फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Interview:मप्र में संभवतः सबसे ज्यादा डिग्रियों वाली सरपंच प्रत्याशी, अभी भी जारी है पढ़ाई, जानिए कौन हैं और क्या है इनका विजन

Wed, 15 Jun 2022 05:35 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

आपको मिलवाते हैं ऐसी सरपंच प्रत्याशी से जो चर्चाओं में है अपनी डिग्रियों के कारण। इन्हें मप्र की सबसे ज्यादा डिग्रियों वाली सरपंच प्रत्याशी बताया जा रहा है। अमर उजाला से चर्चा में उन्होंने अपनी शिक्षा और राजनीति के बारे में बात की। 
विज्ञापन
1 of 4
चुनाव के लिए छपवाए गए पेंफलेट पर लिखीं हैं डिग्रियां - फोटो : सोशल मीडिया
आपको मिलवाते हैं एक ऐसी सरपंच उम्मीदवार से जो रहती तो गांव में हैं मगर उनकी डिग्रियां देखकर आपके होश उड़ जाएंगे। इनका नाम है ममतेश प्रवीश चौहान। उन्होंने बीए, एलएलबी, बीएड, एमएसडब्ल्यू और पीजीडीसीए किया है और अभी भी पढ़ाई जारी है। उन्हें मप्र की सबसे शिक्षित सरपंच प्रत्याशी माना जा रहा है। राजनीति में पहली बार वे किस्मत आजमा रहीं हैं। 
विज्ञापन

2 of 4
ममतेश चौहान - फोटो : सोशल मीडिया

दरअसल, पंचायत चुनाव में भाजपा समर्थित सरपंच पद की एक प्रत्याशी अपनी शिक्षा को लेकर चर्चा में हैं। इनका नाम ममतेश प्रवीण चौहान है। ये राऊ विधानसभा क्षेत्र के रंगवासा से भाजपा के समर्थन से सरपंच का चुनाव लड़ रहीं हैं। माना जा रहा है ये प्रत्याशी सरपंच पद की महिला उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा शिक्षित हैं। ममतेश बीए, एलएलबी, बीएड, एमएसडब्ल्यू और पीजीडीसीए कर चुकी हैं। अभी भी उनकी पढ़ाई जारी है। उन्हें प्रदेश में सबसे ज्यादा डिग्रियों वाली सरपंच प्रत्याशी बताया जा रहा है। वे कहती हैं बचपन से ही खूब पढ़ाई कर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कुछ कर दिखाने का जज्बा था, इसीलिए मैंने पहले बीए, फिर एलएलबी, बीएड, एमएसडब्ल्यू (मास्टर ऑफ साोशल वर्क) और पीजीडीसीए पूरा किया। अब एमए इन इंग्लिश लिटरेचर कर रही हूं।
विज्ञापन

3 of 4
चुनाव प्रचार के दौरान ममतेश चौहान - फोटो : सोशल मीडिया
ममतेश का कहना है कि सोशल वर्क के जज्बे के कारण ही एमएसडब्ल्यू किया। एनजीओ से जुड़कर समाज सेवा और ग्रामीण क्षेत्र में काम करने का अनुभव लिया। गांवों में सर्वांगीण विकास के साथ मेरा लक्ष्य वहां की परंपराओं, संस्कृति को आगे बढ़ाना है। वहां हरियाली बरकरार रहने के साथ विकास भी हो। महिलाओं की शिक्षा सौ फीसदी कैसे हो इसके लिए कोशिश करना है। मेरा प्रयास है कैसे महिलाएं राजनीति में आएं और कैसे अपना दायरा बढ़ाएं। अमर उजाला से बातचीत में ममतेश ने विचार साझा किए-
विज्ञापन

4 of 4
ममतेश चौहान - फोटो : सोशल मीडिया

सवाल-इसके पहले कभी चुनाव लड़ा था आपने।
ममतेश- नहीं, ये मेरा पहला चुनाव है। मेरा मायका इंदौर के सुदामा नगर में है। शादी गांव में हुई। यहां आकर मैंने महिलाओं की स्थिति देखी तो लगा कि चुनाव लड़ना चाहिए। मैंने एनजीओ के माध्यम से जिला पंचायत में काम किया है इसलिए ग्रामीण विकास को बेहतर तरीके से समझती हूं।

सवाल- क्या कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि है आपकी या परिवार में कोई राजनीति में है।
ममतेश-मैंने तो कभी राजनीति का नहीं सोचा था मगर मेरे पति और देवर राजनीति में जुड़े हैं। दोनों ही भाजपा में है। उनसे राजनीति के बारे में बाते होती रहती है।

सवाल-आप मप्र की सबसे शिक्षित सरपंच प्रत्याशी कही जा रही हैं, क्या से सच है।
ममतेश- ये तो मुझे नहीं पता कि मुझसे ज्यादा शिक्षित किसी महिला ने सरपंच की उम्मीदवारी की है या नहीं मगर ये सच है कि मेरे पास कई डिग्रियां हैं। मैंने  बीए, एलएलबी, बीएड, एमएसडब्ल्यू और पीजीडीसीए किया है। अभी अंग्रेजी साहित्य में एमए कर रहीं हूं। 

सवाल- जब इतनी पढ़ाई लिखाई की है तो फिर सरपंच जैसे छोटे पद का चुनाव क्यों लड़ रहे।
ममतेश-ऐसा नहीं है कि पद छोटा या बड़ा है। मेरा उद्देश्य राजनीति करना इसलिए है ताकि महिलाओं को उनका अधिकार मिल सके। मैं ये सोचकर चुनाव लड़ रही हूं कि महिला खुद अपने फैसले ले, उन्हें पति की जरुरत न पड़े। महिलाओं को हम शक्ति स्वरूपा कहते हैं तो उन्हें उनकी शक्ति का पता भी होना चाहिए। गांवों में 90 प्रतिशत लड़कियों की शादी जल्दी हो जाती है, जिस कारण वे पढ़ाई नहीं कर पातीं। मेरा उद्देश्य यही है कि ये सोच, ये विसंगति खत्म हो।

सवाल-जब गांव में जाते हो, लोगों से मिलते हो तो क्या समस्या सामने आती है
ममतेश-प्रमुख समस्या तो आज भी सड़क और पानी की ही रहती है। पहले के नेता बस वोट लेने आते हैं मगर काम नहीं करते। मैंने सबसे कहा कि मैं इस ढर्रे को खत्म करना चाहती हूं। मेरी कोशिश यही रहेगी कि कम से कम मूलभूत सुविधाएं तो सभी को मिले क्योंकि ये उनका हक है।

सवाल- आप गृहिणी हैं तो राजनीति के साथ घर-परिवार को कैसे मैनेज करते हैं
ममतेश- ये समस्या महिलाओं के साथ हमेशा रही है कि उन्हें खुद ही सबकुछ मैनेज करना रहता है और इसी कारण महिलाएं पीछे रह जाती हैं। मेरा संयुक्त परिवार है इस कारण ज्यादा दिक्कत नहीं आती। हां थोड़ी लाइफ स्टाइल टफ हो जाती है। समय कम मिलता है। क्योंकि राजनीति के साथ ही परिवार भी देखना है, मगर कोशिश करने से मैनेज हो जाता है। 

सवाल- राजनीतिक दल बातें तो महिला शक्ति की करते हैं मगर राजनीति महिलाओं के पति ही करते हैं, क्या से सही है।
ममतेश- ये बिलकुल गलत है। मैं यही खत्म करना चाहती हूं। मैं तो ये कहना चाहती हूं कि यदि मैं जीतती हूं तो मेरे पति पांच साल तक मेरी राजनीति से दूर रहे ताकि मैं अपने फैसले ले सकूं। महिलाओं के लिए बेहतर कर सकूं। मैं भी चाहती तो कहीं 50 हजार महीने की नौकरी कर लेती लेकिन मुझे गांव के लिए अच्छा करना है। इसीलिए मैं राजनीति में आई हूं।

सवाल- क्या गांवों में अभी तक जागरूकता नहीं आ सकी हैं, समस्याएं  क्यों खत्म नहीं हो रही।
ममतेश-लोग जागरूक तो हुए हैं लेकिन दिक्कत ये है कि उन्हें अपने अधिकार नहीं पता। खासकर गरीब लोगों को जानकारी नहीं। महिलाओं को जानकारी नहीं है। उन्हें उनके अधिकार बताना पड़ेंगे। योजनाओं के बारे में बताना पड़ेगा, तब आधी समस्याएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें