक्रम निजी था। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया स्वयं उन्हें मंच पर ले जाते दिखाई दिए।