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- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल, इंदौर
कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध कवि सरोज कुमार को स्वर्णाक्षर सम्मान से सम्मानित किया गया। साथ ही कुंअर बेचैन की पुस्तक पिन्स वेरी मैनी का विमोचन भी हुआ।
मुख्य अतिथि विष्णु सदाशिव कोकजे ने कहा कि साहित्यकार होने की पहली शर्त बेचैन होना है, जब तक आपके अंदर से बेचैनी, तड़प नहीं होती, तब तक अच्छा साहित्य नहीं गढ़ा जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि टेक्नोलॉजी के युग में कवि और साहित्यकारों को तकनीक से जुड़ना चाहिए। शशिकान्त यादव ने अपने वक्तव्य में कहा कि कवियों में संत के रूप में कुंअर बेचैन सदैव याद किए जाएंगे। और कवि सम्मेलन शब्दों की आराधना है।
इस अवसर पर मंचीय कवियों में बड़वानी से नितेश कुशवाह, मनावर से प्रद्युम्न शर्मा भानु, उज्जैन से श्रीकांत सरल, सीधी से शशांक मिश्रा अंकुर, भीकनगांव से कृष्णपाल राजपूत, शाजापुर से अमन जादौन, इंदौर से लव यादव, ब्रजेश मस्ताना, आकाश यादव, रिया मोरे, सचिन राव विराट, शिवम सिंह, रायसेन से नितेश व्यास, देवास से सक्षम राहुल, ओंकारेश्वर से शारदा ठाकुर, बड़ूद से पारस बिरला, देपालपुर से पृथ्वीराज वंशलेखक, गौतमपुरा से रुद्रांश राव और सुसनेर से हरिओम शर्मा काव्य दीप सम्मान से सम्मानित किया गया। काव्य कुंअर में कवियों ने काव्य पाठ भी किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. अखिलेश राव ने व आभार पंकज प्रजापति ने माना। आयोजन में वरिष्ठ साहित्यकार राकेश शर्मा, कीर्ति राणा, चंद्रशेखर शर्मा, जय सिंह रघुवंशी, अमन अक्षर, उमेश पारेख, गौरव साक्षी,अमित अभ्यंकर आदि सुधिजन मौजूद रहे।