मप्र में पिछले 15 दिन से जारी बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोडक़र रख दी है। अमर उजाला ने प्रदेश के किसानों से बातचीत की और जाना की जमीन पर क्या हालात हैं। किसान रूप किशोर मालवीय शाजापुर में कालापीपल के पास छापरी गांव में रहते हैं। उन्होंने 16 बीघे में गेहूं लगाया था। किशोर ने बताया कि गेहूं की फसल तो पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। एक बीघा में 12 से 15 क्विंटल गेहूं होना था। हर बीघे में इस बार 5 से 7 क्विंटल गेहूं कम निकलेगा। यही तो किसान की आय थी। यदि फसल आधी हो गई तो वह पूरी तरह से बर्बाद हो गया। उसे खाद, बीज और मेहनत के पैसे भी नहीं मिलेंगे। उल्टा उसने जो कर्ज लिया था वह कैसे चुकाएगा यह भी संकट होगा।
सिर्फ गेहूं में ही दो लाख 40 हजार रुपए का नुकसान
किशोर ने बताया कि हर बीघे में उन्हें 15 हजार का नुकसान हुआ है। इस हिसाब से उन्हें 16 बीघे में दो लाख 40 हजार रुपए का नुकसान हो गया। किशोर ने कहा कि जितना लगाया था वह भी नहीं मिला उल्टा घाटे में आ गए।
विज्ञापन
2 of 3
रूप किशोर
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
प्याज और लहसुन भी बर्बाद
किशोर ने बताया कि उन्होंने खेतों में गेहूं के साथ प्याज और लहसुन भी लगाया था। बारिश के ठंडे पानी से ये दोनों फसलें भी बर्बाद हो गई हैं।
सालभर की मुख्य आय ही डूबी
किसानों की सालभर की मुख्य आय मार्च, अप्रैल की फसल से ही होती है। किशोर ने कहा इससे आया हुआ पैसा ही हम सालभर उपयोग करते हैं। अब घरों में शादी, ब्याह तो दूर की बात है यह भी चिंता सता रही है कि घर का खर्च कैसे चलेगा।
किशोर ने बताया पटवारी आए, गांव के सभी किसानों ने उनसे बातचीत की।
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
पटवारी आए, बोले- सर्वे करने के आदेश नहीं मिले
किशोर ने बताया कि आज सुबह ही पटवारी आए थे। गांव के सभी किसानों ने उनसे बातचीत की। उन्होंने फसलें देखी और सबसे बातचीत के बाद कहा कि अभी ऊपर से सर्वे के आदेश नहीं मिले हैं। सर्वे के आदेश मिलने के बाद ही तय होगा कि किसे कितना नुकसान हुआ है और सरकार क्या मदद कर सकती है।