रामनवमी पर इंदौर के स्नेह नगर में गुरुवार सुबर 11 बजे हुए दर्दनाक हादसे में अब तक 13 लोगों की जान जा चुकी है। बताया जा रहा है कि मृतकों का आंकड़ा बढ़ भी सकता है। हादसे के बाद कई सवाल जहन में उठ रहे हैं कि हादसे के पीछे क्या वजह रही। हादसा इतना भयानक कैसे हो गया कि पल-पल में मरने वालों का आंकड़ा बढ़ता गया। प्रथमदृष्टया तीन प्रमुख कारण आपको बताते हैं कि कैसे इतने लोगों की मौत हो गई।
सबसे पहले जान लेते हैं कि हादसा क्या था और कैसे हुआ। इंदौर के स्नेह नगर के पास पटेल नगर में श्री बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर पर रामनवमी पर कन्या पूजन का आयोजन चल रहा था। मंदिर में लोगों का जमावड़ा था। अचानक मंदिर परिसर में बावड़ी की छत ढह गई और भीड़ सीधे बावड़ी में जा गिरे। अचानक हुए हादसे से लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। जब तक प्रशासन की मदद उन तक पहुंचती, 13 लोगों की मौत हो चुकी थी।
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हादसे के बाद लोगों को रस्सी डालकर निकाला गया।
- फोटो : सोशल मीडिया
हादसे में इतने लोगों के मारे जाने की तीन प्रमुख वजह
1. प्रशासन की लापरवाही
हादसे के बाद अब जिम्मेदार अपना-अपना पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। पता चला है कि यहां के रहवासी लंबे समय से निगम, कलेक्टर और अन्य विभागों को यहां चल रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण की शिकायत कर रहे थे, लेकिन कोई भी अधिकारी सुन नहीं रहा था। ये भी पता चला है कि प्रशासन को कहा गया था कि मंदिर में जीर्णोद्धार किया जा रहा है। नाक के नीचे बावड़ी को ढंक दिया गया और प्रशासन को पता ही नहीं चला। अब हादसे के बाद निगम ने मंदिर ट्रस्ट को निर्माण हटाने का आदेश दिया है। आदेश श्री बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सेवाराम गलानी के नाम पर जारी हुआ है।
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मंदिर में निर्माण को लेकर काफी समय से शिकायत मिल रही थी। प्रशासन का कहना है कि नोटिस भी दिया गया था।
- फोटो : सोशल मीडिया
2. कमजोर निर्माण
मंदिर परिसर में बावड़ी को ढंका गया था। इसके ढंकने के लिए सरियों का जाल बनाया और उस पर टाइल्स बिछवा दी गईं। आरसीसी छत भी भरवाई गई होती तो हादसा नहीं होता। आयोजन के दिन इसी कमजोर निर्माण पर दरी बिछा दी गई और लोगों को एकत्र कर लिया गया। जैसे-जैसे वजन बढ़ता गया निर्माण भी धंसकने लगा। जब लोग आहुति देने आगे बढ़े और भार एक जगह आया तो निर्माण पूरी तरह धंस गया और लोग सीधे बावड़ी में जा गिरे।
बावड़ी में गिरे लोगों को बचाने के लिए सीढ़ियां भी डाली गईं।
- फोटो : अमर उजाला
3. बावड़ी में पानी का होना
मंदिर परिसर में जिस बावड़ी को ढंका गया था, उसमें पानी और गाद जमा था। हादसे के वक्त जैसे ही लोग गिरे। वे दबते चले गए। ऊपर वाले लोगों के बाहर निकलने की जद्दोजहद में पैरों तले नीचे मौजूद लोगों को रौंदा गया। पानी होने से वे डूबते गए और जान गंवा बैठे। पता चला है कि हादसे के करीब दो घंटे बाद प्रशासनिक मदद पहुंची थी, तब तक नीचे गिरे लोग खुद ही बाहर निकलने के लिए छटपटा रहे थे। और नीचे दबे लोग और नीचे दबते गए। अब तक 13 लोगों की मौत बताई जा रही है। पर बावड़ी के मलबे में भी कुछ लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। जिससे मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है।