इस बार इंदौर समेत मालवा-निमाड़ से मानसून की बेरुखी से चिंता गहरा रही है। भारतीय पंचाग का सावन माह पिछले पांच साल में सबसे कम वर्षा वाला रहा तो अंग्रेजी माह के अनुसार अगस्त में 100 साल की सबसे कम बरसात हुई। 28 अगस्त को सावन मास खत्म हो चुका है। इस दौरान रिमझिम और घनघोर बारिश के बजाए इस पूरे माह बूंदाबांदी व मध्यम वर्षा से ही मालवावासियों को संतोष करना पड़ा। सोमवार को अगस्त भी अलविदा हो गया और माह का अंतिम दिन भी क्षेत्र में सूखा बीता। हालांकि, अभी निराश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सितंबर यानी भादौ पूरा बचा है और इसमें भी झमाझम बारिश होती रही है। सितंबर में 72 साल पहले 30 इंच वर्षा हुई थी, जिसने सारी कमी पूरी कर दी थी।
लोक मान्यता के अनुसार वर्षा के देवता इंद्र इस वर्ष मालवा-निमाड़ से नाराज हैं। हालांकि, वर्षा काल शुरू होने के पूर्व से ही मौसम वैज्ञानिक और विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने इस बार वैश्विक मौसम को प्रभावित करने वाले अल नीनो प्रभाव मजबूत होने और भारत के मध्य क्षेत्र में वर्षा कम होने की आशंका प्रकट कर दी थी। इंदौर में सावन ऐसे बीता कि यह अहसास ही नहीं हुआ कि वर्षाकाल और सावन माह चल रहा है। तमाम कवियों की सावन की कल्पना और फिल्मी गीतों में सावन के मौसम की खुशियां और महाकवि कालिदास के ऋतु वर्णन में सावन की बरसात का सुंदर चित्रण है, लेकिन इस बार वह बौना साबित हो गया। सावन आया तो, लेकिन लगभग सूखा बीत गया।
ये भी पढ़ें-
पूर्वी एमपी में फिर आफत की बारिश: आज 11 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, डैमों के गेट खुले, बाढ़ का खतरा बरकरार