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Kuno National Park: दो मादा चीतों को बड़े बाड़े में छोड़ा गया, बचे हुए तीन कल छोड़े जा सकते हैं

Sun, 27 Nov 2022 10:10 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर

सार

Project Cheetah: दो मादा चीतों को रविवार को बड़े बाड़े में छोड़ा गया। रविवार को जिन दो मादा चीतों को बड़े बाड़े में रिलीज किया गया है, उनके नाम आशा और तिबलिश बताए गए हैं। अब तक तीन नर और दो मादा चीताओं को रिलीज किया जा चुका है।
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रविवार रात दो चीतों को बड़े बाड़े में छोड़ा गया। - फोटो : ANI
मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में नामीबिया से लाए गए चीतों का क्वारंटाइन समय खत्म चुका है। धीरे-धीरे चीतों को बड़े बाड़े में शिफ्ट किया जा रहा है, जहां वे शिकार कर रहे हैं। दो मादा चीतों को रविवार को बड़े बाड़े में छोड़ा गया। अब तक पांच चीतों को शिकार करने के लिए छोड़ दिया गया है। संभावना है कि कल यानी सोमवार को शेष तीन चीतों को भी बड़े बाड़े में शिफ्ट कर दिया जाएं। 

कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ प्रकाश कुमार वर्मा ने बताया कि नामीबिया की दो मादा चीता, जिन्हें पहले क्वारंटाइन किया गया था, आज विशेषज्ञों की देखरेख में एक बड़े बाड़े में छोड़ दिया गया। 
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अब तक तीन नर और दो मादा चीताओं को रिलीज किया जा चुका है।  - फोटो : सोशल मीडिया
बता दें कि प्रोजेक्ट चीता के तहत नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन पर 17 सितंबर को श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। उन्हें अलग-अलग क्वारंटाइन बाड़ों में रखा गया था। अब धीरे-धीरे उन्हें बड़े बाड़ों में छोड़ा जा रहा है। रविवार को जिन दो मादा चीतों को बड़े बाड़े में रिलीज किया गया है, उनके नाम आशा और तिबलिश बताए गए हैं। अब तक तीन नर और दो मादा चीताओं को रिलीज किया जा चुका है। 

 
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आठ चीते नामीबिया से लाए गए हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
छह वर्ग किमी का है बड़ा बाड़ा
छह वर्ग किमी के घेरे में चीते शिकार को मारकर खाएंगे और स्वाभाविक रूप से खुद को ढाल लेंगे। बाड़े में पहले से ही हिरण, जंगली सुअर, नीलगाय और अन्य वन्य जीवों को चीतों के शिकार करने के लिए रखा गया है। यहां तीन से चार महीने बिताने के बाद चीतों को जंगल में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
 
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गले में पहनाए गए कॉलर आईडी से मॉनीटरिंग की जाएगी। - फोटो : Social Media
24 घंटे में चार बार मिलेगी लोकेशन
वन विभाग के अधिकारी बड़े बाड़े में छोड़े गए चीतों की, उनके गले में पहनाए गए कॉलर आईडी से मॉनीटरिंग करेंगे। कॉलर आईडी से चीतों की लोकेशन सेटेलाइट के माध्यम से दिन में चार बार वन विभाग के अधिकारियों को सिस्टम पर ऑटोमैटिक मैसेज के माध्यम से मिलेगी। इसकी मदद से टीम जरूरत पड़ने पर चीतों के पास पहुंच सकेगी।
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