इंदौर शहर के प्राचीन क्षेत्र में इंद्रेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना के बाद से यह इलाका जूनी इंदौर के नाम से जाना जाता है। जबकि राजबाड़ा के आसपास जो बसाहट हुई, वह इंदौर कहलाती है। प्राचीन बस्ती होने के कारण पुराने शहर को जूनी इंदौर नाम से संबोधित किया जाता है। इसी क्षेत्र में कान्ह और सरस्वती नदी का बहाव रहा है। चूंकि नदियों के किनारे मंदिरों के निर्माण की हमारी प्राचीन परंपरा है। इसलिए जूनी इंदौर में नदियों के किनारे पुरानी छत्रियां और मंदिर अब भी देखने को मिल जाते हैं। इस क्षेत्र में दो शिव मंदिर बहुत ही प्राचीन होने का प्रमाण उपलब्ध है। कनकेश्वर और चंद्रशेखर महादेव नाम के दो शिवालय प्राचीन हैं।