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Indore News: इंदौर में शुक्ला बनाम भार्गव, जानिए कितने पढ़े-लिखे हैं देवी अहिल्या की नगरी के महापौर प्रत्याशी

Wed, 15 Jun 2022 04:38 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर में भाजपा से महापौर प्रत्याशी पुष्यमित्र भार्गव का नाम लगभग तय है तो कांग्रेस ने संजय शुक्ला को उम्मीदवार बनाया है। आपको बताते हैं दोनों प्रत्याशियों के राजनीतिक जीवन के बारे में। कौन है भार्गव और क्या है शुक्ला की पृष्ठभूमि-
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संजय शुक्ला और पुष्यमित्र भार्गव - फोटो : सोशल मीडिया
नगर निगम चुनावों में महापौर प्रत्याशी कौन होगी, इसे लेकर इंदौर की तस्वीर साफ हो गई है। कांग्रेस उम्मीदवार संजय शुक्ला के सामने भाजपा ने पुष्यमित्र भार्गव को उतारा है।  बुधवार शाम को भाजपा ने अधिकृत घोषणा कर दी। इस नाम की घोषणा में भाजपा को खासी माथापच्ची करनी पड़ी और खूब खींचतान हुई। 

भाजपा-कांग्रेस दोनों दलों के प्रत्याशियों की बात करें तो कांग्रेस के संजय शुक्ला पब्लिक फेस है जबकि भाजपा के पुष्यमित्र भार्गव एकदम नया चेहरा है। शुक्ला को पार्षदी का अनुभव है तो वर्तमान में विधायक हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता विष्णुप्रसाद शुक्ला की राजनीतिक विरासत को संभाल रहे हैं। राजनीति की लंबी पारी खेल चुके हैं। दूसरी ओर, भार्गव ने भाजपा के आनुषांगिक संगठनों में काम किया है। जनता के सामने यह उनकी पहली परीक्षा है। बिना कोई चुनाव लड़े वे सीधे महापौर चुनाव लड़ रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भार्गव का नाम भारी है और सामाजिक कार्यों में भी वे अग्रणी है।
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2019 की इस तस्वीर में विधायक आकाश विजयवर्गीय के साथ पुष्यमित्र भार्गव। एक प्रकरण में आकाश की जमानत कराने में भार्गव की भूमिका अहम रही थी। - फोटो : सोशल मीडिया


पुष्यमित्र भार्गव: प्रशिक्षु अधिवक्ता से अतिरिक्त महाधिवक्ता तक का सफर 
  • भाजपा से पुष्यमित्र भार्गव का नाम तय होते ही सोशल मीडिया पर उनका बायोडाटा वायरल हुआ। आखिर लोग जानते ही नहीं थे कि भार्गव कौन हैं? राजनीति में यह नया नाम है। लिहाजा, उनकी प्रोफाइल वायरल मैसेज से मिली। मैसेज की शुरुआत में भार्गव ने लिखा कि तन समर्पित, मन समर्पित और यह जीवन समर्पित, चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं। करियर की बात करें तो भार्गव मप्र उच्च न्यायालय (इंदौर खंडपीठ) के अतिरिक्त महाधिवक्ता हैं।
  • एक जनवरी 1982 को उनका जन्म हुआ है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, स्कूल ऑफ लॉ इंदौर से लॉ में एम.फिल किया है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, स्कूल ऑफ लॉ इंदौर से बिजनेस लॉ में एलएलएम किया है। गवर्नमेंट लॉ कॉलेज मुंबई (एशियन स्कूल ऑफ साइबर लॉ) से सायबर लॉ से डिप्लोमा किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में सर्टिफिकेट कोर्स किया है।
  • भार्गव के पिता डॉ. राजेंद्र शर्मा पेशे से चिकित्सक हैं और माता निर्मला शर्मा सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। पत्नी जूही भार्गव भी अधिवक्ता है। भाई डॉ. सर्वमित्र भार्गव एमडी डॉक्टर है। सुदामा नगर में रहते हैं।
  • छह जून 2020 से मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खण्डपीठ में सबसे युवा अतिरिक्त महाधिवक्ता के पद पर कार्यरत हैं। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खण्डपीठ में वर्ष 2015-2018 तक सबसे युवा उप-महाधिवक्ता के पद पर दायित्व का निर्वहन किया है। वर्ष 2003 से 2004 तक मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के इंदौर खण्डपीठ में वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष माथुर (पूर्व न्यायाधीश, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय) के साथ एक प्रशिक्षु अधिवक्ता के रूप में कार्य किया। 
  • अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में कॉलेज और यूनिवर्सिटी अध्यक्ष रहे। एबीवीपी के संगठन मंत्री के रूप में गुवाहाटी में 2005 से 2007 तक काम किया। एबीवीपी के इंदौर संयोजक और मध्य भारत प्रांत एसएफडी प्रमुख रहे। भाजयुमो के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रहे। वर्ष 2020 में सीएए को लेकर इंदौर में जनजागरण के लिए आयोजित अखिल भारतीय संगोष्ठी का आयोजन किया। लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के समर्थन में  "लॉयर्स फ़ॉर मोदी" का विशाल आयोजन।  
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कुछ महीने पहले एक पारिवारिक आयोजन में पत्नी संग ठुमके लगाकर संजय शुक्ला ने दिखाया था अलग अंदाज। - फोटो : सोशल मीडिया
संजय शुक्ला: राजनीतिक उतार-चढ़ाव का साक्षी 
  • संजय शुक्ला को राजनीति विरासत में मिली है। पिता विष्णुप्रसाद शुक्ला इंदौर का बड़ा नाम है। आर्थिक रूप से शुक्ला परिवार संपन्न है। वैसे तो शुक्ला सुरेश पचौरी गुट से थे लेकिन अब उन्हें दिग्विजय सिंह गुट का माना जाता है। शुक्ला की शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो वे स्नातक हैं और 25 मई 1969 को उनका जन्म हुआ है। फिलहाल  इंदौर की एक नंबर विधानसभा से विधायक हैं। वे कांग्रेस में है जबकि उनके परिवार के सभी सदस्य भाजपा में है।
  • राजनीतिक रूप से देखें तो शुक्ला को राजनीति का लंबा अनुभव है और क्षेत्र सहित पूरे इंदौर और मप्र की राजनीति में वे जाना-पहचाना नाम है। कोरोना काल में सेवा कार्यों के चलते वे सुर्खियों में आए थे और उसके बाद से पलटकर नहीं देखा। रुपये खर्च करने में पीछे नहीं हटे और खुद के खर्च से लोगों की मदद की। क्षेत्र में सैकड़ों बोरिंग खुद के खर्च से करवाए तो क्षेत्रवासियों को तीर्थयात्रा पर ले गए। धार्मिक, सामाजिक कार्यों में अग्रणी रहे।
  • शुक्ला की राजनीति की बात करें तो 1994-1999 तक इंदौर नगर निगम में पार्षद रहे। सुदामा नगर (मप्र में चुने गए सबसे कम उम्र के कॉरपोरेटर)। 1995-1999 तक भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) के जिलाध्यक्ष रहे। महासचिव एमपी 1999-2002 से युवा कांग्रेस रहे। 2003-2008 से इंदौर नगर निगम में पार्षद बाणगंगा से। 2007-2011 और 2011-2015 तक मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महासचिव। वर्तमान में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इंदौर क्रमांक-01 से विधायक। 

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पुष्यमित्र भार्गव का नाम तय करने से पहले पार्टी ने इंदौर के नेताओं से रायशुमारी की, तब तक हर पल नया नाम सामने आ रहा था. - फोटो : सोशल मीडिया
भाजपा को प्रत्याशी चयन में आया पसीना
  • इंदौर का टिकट तय करने में भाजपा को पसीने आ गए। इसका मनोवैज्ञानिक फायदा कांग्रेस को मिला और उसने इसे भुनाने की भरसक कोशिश की। विधायक रमेश मेंदौला, भाजपा के नगराध्यक्ष गौरव रणदिवे, प्रवक्ता उमेश शर्मा, आईडीए के पूर्व चेयरमैन मधु वर्मा, पूर्व विधायक गोपीकृष्ण नेमा, जीतू जिराती जैसे नेताओं के नामों से होते हुए दावेदारी डॉ. निशांत खरे, डॉ. सचिन शर्मा, मनोज द्विवेदी और पुष्यमित्र भार्गव जैसे गैर-राजनीतिक नामों तक पहुंची।
  • भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और सीएम शिवराज सिंह की राजनीतिक तकरार फिर दिखी तो संगठन भी बेबस नजर आया। आखिर में नए चेहरे के रूप में भार्गव के नाम पर सहमति बनी जिसे सभी ने स्वीकार किया। भाजपा ने एक तरह से इंदौर में नया प्रयोग किया है, जिसे लेकर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की बातें हो रही है।
  • नये चेहरे को जिताने के लिए भाजपा को पूरी ताकत से जुटना होगा क्योंकि इंदौर नगर निगम महापौर पिछले दो दशक से भाजपा के कब्जे में है। इस बार आपसी खींचतान के कारण यदि यह सीट कांग्रेस के पास जाती है तो भाजपा को इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा। इस वजह से भाजपा के साथ ही अब पूरा संघ जीत के लिए प्रयासरत दिख रहा है।
  • कांग्रेस इसी नये चेहरे का लाभ लेने की कोशिश में है, लेकिन वहां संगठन उतना सशक्त नहीं है जितना भाजपा में। गुटबाजी बड़ी समस्या है और आपसी असंतोष की खबरें आती रहती हैं। शुक्ला इन सब चुनौतियों से कैसे निपटते हैं, यह देखना रोचक रहेगा। 
इस वजह से दिलचस्प होगा मुकाबला
  • भाजपा और कांग्रेस के दोनों प्रत्याशी युवा और तेजतर्रार है  
  • दोनों ही ब्राह्मण समाज से ताल्लुक रखते हैं 
  • दोनों ने छात्र राजनीति से राजनीतिक जीवन की शुरुआत की
  • दोनों ही देश की बड़ी पार्टियों से राजनीति कर कर रहे हैं
  • भार्गव महज 40 साल के हैं, जबकि शुक्ला 53 के, यानी उम्र का अंतर भी ज्यादा नहीं है  
  • दोनों ही शहर को अच्छे-से जानते हैं 
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टिकट तय होते ही पुष्यमित्र भार्गव ने अपने पद से इस्तीफा दिया - फोटो : सोशल मीडिया
भाजपा ने पुष्यमित्र भार्गव को उम्मीदवार बनाया। बुधवार दोपहर को आधिकारिक घोषणा कर दी। जैसे ही अधिकृत होने की सूचना मिली तो पुष्यमित्र भार्गव ने अपने पद से इस्तीफा दिया। 
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कांग्रेस प्रत्याशी संजय शुक्ला ने दाखिल किया नामांकन - फोटो : सोशल मीडिया

इंदौर से कांग्रेस के महापौर प्रत्याशी संजय शुक्ला दोपहर 2.15 बजे नामांकन फॉर्म जमा करने कलेक्टर ऑफिस पहुंचे। नामांकन कक्ष में उनके साथ पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, विनय बाकलीवाल और वकील सौरभ मिश्रा वह अन्य मौजूद  रहे। मीडिया से बात करते हुए सज्जन सिंह वर्मा ने पुष्य मित्र भार्गव को लेकर कहा कि भाजपा पता नहीं उन्हें किस गुफा से निकाल कर लाई है। भाजपा ने अपनी पार्टी के एक प्रत्याशी का हक मारा है।

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