इंदौर आईआईटी अपने इनोवेशन से दुनियाभर में पहचान बना रहा है। यहां के छात्र और फैकल्टी कई इनोवेशन कर चुके हैं जिनकी वजह से उद्योगों के साथ आम लोगों को भी बहुत फायदा मिल रहा है। हाल ही में आईआईटी इंदौर ने एक कम लागत वाला कैमरा सेटअप तैयार किया है जिसकी वजह से चार कैमरों की जगह एक ही DSLR कैमरे का उपयोग होगा। इसे सीएल फ्रेम नाम दिया गया है। प्रोजेक्ट के प्रमुख डाक्टर योगेश्वर नाथ मिश्रा ने बताया कि इस सेटअप की मदद से आप उन जगहों पर भी एक कैमरे में फोटोशूट कर पाएंगे जहां पर चार कैमरों की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि राकेट में ईंधन का जलना और कई अन्य प्रक्रियाओं में जहां पर तापमान में बहुत अंतर आता है, फोटोशूट के लिए एक साथ चार कैमरे और चार लैंस लगते हैं। इस तरह से प्रोजेक्ट की कीमत बहुत अधिक बढ़ जाती है। अब यह नया सेटअप एक ही कैमरे और लैंस में पूरा काम कर देगा। इस प्रोजेक्ट को आईआईटी इंदौर ने गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय, स्वीडन और नासा कैलटेक यूएसए के सहयोग से पूरा किया है। इसमें प्रोफेसर देवेंद्र देशमुख और पीएच.डी. स्टूडेंट देवाशीष चोरे की प्रमुख भूमिका रही है।
कम लागत वाला कैमरा सेटअप "CL-FRAME" विकसित किया है
- फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
प्रो. देशमुख ने कहा ''हमने स्ट्रक्चर्ड इल्युमिनेशन (एसआई) की विधि का उपयोग किया है, जो कई तरह की इमेज एक साथ लेने की अनुमति देता है। स्ट्रक्चर इल्युमिनेशन हमें डीएसएलआर कैमरे का उपयोग करके कम तीव्रता वाली छवि लेने में सक्षम बनाता है, जिसके लिए आमतौर पर महंगे सीसीडी कैमरों की आवश्यकता होती है। इसके माध्यम से हम बायोमेडिकल इमेजिंग, अल्ट्राफास्ट इमेजिंग और अन्य कामों में भी मदद ले सकेंगे।
भारत के लिए एक महत्वपूर्ण इनोवेशन
इस अध्ययन को "एप्लाइड ऑप्टिक्स" जर्नल ऑफ द ऑप्टिकल सोसाइटी ऑफ अमेरिका (ऑप्टिका) में भी प्रकाशित किया गया है। इसमें बताया गया है कि वैज्ञानिक जांच के लिए भारत जैसे विकासशील देश में यह एक बेहतर इनोवेशन है। यह भारत को कम संसाधनों के साथ वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक हैं। संसाधनों की बढ़ती मांग के साथ, ऐसी तकनीकें और दृष्टिकोण अपनाना बेहद जरूरी है। यह कम लागत वाला सेटअप, उन प्रयोगशालाओं में अनुसंधान के लिए विकसित किया जा सकता है, जिनमें महंगे कैमरा सिस्टम की कमी है।