इंदौर में मराठी सोशल ग्रुप द्वारा आयोजित तीन दिनी मेंगो जत्रा का समापन हो गया। तीन दिन में करीब तीन करोड़ रुपये से ज्यादा के 125 टन आम बिके। इतने लोग आए कि आखिरी दिन और आम मंगवाना पड़े। आमों की गुठलियां वन विभाग को सौंपी जाएगी।
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मेंगो जत्रा में लोगों ने लिया आम का लुत्फ
- फोटो : सोशल मीडिया
आम का स्वाद क्या होता है ये इंदौरियों से पूछना चाहिए क्योंकि यहां लगी मेंगो जत्रा में आम खाने के लिए इंदौरियों का हुजूम उमड़ा। मराठी सोशल ग्रुप द्वारा यह मेंगो जत्रा आयोजित की गई थी, जो 15 मई तक चली। इस तीन दिनी मेंगो जत्रा में तीन करोड़ रुपये से ज्यादा के 125 टन आम इंदौरियों ने खरीदे। इतना ही नहीं मेला स्थल पर करीब 12 हजार आम खाए गए।
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मेंगो जत्रा में बड़ी संख्या में लोग आम खरीदने पहुंचे
- फोटो : सोशल मीडिया
बता दें कि इंदौर के ढक्कन वाला कुएं के समीप ग्रामीण हाट बाजार में मेंगो जत्रा लगाई गई थी। करीब दो साल बाद लगी इस जत्रा में अपार उत्साह देखा गया। आम की मिठास चखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। जत्रा की शुरुआत में यहां व्यापारी 120 टन आम लेकर आए थे लेकिन इतने लोग उमड़े कि आखिरी दिन पांच हजार किलो आम और मंगवाए गए। इस जत्रा में रत्नागिरी और देवगढ़ के हापुस आम के अलावा आम से बना पल्प, आम का मावा, आम पापड़, अचार, अमचूर, मुरब्बा, कोकम शर्बत आदि की भी बिक्री हुई। यहां तीन सौ रुपये से 13 सौ रुपये दर्जन तक के आम बिके। आयोजक सुधीर दांडेकर व राजेश शाह ने बताया कि रविवार को करीब पांच हजार किलो आम और मंगवाए गए। कई व्यापारियों ने लोगों के घर आम पहुंचाने का ऑर्डर भी बुक किया। आयोजन स्थल पर आम खाने के लिए विशेष स्टाल लगाया गया था जिसमें तीन दिनों में 12 हजार आम खाए गए। इन आमों की गुठलियां वन विभाग को दी जाएंगी ताकि वे इसके पौधे तैयार कर सकें।
जत्रा में इस तरह सजाकर रखे गए आम
- फोटो : सोशल मीडिया
इस मेंगो जत्रा में करीब 24 आम उत्पादक रत्नागिरी और देवगढ़ से आए थे। पहले दिन 120 टन आम इंदौर आया था। इसके बाद अंतिम दिन 5 हजार किलो आम और मंगवाया गया। जत्रा में तीन करोड़ से अधिक के आम बिके। पूरी जत्रा में कुल 125 टन हापुस आम आया था। कोंकण का हापुस स्वर्गबूटी यहां सबसे ज्यादा पसंद किया गया। इस आम की खासियत है कि इसकी कीमत साइज से तय की जा ती है। ये आम 1 हजार से डेढ़ हजार रुपये दर्जन में बिकता है। कहा जाता है कि ये स्वर्ग के देवताओं को भी पसंद है इसीलिए इसे स्वर्गबूटी आम कहा जाता है।