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Katni News: दम तोड़ रही चूना नगरी कटनी की पहचान, सरकार की अनदेखी से 50 फीसदी व्यापार बंद, क्या बोले व्यापारी?

Thu, 24 Oct 2024 11:08 AM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटनी

सार

Lime City Katni: मध्यप्रदेश का कटनी जिला जो एक समय चूना नगरी से जाना जाता था, वो अब अपनी पहचान खोता जा रहा है। इसकी वजह सरकार की अनदेखी है जो चूना उद्योग को समाप्ति की ओर ले जा रही है। 
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दम तोड़ रही चूना नगरी कटनी की पहचान। - फोटो : अमर उजाला
लाइम सिटी कटनी, जिसका इतिहास करीब 150 साल पुराना है, यहां से बना चूना देश के कोने-कोने तक जाता था, चाहे फिर वो छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल हो या फिर जम्मू कश्मीर। लेकिन, अब लोग कटनी के चूने का स्वाद भूलते जा रहे हैं क्योंकि, यहां का चूना उद्योग समाप्ति की ओर है। व्यापारियों ने बताया कि कटनी में पहले 150 से अधिक इकाईयां थी जिसमें 280 से ज्यादा भट्टे गुलजार हुआ करते थे, लेकिन सरकार की अनदेखी और गुणवत्ताहीन लाइम स्टोन से अब कारोबार में दम नहीं बचा है। इसलिए लोग बंद करते हुए राजस्थान में शिफ्ट होते जा रहे है।
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दम तोड़ रही चूना नगरी कटनी की पहचान। - फोटो : अमर उजाला
सरकार ने कमर तोड़ 
कटनी चूना उद्योग में 3 पीढ़ियों से काम कर रहे बड़े व्यापारी अनिल नागरा ने बताया की हमारे पास पहले 8 चूना भट्टे थे, जिससे बनाने वाला चूना मध्यप्रदेश के आस पास जिलों से लेकर कई राज्यों में जा था, लेकिन अब पूरा कारोबार ठप पड़ा है। अब महज 2 चूना भट्टा चालू हैं, जिसमें बना माल बेचने में ही दिक्कत होती है। क्योंकि, पहले जैसा पत्थर न तो खदान से निकलता है न ही पहले जैसा चूना बनता है। कुछ व्यापारियों ने हिम्मत बांध रखी थी, लेकिन लघु उद्योग से मिलने वाले कोयले की क्षमता कम करते हुए सरकार ने भी कमर तोड़ दी।
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जिलाध्यक्ष मुन्ना भार्गव - फोटो : अमर उजाला
50 प्रतिशत से ज्यादा चूना भट्टा बंद 
व्यापारी बताते हैं कि पहले चूना उद्योग मुड़वारा में ही संचालित होते थे, लेकिन कटनी के जिला घोषित होते ही हम व्यापारियों ने जनहित में शहर से बाहर झुकेही, कैमोर समेत रिहायशी इलाकों से कोसों दूर होकर कारोबार संचालित करने लगे। व्यापार की बदहाली पर चूना उत्पादन संघ के जिलाध्यक्ष मुन्ना भार्गव ने कहा कि कटनी में संचालित करीब 50 प्रतिशत से ज्यादा चूना भट्टा बंद हो गए हैं। अब अब करीब 100 बचे हैं, साल में सिर्फ दिवाली के वक्त 70 प्रतिशत व्यापारी हिम्मत करके कारोबार करते थे, लेकिन नीलामी में खरीदा कोयला, भाड़ा, काम करने वाली लेवर से लेकर चूना भेजने का कॉस्ट(ट्रांसपोर्टेशन) पहले से कई गुना महंगी हो गई है।

रोजगार पर दिख रहा असर
चूना उद्योग के बंद होने से न सिर्फ सरकार के खजाने में असर पड़ रहा है, बल्कि इसका असर स्थानीय रोजगार में भी दिख रहा है। क्योंकि, यहां के स्थानीय श्रमिक लोकल में काम नहीं मिलने पर दूसरे जिले और राज्यों में काम तलाशने जाने लगे हैं। चूंकि, 80 प्रतिशत चूना उद्योग विजयराघवगढ़ विधानसभा में संचालित होता है, इसलिए अमर उजाला की टीम ने विधायक संजय पाठक से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि व्यापारियों ने कोयला से जुड़ी समस्या मुझे बताई है, जिसे मुख्यमंत्री मोहन यादव के समक्ष रखते हुए उसका निराकरण करने की कोशिश करूंगा। 
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ज्योति सिंह चौहान - फोटो : अमर उजाला
2 से 3 वर्षों से कोयला उपलब्ध नहीं
सूक्ष्म, लघु उद्योग अधिकारी ज्योति सिंह चौहान ने माना कि कटनी का चूना उद्योग खत्म होने का कारण व्यापारियों को 2 से 3 वर्षों से कोयला उपलब्ध नहीं होना है। जिससे सभी ऑक्शन से खरीदने पर हजारों रुपए टन में मंहगा मिलता है, हम पत्राचार करते हुए सभी समस्या हल करने की कोशिश कर रहे हैं। जिससे चूना उद्योग एक बार फिर कटनी जिले में गुलजार हो सके।
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