महारानी देवी अहिल्या बाई की 230 वीं पुण्यतिथि के मौके पर शुक्रवार को गांधी हाॅल से भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। यह राजवाड़ा पर समाप्त हुई। राजवाड़ा चौक स्थित प्रतिमा पर गणमान्य नागरिकों ने माल्यार्पण कर पुण्यश्लोका देवी अहिल्या को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके अलावा शहर में कई अन्य जगह कार्यक्रम हुए। सुबह मेयर पुष्य मित्र भार्गव व भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने भी अहिल्या प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। यहां अहिल्या स्तुति का सामूहिक गान हुआ। इंदौर के प्राचीन इंद्रेश्वर मंदिर में रुद्राभिषेक किया गया।
गांधी हॉल से शाम को निकली देवी अहिल्या की पालकी के आगे होलकर कालीन वेश में कलाकार घोड़े पर सवार थे। शहर के बैंड, भजन मंडलियां भी यात्रा में शामिल हुए और पाउल भजन गाए। लेझिम और दिंडी के साथ भी भजनों की प्रस्तुति दी गई। पालकी के स्वागत के लिए दो किलोमीटर लंबे यात्रा मार्ग पर अनेक मंच लगाए गए थे। इसके अलावा गुणीजनों का सम्मान किया। इससे पूर्व दोपहर में गांधी हाॅल में समारोह आयोजित किया गया। इसमें गुणीजनों का सम्मान किया गया। बच्चों को पढ़ाने वाले आरक्षक संजय सांवरे को अतिथियों ने सम्मानित किया। देवी अहिल्या समिति द्वारा वर्षभर चित्रकला, भजन, संगीत, नृत्य व अन्य प्रतियोगिता की जाती है। उसमें जो विजेता घोषित हुए है। उन्हें पुरस्कार भी समारोह में वितरित किए गए।
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देवी अहिल्या ने अमिट छाप छोड़ी : ताई
गुणीजन सम्मान समारोह में पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि देवी अहिल्या माता सबकी हैं। सब पालकी यात्रा में इसी भाव से आते हैं। अहिल्या मां ने पूरे देश में अपने परोपकारी कार्यों की अमिट छाप छोड़ी है।